Cerebral Palsy : सेरेब्रल पाल्सी के 28,234 मरीजों को ऑपरेशन के बाद मिला सामान्य जीवन
गर्भावस्था के दौरान ऐसे कई लक्षण हैं जो विकसित हो रहे शिशु के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं और आगे चल कर मस्तिष्क पक्षाघात यानी सेरेब्रल पाल्सी का कारण बन सकते हैं।
9 साल की मौसमी डाली और 8 साल के दिव्यांशु कुमार सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral palsy) से पीड़ित थे। नारायण सेवा संस्थान में निशुल्क ऑपरेशन के बाद उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखी है। इस संस्थान ने सेरेब्रल पाल्सी के 28,234 मरीजों को ऑपरेशन बाद की सेवाएं देकर, उनका जीवन सामान्य बनाने में मदद की है।
मौसमी डाली को एक्टिव एंकल टो मूवमेंट की समस्या थी और उसका टखना सही काम नहीं करता था। बच्ची अपनी टांग सीधी कर उठा तो सकती थी, लेकिन दस डिग्री से ज्यादा ऊपर नहीं उठा पाती थी। उपचार के बाद अब उसका पैरों का अंगूठा सही काम कर रहा है, वह अपनी टांग उठा पा रही है और कूल्हों में भी मजबूती आई है। जब डाली की इस समस्या का पता चला तो विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की टीम ने उस पर काम शुरू किया। उसे कई एक्सरसाइज कराई गई जैसे घुटने मोड़कर बैठना और पैसिव एक्सरसाइज तथा एक्टिव व पैसिव नी एक्सटेंशन एक्सरसाइज, हिप अबडक्टर्स और अबडक्टर्स रोम एक्सरसाइज आदि।
उसे क्वाड्रीकैप्स हैम्स्ट्रिंग रोम एक्सरसाइज, सस्पेंशन बैड एक्सरसाइज और एक्टिव असिस्टेड एक्सरसाइज जैसे उपचार दिए गए। उपचार से पहले मौसमी का घुटना 30 डिग्री तक मुड़ता था और टखना बिलकुल भी नहीं मुड़ पाता था। अब वह टांग सीधी कर उठा लेती है और ऑपरेशन के बाद प्रोसीजर सही ढंग से कर रही है। उसे गेट ट्रेनिंग वाॅकर की मदद से खुद चलने की सलाह दी गई है।
गर्भस्थ शिशु को सेरेब्रल पैल्सी का शिकार बनने से बचाएं
दूसरा मामला दिव्यांशु कुमार का था, जो सेेरेब्रल पाल्सी के कारण (Causes of Cerebral palsy) अपना संतुलन और समन्वय कायम नहीं रख पाता था और अपने अंगों का सही इस्तेमाल भी नहीं कर पाता था। उसका टखना और पैरों का अंगूठा काम नहीं करता था। उसकी हड्डियां अकड़ी हुई थीं और इसके चलते उसकी जांघों की मांसपेशियां भी सही ढंग से काम नहीं कर रही थीं। नारायण सेवा संस्थान के डाॅ. करण सिंह देवड़ा का कहना है कि मौसमी और दिव्यांशु दोनों ही सेेरेब्रल पाल्सी (Cerebral palsy treatment) के गम्भीर मरीज थे। हालांकि, दोनों की स्थिति अलग-अलग थी। इनकी स्थिति को देखते हुए हमने उपचार की रणनीति बनाई और वह सफल रही।
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल कहते हैं, अक्सर सेरेब्रल पाल्सी के मरीजों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है, क्योंकि अभिभावकों को लगता है कि इसका कोई उपचार नहीं है। इसके अलावा कई संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले निशुल्क उपचार से भी मरीजों की स्थिति में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। एनएसएस ने पांच वर्ष से कम उम्र के सेरेब्रल पाल्सी के 9,121 मरीजों का उपचार किया है। हम इन दिव्यांग बच्चों को उम्मीद की एक किरण दिखाना चाहते हैं और निशुल्क ऑपरेशन व उपचार कर रहे हैं।''