छोटे बच्चों में बढ़ रहे हैं इन 5 तरह के कैंसर के मामले, जानें क्या हैं इनके लक्षण और कारण
हर साल 15 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस मनाया जाता है। आपको बता दें कि बच्चों में होने वाला कैंसर वयस्कों के कैंसर से अलग होता है। इनमें लाइफस्टाइल या तंबाकू जैसे कारण आमतौर पर जिम्मेदार नहीं होते हैं।
Written by Anju Rawat|Updated : February 16, 2026 3:04 PM IST
International Children's Cancer Day: बच्चों में कैंसर के मामले बेहद आम हो गए हैं। इसी को मद्देनजर रखते हुए हर साल 15 फरवरी को लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंटरनेशलन चिल्ड्रन कैंसर डे मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य शुरुआती निदान को बढ़ावा देना और निर्धन परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
Cancer Types in Kids: कैंसर को लंबे समय तक वयस्कों की बीमारी माना जाता रहा है। लेकिन, हाल के वर्षों में छोटे बच्चों में भी कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि, बच्चों में कैंसर अब भी दुर्लभ है। बच्चों में समय पर पहचान और सही इलाज से ज्यादातर कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। बच्चों में कैंसर तब गंभीर रूप लेता है, जब शुरुआती लक्षणों को आम बीमारी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। बच्चों में कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज करना बेहद भारी पड़ सकता है। इसलिए माता-पिता का जागरूक होना बेहद जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल 15 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस मनाया जाता है। आपको बता दें कि बच्चों में होने वाला कैंसर वयस्कों के कैंसर से अलग होता है। इनमें लाइफस्टाइल या तंबाकू जैसे कारण आमतौर पर जिम्मेदार नहीं होते हैं। अधिकतर मामलों में यह कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि या जेनेटिक बदलाव से जुड़ा होता है। आइए, आकाश हेल्थकेयर के डायरेक्टर- सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. अरुण कुमार गिरी से जानते हैं बच्चों में कौन-से कैंसर सबसे आम है?
1. ल्यूकेमिया (Leukemia)
ल्यूकेमिया, छोटे बच्चों में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। यह ब्लड और बोन मैरो का कैंसर होता है, जिसमें शरीर असामान्य सफेद रक्त कोशिकाओं का अत्यधिक उत्पादन करने लगता है। ये कैंसर कोशिकाएं, स्वस्थ कोशिकाओं को नष्ट करके संक्रमण से लड़ने की क्षमता खत्म कर देती हैं। इस बीमारी में बच्चों की इम्यूनिटी बेहद कमजोर हो जाती है और उनके शरीर में खून से जुड़े सामान्य कार्य प्रभावित होने लगते हैं। यह कैंसर तेजी से या धीमी गति से फैल सकता है।
ल्यूकेमिया के लक्षण
बार-बार संक्रमण होना: ल्यूकेमिया कैंसर होने पर बच्चों को बार-बार संक्रमण हो सकता है। अगर आपके बच्चे को अक्सर ही संक्रमण होता है, तो इस संकेत को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह ल्यूकेमिया कैंसर का संकेत हो सकता है।
थकान और कमजोरी: ज्यादातर बच्चे एक्टिव रहते हैं और उथल-फुथल करते रहते हैं। लेकिन, अगर आपका बच्चा बिना किसी शारीरिक गतिविधि के ही थकान और कमजोरी की शिकायत करता है, तो इस संकेत की अनदेखी बिल्कुल न करें। इस स्थिति में ल्यूकेमिया कैंसर की जांच जरूर कराएं।
त्वचा का पीला पड़ना: ल्यूकेमिया कैंसर की वजह से बच्चों के त्वचा का रंग पीला पड़ना शुरू हो सकता है। हालांकि, यह पीलिया की वजह से भी हो सकता है। इसलिए इस स्थिति में जांच करानी बहुत जरूरी है।
नाक या मसूड़ों से खून आना: कई बच्चों के नाक या मसूड़ों से खून निकलता है, इस संकेत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे में एक बार बच्चे का चेकअप जरूर कराएं। यह ल्यूकेमिया का संकेत हो सकता है।
शरीर पर नीले या लाल निशान: शरीर के नीले या लाल निशान भी ल्यूकेमिया की ओर इशारा कर सकते हैं। इसलिए अगर आपके बच्चे में ऐसा कुछ लक्षण दिख रहा है तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।
हड्डियों या जोड़ों में दर्द: ल्यूकेमिया कैंसर की वजह से बच्चे को हड्डियों और जोड़ों में भी दर्द हो सकता है। हालांकि, जोड़ों का दर्द हर बार ल्यूकेमिया कैंसर का संकेत नहीं होता है। कई बार यह अन्य कारणों से भी हो सकता है।
अभी तक ल्यूकेमिया कैंसर के सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुए है। कुछ मामलों में इसे जेनेटिक बताया गया है। वहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान रेडिएशन एक्सपोजर या जन्मजात इम्यून समस्याएं इस बीमारी के जोखिम बढ़ाती हैं।
2. ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor)
ल्यूकेमिया के बाद बच्चों में दूसरा सबसे आम कैंसर ब्रेन ट्यूमर माना जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि से होता है। ब्रेन ट्यूमर कैंसरकारी या गैर-कैंसरकारी हो सकता है। जांच के बाद ही यह पता चल पाता है कि ब्रेन ट्यूमर कैंसर है या नहीं। ब्रेन ट्यूमर की वजह से मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है। इससे मस्तिष्क के कार्य प्रभावित होते हैं। यह एक बेहद गंभीर स्थिति होती है, इसलिए इसके रोगी को आपातकालीन इलाज की जरूरत पड़ती है।
ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
लगातार सिरदर्द: अगर बच्चे लगातार या लंबे समय से सिरदर्द हो रहा है, तो इस संकेत की अनदेखी न करें। यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। खासकर, अगर हर सुबह बच्चा सिरदर्द की शिकायत कर रहा है तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें।
बिना वजह उल्टी: बच्चे को बार-बार उल्टी की समस्या हो रही है तो यह भी ब्रेन ट्यूमर की तरफ इशारा कर सकता है। इसलिए इस संकेत की अभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
नजर कमजोर होना: अगर बच्चा धुंधली दृष्टि या कम दिखाई देने की शिकायत कर रहा है, तो यह भी ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। इसकी वजह से बच्चे को डबल भी दिखाई दे सकता है।
चलने में मुश्किल होना: ब्रेन ट्यूमर की वजह से बच्चे को चलने या संतुलन बनाने में मुश्किल हो सकती है। यह रीढ़ की हड्डियों के कार्य को प्रभावित कर सकता है।
दौरे पड़ना: ब्रेन ट्यूमर की वजह से दौरे भी पड़ सकते हैं। यह मिग्री का कारण बन सकत है।
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ब्रेन ट्यूमर के कारण
ज्यादातर मामलों में ब्रेन ट्यूमर के कारण अज्ञात रहते हैं। कुछ जेनेटिक सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान किसी हानिकारक तत्व के संपर्क को इसका संभावित कारण माना जाता है।
3. न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma)
यह कैंसर आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में पाया जाता है। यह नर्व सेल्स से शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे पेट, छाती और गर्दन तक फैल जाता है। यह एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। इस बीमारी का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की मदद से किया जाता है। इस प्रकार के कैंसर का समय पर इलाज बहुत जरूरी होता है। अन्यथा, बच्चे की जान तक जा सकती है।
न्यूरोब्लास्टोमा के लक्षण
पेट में गांठ या सूजन: न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर होने पर बच्चे के पेट में गांठ या सूजनदिखाई दे सकती है। अगर आपके बच्चे के पेट में कोई असामान्य गांठ दिखाई दे रही है, तो इस संकेत को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। यह न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर का संकेत हो सकता है।
पेट दर्द या कब्ज: अगर आपके बच्चे को अक्सर कब्ज की दिक्कत बनी रहती है या पेट दर्द रहता है तो इसे सामान्य बिल्कुल न समझें। यह न्यूरोब्लास्टोमा का लक्षण हो सकता है।
वजन कम होना: बच्चे के लगातार वजन कम होने की स्थिति को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसलिए अगर आपके बच्चे का वजन कम हो रहा है तो इस पर ध्यान जरूर दें।
हड्डियों में दर्द: न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर की वजह से छोटे बच्चों की हड्डियों में दर्द भी हो सकता है। हालांकि, यह कम मामलों में होता है।
आंखों के आसपास सूजन: इस कैंसर की वजह से आंखों के आसपास सूजन हो सकती है। आंखों के आसपास नीला पड़ सकता है।
चिड़चिड़ापन: अगर आपका बच्चा अचानक से चिड़चिड़ा हो गया है तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। यह न्यूरोब्लास्टोमा का लक्षण हो सकता है।
न्यूरोब्लास्टोमा का कारण
इस कैंसर को, भ्रूण अवस्था में नर्व सेल्स के असामान्य विकास से जोड़ा जाता है। यह आमतौर पर किसी बाहरी कारण या लाइफस्टाइल से संबंधित नहीं होता है।
4. विल्म्स ट्यूमर (Wilms Tumor)
विल्म्स ट्यूमर को नेफ्रोब्लास्टोमा (Nephroblastoma) भी कहा जाता है। यह बच्चों में होने वाला, किडनी का सबसे आम कैंसर है। यह आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर एक ही किडनी में होता है। इस कैंसर का समय पर इलाज बहुत जरूरी है। यह किडनी फेलियर का कारण भी बन सकता है। हालांकि, समय पर इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है। सर्जरी, कीमोथेरेपी की मदद से इस कैंसर का इलाज किया जाता है।
विल्म्स ट्यूमर के लक्षण
पेट में सूजन या गांठ: अगर आपके बच्चे के पेट में सूजन या गांठ महसूस हो रही है तो इस संकेत की अनदेखी न करें। यह विल्म्स ट्यूमर का संकेत हो सकता है।
पेट दर्द: किडनी के इस कैंसर की वजह से बच्चों को पेट में तेज और असहनीय दर्द हो सकता है। इसलिए अगर आपके बच्चे के पेट में दर्द की समस्या हो रही है, तो इस नजरअंदाज न करें।
पेशाब में खून: अगर आपके बच्चे को पेशाब में खून आ रहा है, तो इस संकेत की अनदेखी न करें। यह विल्म्स ट्यूमर का संकेत हो सकता है।
बुखार: वैसे तो बुखार आना एक आम समस्या है। लेकिन, अगर आपके बच्चे को अक्सर ही बुखार आ जाता है या वह बीमार रहता है तो इस संकेत की अनदेखी न करें और एक बार सही से चेकअप जरूर कराएं।
हाई ब्लड प्रेशर: बच्चों में हाई बीपी की दिक्कत बेहद कम रहती है। अगर आपके बच्चे का बीपी बढ़ रहा है तो यह विल्म्स ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। बीपी बढ़ते ही डॉक्टर से जरूर मिलें।
भूख कम लगना: अगर बच्चे की भूख अचानक से कम हो गई है, तो इस संकेत को सामान्य समझकर नॉर्मल न समझें।
विल्म्स ट्यूमर का कारण
इस कैंसर का संबंध कुछ जन्मजात स्थितियों और जेनेटिक बदलावों से माना जाता है। कई मामलों में एक ही किडनी प्रभावित होती है।
5. रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma)
रेटिनोब्लास्टोमा बच्चों में होने वाला आंखों का एक गंभीर कैंसर है। यह रेटिना में विकसित होता है। यह कैंसर आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। यह आंखों की कोशिकाओं में अचानक से हो सकता है या फिर जेनेटिक कारणों से हो सकता है। इस कैंसर की पहचान अक्सर फोटो में आंख से सफेद रिफ्लेक्शन दिखने से होती है।
रेटिनोब्लास्टोमा के लक्षण
आंख में सफेद चमक: अगर आपके बच्चे को आंख में सफेद चमक सी दिख रही है, तो रेटिनोब्लास्टोमा का संकेत हो सकता है। इस संकेत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
भेंगापन: अगर आप बच्चे में भेंगापन जैसा अनुभव कर रहे हैं तो भी एक बार डॉक्टर से जरूर मिलें। इस स्थिति में डॉक्टर रेटिनोब्लास्टोमा की जांच करवा सकते हैं।
आंखों में लालिमा या सूजन: आंखों में रेडनेस होना आम हो सकता है। लेकिन, अगर बच्चे की आंख में अक्सर ही रेडनेस बनी रहती है तो इस संकेत को नजरअंदाज न करें। खासकर, अगर रेडनेस के साथ सूजन भी है तो चेकअप जरूर कराएं।
आंख में दर्द: अगर बच्चा अक्सर ही आंखों में दर्द की शिकायत करता है, तो आपको आंखों का चेकअप जरूर कराना चाहिए। यह भी रेटिनोब्लास्टोमा का संकेत हो सकता है।
रेटिनोब्लास्टोमा का कारण
यह कैंसर ज्यादातर मामलों में जेनेटिक होता है। कुछ मामलों में यह जन्म के समय ही मौजूद होता है और समय के साथ बढ़ जाता है। इसलिए समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
बच्चों में कैंसर क्यों अलग होता है?
डॉ. अरुण कुमार गिरी बताते हैं कि बच्चों में होने वाले अधिकतर कैंसर तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन, अच्छी बात यह है कि ये इलाज के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी की मदद से बच्चों में होने वाले कैंसर का इलाज संभव है।
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Highlights:
अगर बच्चे को बार-बार बुखार होता है या उसका वजन कम होता जाता है तो इसे नजरअंदाज न करें।
बच्चे में कोई असामान्य गांठ दिखने पर जांच जरूर कराएं।
नियमित टीकाकरण और सामान्य स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
परिवार में जेनेटिक बीमारी का इतिहास हो तो सतर्क रहें।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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