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Written By: Anshumala | Published : January 11, 2020 4:02 PM IST
cardic arrest
कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) के कारण आम लोगों के बीच होने वाली मौतों की संख्या कम करने की कोशिश में भारत के हेल्थकेयर प्रदाता मणिपाल हॉस्पीटल्स ने दिल्ली के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए कार्डियोपल्मोनरी रीससिटेशन (CPR Technique) पर एक जानकारी भरा सत्र आयोजित किया। 8 जनवरी को ''वर्ल्ड एम्बुलेंस डे'' के उपलक्ष में इमरजेंसी मेडिसिन के प्रमुख डॉ. सुशांत छाबड़ा और उनकी टीम ने पुलिस वालों के साथ अग्नि शमनकर्मियों को यह बुनियादी जानकारी दी कि किसे, कब और कैसे सीपीआर (CPR in cardiac arrest) देना है।
बेसिक (बुनियादी) लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और सीपीआर ट्रेनिंग (CPR Training) के अलावा इस टीम ने स्ट्रेस मैनेजमेंट, डायट कंट्रोल, व्यायाम की दिनचर्या और हार्ट अटैक के भिन्न लक्षणों (Heart attack symptoms) की चर्चा की जिस पर नजर रखना चाहिए। कार्डियो पल्मोनरी रीससिटेशन या सीपीआर (Cardiopulmonary resuscitation) से हृदय और मस्तिष्क को खून का प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलती है। यह आगे के उपाय किए जाने तक मस्तिष्क के काम-काज को मानवीय तौर पर बनाए रखने की एक कोशिश है तथा जाना-माना व प्रभावी तकनीक है, जिससे व्यक्ति के जिन्दा रहने की संभावना बनती है।
पड़ोसियों के सीपीआर एडमिनिस्ट्रेशन की मदद से कार्डियक अरेस्ट के मरीज को मिला नया जीवन
इस पहल के बारे में बताते हुए मणिपाल हॉस्पीटल (द्वारका) के हेड ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. सुशांत छाबड़ा ने कहा, “कार्डियो पल्मोनरी रीससिटेशन एक जीवनरक्षक तकनीक है, जो हार्ट अटैक (Heart attack) जैसी मेडिकल इमरजेंसी में उपयोगी होता है। यह ऐसी स्थिति होती है, जब किसी व्यक्ति का सांस चलना या हृदय की धड़कन रुक जाए। ऐसे मामलों में एम्बुलेंस भी मरीज के इमरजेंसी केयर की दिशा में अभिन्न भाग के रूप में अपनी भूमिका निभाती है। इस तरह, ''वर्ल्ड एम्बुलेंस डे'' के मौके पर भी हमलोगों ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और अग्निशमनकर्मियों को सीपीआर ट्रेनिंग दी, ताकि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। जान बचाने के लिए समय पर सहायता देना सबसे महत्वपूर्ण है और अक्सर यह जीवनरक्षक साबित होता है। आने वाले वर्षों में हमारा लक्ष्य देश भर में और ज्यादा नागरिकों तक पहुंचना है ताकि मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें सीपीआर के फायदे बताए जा सकें।”
हर साल 17.9 मिलियन लोगों को मौत कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से होती है। इसमें हृदय की बीमारी और स्ट्रोक शामिल है। भारत में होने वाली मौतों में 20 प्रतिशत कॉरोनरी हार्ट डिजीज (coronary heart disease) के कारण होती है। वर्ष 2020 तक सभी मौतों में एक तिहाई मौतें इसी के कारण हो सकती हैं, जिसमें कम उम्र के भारतीय लोग भी शामिल हैं। भारत में हृदय की बीमारी पश्चिम के मुकाबले 10 से 15 साल पहले होती है।