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Written By: Yogita Yadav | Published : September 11, 2019 6:49 PM IST
Activity for children, benefits of puzzle, Brain Development, Child development, Motor skills, Puzzle game benefits, benefits of solving puzzle. © Shutterstock.
अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चे का आई क्यू लेवल और मोटर स्किल दोनों ही बेहतर हों तो बच्चे को पजल गेम (Puzzle game benefits) खेलने के लिए दें। इस टूटे-फूटे रंगीन बॉक्स उसमें कई तरह के कौशलों का विकास करते हैं। हाल ही में आए एक सर्वे में तो यह भी सामने आया है कि गेमिंग में भारतीय महिलाओं की पहली पसंद पजल (Puzzle game benefits) ही है। क्या आप जानते हैं कि पजल सिर्फ टाइमपास गेम ही नहीं है, बल्कि इससे कई तरह के कौशलों का विकास होता है। चाइल्ड काउंसलर डॉ प्रियंका श्रीवास्तव तो मानती हैं कि यह छोटे बच्चों के लिए और भी लाभदायक है।
'2018 ग्लोबल गेमिंग रिसर्च' शीर्षक से प्रकाशित अध्ययन में दावा किया गया है कि, "पिछले तीन महीने में उपयोगकर्ता द्वारा डाउनलोड किए गए सभी गेमों में 65 फीसदी एक्शन गेम थे। जबकि भारतीय महिलाओं द्वारा डाउनलोड किए गए 60 फीसदी गेम पजल पर आधारित थे। मम्मियों के लिए भले ही यह शौक हो पर बच्चों के लिए तो स्टडी और स्किल डेवलपमेंट मेथड है। जानते हैं बच्चों के विकास में पजल गेम के फायदे
पजल के अलग-अलग बॉक्स और पड़ाव एक नई समस्या लेकर आते हैं। इसे सॉल्व करते वक्त बच्चे मनोरंजक अंदाज में समस्याओं को सुलझाना सीखते हैं। अलग-अलग डिब्बों को उठाते हुए बच्चे सोचते हैं कि इसे कहां लगाना है, क्यों लगाना है, इससे क्या बनेगा। इस तरह उनकी कल्पना शक्ति का भी विस्तार होता है और अंत में वे समस्या को सुलझाना भी सीख जाता है। यह प्राॅॅॅब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड और रीजनिंग जीवन भर उनके काम आते हैं।
पजल में हर पड़ाव पर कुछ दिशा निर्देश दिए होते हैं, जिनका पजल सॉल्व करते वक्त पालन करना होता है। पजल तभी पूरी होती है जब इन दिशानिर्देशों का पालन किया जाए। इस तरह बच्चों को समझ आता है कि कुछ अचीव करना है तो दिशा निर्देशों का पालन करना ही होगा। नियम में रहकर गोल अचीव करना अपने आप में एक बेहतरीन आदत है। जिसका प्रशिक्षण बच्चे पजल के माध्यम से बहुत पहले ही ले लेते हैं।
पजल में मन और मस्तिष्क को एकाग्रचित करना होता है। इसके साथ ही पजल के हर पड़ाव को पूरे ध्यान से देखना और हाथों को उसके हिसाब से निर्देश देते जाते हैं। कौन सा बॉक्स कहां फिट बैठ रहा है, किस रंग को कहां लगाना है, यही आंखों और हाथों का समन्वय होता है, जिसके सही इस्तेमाल से पजल पूरी होती है। लिखने, पढ़ने या चित्र बनाने से लेकर पुल बनाने तक में जीवन भर आंखों और हाथों के इसे समन्वय की जरूरत पड़ती है।
रोजमर्रा के कामों में अंगुलियों, अंगूठे और कलाई की छोटी मांसपेशियों की सर्वाधिक आवश्यकता पड़ती है। पजल में इन्ही छोटी मांसपेशियों को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जिससे उनकी कसरत होती है और वे मजबूत बनती हैं। पजल के बड़े और छोटे टुकड़े, मोड़, सर्कल आदि को सही तरीके से सेट करने में इन्हीं मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है। इनकी मजबूती ड्राइंग, हैैंैंड राइटिंग और संगीत वाद्ययंत्रों को बजाने में मदद करती है।
एक वयस्क की तरह निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना और उस पर सफलता प्राप्त बच्चे को गहन संतुष्टि देता है। पजल को सुलझाते हुए वे कई चुनौतियों का सामना करते हैं। जब वे इन पर सफलता पा लेते हैं तो उन्हें खुद पर गर्व महसूस होता है। इससे उनमें न केवल आत्म-सम्मान की भावना बढ़ती है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
अक्सर पजल को पूरा करते वक्त बच्चे अपने साथ के बच्चों, बहन-भाइयों, माता-पिता आदि से चर्चा करते हैं और आइडिया लेते हैं कि यह बॉक्स कहां लगेगा, यहां लगाएं तो क्या होगा और वो रंग कहां गया आदि। इस तरह उनमें सोशल स्किल भी बढ़ती है। उन्हें सहज ही इस बात का अभ्यास होने लगता है कि बातचीत से भी बहुत सारी प्राॅॅॅब्लम सॉल्व हो सकती हैं।
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