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Written By: Editorial Team | Updated : July 30, 2019 4:37 PM IST
गरीब देशों में कैंसर के शिकार बच्चे जल्दी मौत के शिकार होते हैं.
childhood cancer: बचपन में ही कैंसर हो जाना अर्थात जिंदगी की शुरुआत में ही मौत का पैगाम मिल जाना है. हाल के वर्षो में बच्चे कैंसर के शिकार बहुत ज्यादा संख्या में हो रहे हैं. खासकर उन देशों में जो देश आर्थिक रूप से कमजोर हैं. हाल ही आयी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत जैसे निम्न व मध्यम आय वाले देशों के बच्चे उच्च आय वाले देशों की तुलना में 4 गुना से भी अधिक कैंसर से मरते हैं. यह रिपोर्ट 195 देशों में बाल और किशोर कैंसर पीड़ितों के आकलन करने के लिए किये गए पहले ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) अध्ययन में सामने आया है. भारत जैसे देश में childhood cancer की समस्या और भी गंभीर है.
स्टडी में सामने आए भारत से संबंधित आंकड़े बताते हैं कि हमारे देश में कैंसर से पीड़ित 35% बच्चे पांच साल तक जीवित रहते हैं. इसके विपरीत अमीर देशों में बाल चिकित्सा कैंसर के 80% रोगियों के साथ ऐसा होता हैं. सोमवार को द लैंसेट ऑन्कोलजी में प्रकाशित अध्ययन में बाल चिकित्सा कैंसर की इन असमानताओं को उजागर किया गया है.
इस स्टडी में कहा गया है कि भारत, चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे देशों में कैंसर पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे अधिक है. यही कारण है कि इन देशो पर बाल कैंसर का सबसे ज्यादा बोझ है.
परेल स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक (शिक्षाविद) बाल चिकित्सा ऑन्कोलजिस्ट डॉ. एस. डी. बनवाली के अनुासर, बच्चों में कैंसर के मरीजों की संख्या के मामले में भारत 5वें नंबर पर है. भारत में दुनियाभर के कैंसर पीड़ित बच्चों की संख्या का 20 प्रतिशत अनुपात है.
स्टडी में सामने आए तथ्यों के अनुसार, दुनिया में हर दिन 700 बच्चों में कैंसर डाइग्नोज हो रहा है. वहीं, दुनिया के 82 प्रतिशत कैंसर पीड़ित बच्चे विश्व के आर्थिक रूप से गरीब देशों में निवास करते हैं.
इन देशों में कैंसर पीड़ित बच्चों का बीमारी की चपेट में आने के बाद सर्वाइवल रेट 35 से 40 प्रतिशत है. जबकि अमीर देशों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत है.
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