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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : August 13, 2018 4:27 PM IST
कैंसर का इलाज में प्रयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी इंसान के जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है। कैंसर के मरीज में तमात तरह साईड इफेक्ट्स होते हैं। कीमोथेरपी से मरीज की हालत मर्ज से ज्यादा दयनीय हो जाती है।
हाल ही में हुए एक शोध में एक ऐसी तकनीक को इजाद किया गया है जो कैंसर इलाज के दौरान होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकती है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी लर्निग मशीन तकनीक को विकसित किया है जो दिमाग के कैंसर में होने वाली कीमोथेरपी और रेडियोथेरपी के दुष्प्रभावों को कम कर सकती है। इस शोध में एक भारतीय मूल के डॉक्टर भी शामिल थे।
ग्लियोब्लास्टोमा एक घातक ट्यूमर है, जो मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में होता है और इससे पीड़ित मरीज पांच साल से ज्यादा नहीं जी पाते हैं। ग्लियोब्लास्टोमा के मरीजों को आमतौर पर दवाओं का सुरक्षित खुराक दिया जाता है, फिर भी उनपर दवाओं का दुष्प्रभाव होने का खतरा बना रहता है।
प्रीवेंटिव ओन्कोलॉजी कैंसर को रोकने और शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाने के लिए कारगर है।
नई सेल्फ लर्निग मशीन लर्निग तकनीक से दवाओं की खुराक दिए जाने से उसका दुष्प्रभाव कम किया जा सकता है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि परंपरागत उपचार विधि की तुलना में नई उपचार तकनीक में मरीजों को खतरे को कम करती है। और इस तकनीक के इस्तेमाल से फायदे का प्रतिशत भी ज्यादा रहता है।
अमेरिका के बोस्टन स्थित एमआईटी के प्रमुख अनुसंधानकर्ता पारीख शाह ने कहा, "हमारा लक्ष्य मरीजों के ट्यूमर के आकार को घटाना है. साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मरीजों पर इसका दुष्प्रभाव भी कम हो।"
कैंसर से बचने वाले बच्चों में हार्मोन से संबंधी रोगों का खतरा ज्यादा होता है।
परीक्षण के दौरान 50 मरीजों पर इसका प्रयोग किया गया, जिसमें उपचार के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट का उपयोग कर दवा की खुराक को तकरीबन एक-चौथाई या आधी मात्रा कर दी गई, जबकि ट्यूमर के आकार में काफी कमी आई।
चित्रस्रोत: Shutterstock.