डायबिटीज रोगियों में पैंक्रियाज कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है-रिसर्च

पैंक्रियाज कैंसर को अभी तक शुरुआती स्टेज में डायग्नोस करना कठीन था, जिसकी वजह से इसका इलाज सही समय पर नहीं हो पाता था।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : June 21, 2018 7:52 PM IST

डायबिटीज के रोगियों में कैंसर को जल्द पता लगाने के तरीके की खोज हुयी है। हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ कि पैंक्रियाज में होने वाले कैंसर का सबसे पहला लक्षण डायबिटीज होता है।

पैंक्रियाज कैंसर के मरीजों में एक सामान्य लक्षण पाया गया कि वो सभी तीन साल या उससे अधिक समय से डायबिटीज के रोगी थे।

गैस्ट्रोइंटरोलॉजिस्ट सुरेश चारी के अनुसार ''पैंक्रियाज कैंसर डायग्नोश होने के छः महीने के अंदर ही घातक हो जाता है। चारी कहते हैं कि पैंक्रियाज कैंसर को अभी तक शुरुआती स्टेज में डायग्नोस करना कठीन था, जिसकी वजह से इसका इलाज सही समय पर नहीं हो पाता था। नये शोध से इसे फर्स्ट स्टेज में ही डायग्नोस करना आसान होगा तो इसका सही समय पर आपरेशन और इलाज संभव होगा।''

पहली स्टडी में शोधकर्ताओं ने कैंसर से प्रभावित लोगों के ब्लडशूगर लेवल का पांच सालों तक के इतिहास का अध्ययन किया और पाया कि जो लोग कैंसर से प्रभावित थे उनके आयु आैर जेंडर में समानता पायी गयी।

इस समुह में शोधकर्ताऔं ने पाया कि कैंसर डायग्नोस होने के 30 से 36 महिने पहले ही ब्लडशुगर का लेवल बढ़ना शुरू हुआ।

pancreatic cancer

दूसरे ग्रुप में 600 लोगों के ब्लड शूगर के लेवल का विश्लेष्ण किया गया जिनका पैंक्रियाज के ट्यूमर का आपरेशन हुआ था। शोधकर्ताओं ने ट्यूमर के साइज को भी नोट किया।

चारी ने बताया कि ''इस ग्रुप में इस बात का पता चला कि ब्लडशूगर का लेवल बढ़ता जाता है जैसे-जैसे ट्यूमर का साइज बढ़ता जाता है। जिन मरीजों का ट्यूमर एक घन सेंटीमीटर से कम था उनमें ब्लडशूगर लेवल कम था उन मरीजों की तुलना में जिनका ट्यूमर अपेक्षाकृत बड़ा था।

दूसरे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कैंसर के खतरे का पूर्वानुमान लगाने वाले मॉडल को बनाने कि कोशिश की जिसमें उन्होंने पाया कि पैंक्रियाज कैंसर के लिए शूगर लेवल सबसे बडा खतरा है।

शोधकर्ताओं का मनना है कि इस शोध में पाये गये तथ्य भविष्य में पैंक्रियाज कैंसर को शुरूआती स्टेज में ही डायग्नोस करने में मददगार होगा।

शोधकर्ताओं ने जिस मॉडल को बनाया है उसे ''ईएनडीपीएसी स्कोर'' कहा जाता है। इसमें नये शुगर के मरीजों की पहचान की जाती है जिनको पैंक्रियाज के कैंसर होने का खतरा 30 से 40 प्रतिशत होता है। जिसमें लगभग चार से सात प्रतिशत लोगों को कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है।

चारी का कहना है कि ''इस शोध और मॉडल से इस बात का पता चलता है कि जिन रोगियों में हाई ब्लडशूगर और उच्च ईएनडीपीएसी स्कोर होता है तो उन लोगों को पैंक्रियाज कैंसर के खतरे से बचने के लिए जांच करवाते रहना चाहिए।''

इस शोध को गैस्ट्रोइंट्रेरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

स्रोत: ANI.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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