कैंसर से है बचना तो रातभर पानी में भिगोकर ही खाएं चावल

आर्सेनिक जहर को शरीर में प्रवेश करने से रोकना चाहते हैं तो चावलों को पकाने से पहले रातभर भिगोकर रखें।

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Written By: Editorial Team | Published : September 12, 2018 4:49 PM IST

चावल हमारे देश में बहुत से लोगों का मुख्य भोजन माना जाता है जिसे हर वर्ग का व्यक्ति खाता है। चावल को हमारी थाली का अहम हिस्सा भी माना जाता है साथ ही यह हमारे शरीर को कई पोषण तत्व देता है। इसमें विटामिन, फाइबर, नियासिन, कैल्शियम, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। तो वहीं बहुत से कारण ऐसे भी हैं जिसकी वजह से चावल आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित होता है।

एक शोध के अनुसार खाने की लगभग हर चीज में केमिकल्स मिले होते हैं। मसलन कृषि के समय फसल बढ़ाने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद में दूषित पानी और कीटनाशक आदि के उपयोग से फसल सेवन के लिहाज से हानिकारक बन जाती है और लंबे समय तक इन चीजों को खाने से कैंसर का खतरा हो सकता है।

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क्‍या कहता है शोध

इंग्लैंड में क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफ़ास्ट द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार, मिट्टी में औद्योगिक विषाक्त पदार्थों और कीटनाशक केमिकल्‍स युक्‍त पदार्थों ने लाखों लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है। कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों पर विभिन्न रिपोर्ट हैं, जिनमें बताया गया है कि आपके भोजन में केमिकल्स किस तरह तेजी से बढ़ रहे हैं और इनसे विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा होता है। चावल को भी आर्सेनिक ज़हर के रूप में जाना जाता है।

आर्सेनिक ज़हर क्या है?

आर्सेनिक एक केमिकल है, जो स्वाभाविक रूप से कई मिनरल्‍स में होता है। यह आमतौर पर सल्फर और धातुओं के संयोजन में पाया जाता है। औद्योगिक रूप से, यह आमतौर पर कीटनाशकों के उत्पादन में उपयोग किया जाता है। विभिन्न देशों में ज़मीन के नीचे मिलने वाले पानी में नैचुरल आर्सेनिक का स्तर अधिक है, जिसमें बांग्लादेश और भारत जैसे देश भी हैं। यह मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है।

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आर्सेनिक जहर को रोकने के उपाय

आर्सेनिक जहर को रोकने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि चावल को पकाने से पहले रातभर भिगोकर रखें। इससे ज़हरीले तत्वों का स्तर लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इस शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने अलग-अलग तरीकों से चावल पकाए और फिर उनकी जांच की। जैसे पहले, उन्होंने पानी के दो हिस्सों के अनुपात को चावल के एक हिस्से में इस्तेमाल किया, जहां खाना पकाने के दौरान पानी उबाला गया था। दूसरे तरीके में, चावल का एक हिस्सा और पानी के पांच हिस्से थे और चावल को अतिरिक्त पानी से धोया गया।

इन प्रयोगों से पता चलता है कि चला कि आप जिस तरीके से चावल पकाते हैं, उन तरीके पर भी यह बात निर्भर करती है कि आपके लिए चावल खाना कितना नुकसानदायक साबित होगा या उसमें मौजूद रसायनों का आपके शरीर पर कैसा असर होगा।

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