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इस नये सिस्टम से ट्यूमर की शुरुअात में ही हो सकती है पहचान

शोधकर्ताओं ने शरीर के अंदर लगने वाली एक वायरलेस जीपीएस सिस्टम बनाने का दावा किया है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : August 23, 2018 4:08 PM IST

शरीर में जब भी कोई नुकसानदायक अणु दिखते हैं तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्रिया उसे किसी कोने में बांध देती है। यह बंधा (फिक्स) हुआ कण बाद में किसी गांठ का रूप ले लेता है।

शरीर में होने वाले ट्यूमर खतरनाक बीमारियों के कारण बनते हैं। सबसे ज्यादा खतरा कैंसर जैसी बीमारी का होता है। अक्सर लोगों को ब्रेन और पेट या आंत में होने वाले ट्यूमर का तब बता चलता है जब वो कैंसर की लास्ट स्टेज पर होता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास सिस्ट‍म बनाने का दावा किया है। यह भी पढ़ेंः कैंसर की शुरुआत में ही पहचान हो जाये तो इलाज संभव। 

शोधकर्ताओं ने शरीर के अंदर लगने वाली एक वायरलेस जीपीएस सिस्टम बनाने का दावा किया है। यह जीपीएस सिस्टम शरीर के अंदर होने वाले किसी भी ट्यूमर की निगरानी करने में सक्षम है। इस सिस्टम की खास बात यह भी है कि यह शरीर के किस जगह लगायी जा सकती है इसका चयन भी कर सकती है। यह भी पढ़ेंः इन 7 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर हो सकता है ब्रेन ट्यूमर।

अमेरिका के मेसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और मेसाच्युसेट्स जनरल हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने इस शोध को पशुओं पर किया। परीक्षणों में वैज्ञानिकों की टीम ने देखा कि रिमिक्स नाम की प्रणाली सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के साथ इम्प्लांट का पता लगा सकेगी। इसी तरह के इम्प्लांट की मदद से शरीर के भीतर विशिष्ट स्थानों तक दवा पहुंचाई जा सकेगी। यह भी पढ़ेंः रीढ़ के हड्डी के दुर्लभ ट्यूमर का बेहतर इलाज है साइबरनाइफ।

इस सिस्टम की खास बात यह भी है कि इसे कोई वायरलेस संकेत देनी नहीं पड़ती है। यह शरीर से निकलने वाले उपकरण संकेतों को ही रिफ्लेक्ट करता है। इसमें किसी प्रकार की बैटरी लगाने की जरूरत नहीं होती है। यह भी पढ़ेंः डायबिटीज रोगियों में पैंक्रियाज कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.