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Written By: Yogita Yadav | Published : November 17, 2018 8:59 PM IST
कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। शुरुआत में पता चलने पर 90 फीसदी कैंसर के मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। © Shutterstock
कैंसर ऐसी जटिल बीमारी है जिसे एक वाक्य में परिभाषित करना बेहद मुश्किल है। शरीर के भीतर होने वाली 100 से भी ज्यादा कैंसर बीमारियों के लिए मोटे तौर पर कैंसर शब्द ही प्रयोग किया जाता है। कैंसर शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित कर सकता है। यहां तक कि आंख और दिल जैसे अंगों में भी कैंसर हो सकता है।
पुरुषों में सबसे ज्यादा कॉमन कैंसर है: मुंह और गले (हेड ऐंड नेक कैंसर) का कैंसर, जो लगभग 60 फीसदी मामलों में होता है। दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है फेफड़ों का कैंसर। इसके अलावा, पेट के कैंसर भी खूब होते हैं। महिलाओं की बात करें तो उनमें सबसे ज्यादा कॉमन सर्वाइकल कैंसर होता है, लेकिन बड़े शहरों के आंकड़ों को ज्यादा तवज्जो दें तो अब ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइकल कैंसर से भी ज्यादा हो रहा है। यह भी पढ़ें - इंस्टाग्राम पोस्ट से नफीसा अली ने सभी को कर दिया उदास, कैंसर की तीसरी स्टेज पर हैं अभिनेत्री
लाइलाज नहीं है कैंसर
अभी तक लोग कैंसर का नाम सुनते ही उदास हो जाते हैं। पर आपको बता दें कि कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है। चिकित्सा विज्ञान ने अब इसका भी इलाज ढूंढ लिया है। बस जरूरत है समय रहते उपचार शुरू करने की। कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। शुरुआत में पता चलने पर 90 फीसदी कैंसर के मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
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कैंसर के उपचार की तकनीक
सर्जरी
कैंसर की चार स्टेज होती हैं- 1, 2, 3 और 4। इनमें से 1 और 2 स्टेज को शुरुआती अवस्था (अर्ली स्टेज) कहा जाता है। स्टेज 3 को इंटरमीडिएट और 4 को अडवांस स्टेज कहा जाता है। अगर कैंसर अर्ली स्टेज में है, तो डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। इसमें सर्जरी ही बेस्ट ऑप्शन है। अगर किसी मरीज को सर्जरी कराने की सलाह दी जा रही है तो उसे खुश होना चाहिए कि उसका कैंसर अभी शुरुआती स्टेज में ही है, जिसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। सर्जरी में रिस्क के चांस सिर्फ 0.001 फीसदी हैं। यह भी पढ़ें – साधारण जेनेटिक सिंड्रोम वाले बच्चों में भी हो सकती है ब्रेन ट्यूमर की संभावना
कीमोथेरेपी
कैंसर स्टेज 1 और 2 पार कर चुका है और तीसरी या चौथी स्टेज में है तो कैंसर के इलाज में काम आने वाली तीन तकनीकों (सर्जरी, कीमो और रेडिएशन थेरेपी) में से किन्हीं दो के कॉम्बिनेशन को उस पर इस्तेमाल किया जाता है। कौन से दो तरीके कब इस्तेमाल होंगे, यह मरीज की हालत देखकर डॉक्टर तय करते हैं। यह भी पढ़ें – अभिनेत्री सुजाता कुमार का निधन, इस खतरनाक बीमारी से थीं ग्रस्त
रेडियोथेरपी
कैंसर की स्टेज 3 और 4 के मरीजों के लिए ही है। एक और तरीके के कॉम्बिनेशन में इसे यूज किया जाता है। इसमें मशीन की मदद से कंट्रोल्ड रेडिएशन ट्यूमर पर डाले जाते हैं और इनसे कैंसर सेल को किल किया जाता है। यह ओपीडी प्रोसिजर है। यानी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। एक दिन में 15 मिनट में काम हो जाता है। हफ्ते में पांच दिन तक रेडियोथेरपी की जाती है और फिर दो दिन का गैप दे दिया जाता है। इसके बाद फिर हफ्ते में पांच दिन और फिर दो दिन का गैप। इस तरह कुल मिलाकर यह प्रोसेस डेढ़ महीने तक चलता है।
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