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मम्मियों से जानें, कब दिखाए उनके बच्चों ने सबसे भयानक नखरे!

बच्चों के ऐसे नखरे जो आपको हंसने पर मज़बूर कर देते हैं।

मम्मियों से जानें, कब दिखाए उनके बच्चों ने सबसे भयानक नखरे!

Written by Editorial Team |Updated : May 12, 2017 1:22 PM IST

पैरेंटिंग एक बहुत ही मुश्किल काम है। रातभर जागने के अलावा, गंदे डायपर का कभी न ख़त्म होनेवाला अम्बार, गंदे कपड़े जो हर घंटे बदलने पड़ते हैं, तो यह आपके ही बच्चे की मेहरबानी हैं जो आपको इन सबमें व्यस्त रखने का काम करते हैं और काम को बहुत मुश्किल बनाते रहते हैं। कपड़े के डायपर इस्तेमाल करते हुए इन 5 बातों का ध्यान रखें!

बार-बार थूकना, डायपर फेंकना, बार-बार हाथ-पैर पटकना और जिस तरह से वे सबके सामने आपको शर्मिंदा करनेवाले काम करते हैं, और ऐसे में आपके मन में यही सवाल आएगा कि 'मेरे बच्चे ही क्यों हैं?' ख़ैर यह तो रही मज़ाक की बात। लेकिन भले ही हमारे बच्चे बड़े-बड़ों पर भारी पड़ते हों लेकिन हमें इन छोटे शैतानों से प्यार भी तो उतना ही करते हैं ना? सच पूछो तो ज्यादातर समय हमारे बच्चे हमारे धैर्य का इम्तिहान लेते रहते हैं और नखरे दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं रखते। ऐसी ही कुछ माओं नें हमसे बात की जिन्होंने बतायीं ऐसी अजीब कहानियां- जहां उन्हें अपने बच्चों के नखरों के आगे झुकना पड़ा।

सूरज को बोलो धूप न दे- मेरी 2 साल की बच्ची बहुत बातूनी है। इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं जिसके बारे में उसके पास कोई राय नहीं। जब वह छोटी थी, तो उसे धूप में जाना पसंद नहीं था। ऐसे ही एक दिन जब हम बाहर निकले तो बहुत धूप थी। तब उसने कहा सूरज को बोलो धूप न दे क्योंकि मेरी आंखें बंद हुई जा रही हैं। जब मैंने उससे कहा कि मैं ऐसा नहीं कर सकती और हमें शाम तक इंतज़ार करना पड़ेगा, क्योंकि शाम को सूरज डूब जाता है और धूप नहीं लगती, तो वह तकरीबन 20-मिनट तक मुझपर गुस्सा दिखाने वाले नखरे करती रही।

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क्योंकि आपने ग़लत जवाब दिया- ध्वनि व्यास कहती हैं, मैं काल्पनिक स्थितियां बनाती थी और मेरा बच्चा उस खेल में हिस्सा लेना पसंद करता था। एक दिन वह जादू से जानवरों को बुला रहा था और मुझे बताना था कि उसने कौन-से जानवर को बुलाया। लेकिन खेलते-खेलते अचानक वह नखरे दिखाने लगा क्योंकि मैंने जिस जानवर का नाम लिया वह उसके हिसाब से ग़लत था। यही नहीं मैंने उसे जानवर का जो रंग बताया वह भी ग़लत ही था, तो उसके नखरे थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। जानते हैं मैंने क्या जवाब दिया? मैंने उससे कहा कि उसने एक भेड़ बुलायी है जिसका रंग पर्पल है।

क्योंकि ग्रीन रंग मेरा फेवरेट है- जब आपके पास बच्चा होता है तो आप अपनी मर्ज़ी से चीज़ें नहीं चुन सकते। मेरी बेटी का पसंदीदा रंग बैंगनी, नारंगी, नीला और न जाने क्या-क्या है जो सप्ताह के अलग-अलग दिन, मौसम, हवा की दिशा के हिसाब से बदलता बदलता रहता है। एक दिन मैंने अपनी बेटी को बताया कि मेरा पसंदीदा रंग हरा है, और उसने रोना शुरू कर दिया। दरअसल, उस दिन उसका भी पसंदीदा रंग ग्रीन था।

जब कोई छोटा बच्चा आपके आसपास हो तो ज़िंदगी बहुत अच्छी हो जाती है, लेकिन केवल तब नहीं जब आपका बच्चा आपको नखरे दिखाने और गुस्सा दिलाने का काम करता है। तो अगर आपके पास भी हैं ऐसी कुछ कहानियां, जिन्हें याद कर आप खूब हंसते हैं तो हमें बताएं। आप अपने अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

Read This in English.

अनुवादक-Sadhana Tiwari

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चित्र स्रोत- Shutterstock

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