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Written By: Anshumala | Published : August 28, 2019 7:46 PM IST
The earlier the disease is diagnosed and treated, the greater the chance of its being cured. © Shutterstock
उत्तर भारत में प्रमुख स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, मैक्स हॉस्पिटल्स (गुरुग्राम) ने कैंसर के बढ़ते मामलों, कैंसर की पहचान, इलाज, इस क्षेत्र में हुई प्रगति और इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए आज रेवाड़ी में एक जन जागरूकता अभियान/कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर हाॅस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी की निदेशक डॉ. भावना सिरोही उपस्थित थीं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिशद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में कैंसर के मामलों में दोगुना वृद्धि हो गई है। 2016 में, भारत में 14 लाख कैंसर रोगी थे और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत में कैंसर के सभी मामलों में से 41 प्रतिशत कैंसर केवल स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर, मुंह के कैंसर और फेफड़े के होते हैं। भारत में, हर साल 450,000 फौलो अप मरीज होते हैं और हर साल कैंसर के 50 हजार नए मरीजों का पंजीकरण होता है, जबकि कैंसर चिकित्सा विषेशज्ञों की संख्या सीमित है।
भारत में कैंसर के कारण केवल हरियाणा में ही मृत्यु दर लगभग 39 प्रतिशत है। यह अनुमान लगाया गया है कि 2020 तक लगभग 17 लाख कैंसर के नए मामले दर्ज किए जाएंगे और हरियाणा में तब तक कैंसर के लगभग 6 लाख नए मामले दर्ज होने की उम्मीद है। विशेष रूप से गुरुग्राम, रेवाड़ी, पानीपत, सोनीपत, करनाल और फरीदाबाद सहित इन क्षेत्रों में तेजी से औद्योगीकरण और स्वच्छता के अभाव को कैंसर के मुख्य कारण के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
हाॅस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी की निदेशक डॉ. भावना सिरोही ने कहा, “कुछ प्रकार के कैंसर से पीड़ित रोगियों की संख्या में वृद्धि होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण लोग आमतौर पर शुरुआती लक्षणों की उपेक्षा करते हैं। अक्सर बीमारी के उन्नत चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। कैंसर के इलाज के बारे में जागरूकता पैदा करना और जीवनशैली में थोड़ा सुधार करके और स्व-परीक्षण सहित इसे रोकने के उपायों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसकी जांच और इलाज के लिए बेहतर और उन्नत प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं, लेकिन शुरुआती पहचान के तरीकों के बारे में लोगों को जानकारी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके लक्षणों की उपेक्षा की जाती है और इस कारण इसकी देर से पहचान की जाती है।’’
डॉ. सिरोही ने कहा, “भारत में कैंसर विशेषज्ञों की संख्या सीमित है। यहां सालाना 5 लाख से अधिक फॉलो अप वाले मरीज आते हैं और हर साल 3 लाख नए रोगियों का पंजीकरण होता है। लोगों को जागरूक होना चाहिए और समझना चाहिए कि उपलब्ध नवीनतम और उन्नत उपचार विकल्पों की मदद से रोग मुक्त होना और जटिल मामलों में भी बेहतर गुणवत्ता पूर्ण जीवन जीना संभव है। लीनियर एक्सीलरेटर जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीक, साइबर नाइफ जैसी कंप्यूटर एडेड एडवांस तकनीक ने कैंसर के इलाज में क्रांति ला दी है।’’