यूरिन टेस्ट से कैंसर का पता लगाया जा सकता है

शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पेट के कैंसर का पता उसके शुरुआत के समय ही लगाया जा सकता है. इसके लिए बहुत महंगे टेस्ट की जरूरत भी नहीं होगी. एक आसान से यूरिन टेस्ट के द्वारा कैंसर का पता लगाया जा सकता है.

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : September 5, 2019 8:24 PM IST

कैंसर की बीमारी विश्वभर के लिए एक संकट बनी हुयी है. शरीर के हर अंग में अलग-अलग कैंसर होते हैं. जिस अंग में कैंसर होता है उसी अंग के नाम पर कैंसर का नाम रख दिया जाता है. अगर कैंसर के प्रकारों की बात करें तो अब तक 100 से भी अधिक कैंसर के प्रकार पता लगाए जा चुके हैं. हाल के वर्षों में कैंसर के मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. सबसे अधिक कैंसर की बीमारी पेट के कैंसर की होती है. पेट के कैंसर के मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है क्योंकि पेट के कैंसर का लक्षण बहुत देर में समझ में आता है. जब तक पेट के कैंसर का पता चलता है, तब तक कैंसर कोशिकाएं बहुत फैल चुकी होती हैं.

हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पेट के कैंसर का पता उसके शुरुआत के समय ही लगाया जा सकता है. इसके लिए बहुत महंगे टेस्ट की जरूरत भी नहीं होगी. एक आसान से यूरिन टेस्ट के द्वारा कैंसर का पता लगाया जा सकता है.

यह यूरिन टेस्ट कलर चेंज होने पर आधारित होगा. शोध करने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि इस यूरिन टेस्ट से जानलेवा बीमारी कैंसर का आसानी से पता लगाया जा सकता है.

कैंसर टेस्ट कैसे किया गया 

यूरिन टेस्ट से कैंसर का पता लगाने वाले इस शोध को चूहों पर किया गया है. अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार जिन चूहों को कोलोन कैंसर अर्थात पेट का कैंसर था उनके यूरिन टेस्ट का रंग नीले रंग में बदल जाता है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह यूरिन टेस्ट भविष्य में कैंसर का पता लगाने में सहायक होगा. यह टेस्ट वर्तमान के कैंसर टेस्ट से बहुत सस्ता भी रहेगा. लंदन के इंपीरियल कॉलेज और मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साथ मिलकर इस शोध को किया है. इस शोध को नेचर नैनौटेक्नोलॉजी में प्रकाशित किया गया है.

इस शोध में कुल 28 चूहों को शामिल किया गया था. शोध में शामिल किये गये चूहों में 14 चूहे कोलोन कैंसर से प्रभावित पाये गये.

यूरिन टेस्ट से कैंसर का पता लगाने पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक 

इस अध्ययन में शामिल प्रोफेसर माली स्टीवंस के अनुसार "यह टेस्ट महंगे लैब उपकरणों के बिना भी किया जा सकता है. एक रासायनिक क्रिया की मदद से खून के रंग में आने वाले बदलाव से ही पेट के कैंसर की पहचान की जा सकती है."

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