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स्तनपान कराने वाली महिलाओं में हृदय रोग और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है कम

जर्नल ऑफ अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा 23 प्रतिशत तक कम हो जाता है ।

ब्रेस्ट फीडिंग यानी स्तनपान को लेकर हुई एक रिसर्च में यह पता चला है कि ऐसी महिलाएं जो अपने बच्चों को स्तनपान करवाती हैं उन्हें स्ट्रोक का खतरा बहुत कम होता है। स्तनपान कराने से महिलाओं में हृदय रोग की संभावना भी कम होती।

इस नये अध्ययन में ये बात सामने आई है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं में रजोनिवृत्ति (post-menopausal) के दौरान स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। जर्नल ऑफ अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा 23 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

इस रिपोर्ट के मुख्य लेखक लिसेट टी. जैकॉबसन का कहना है कि ''कुछ ऐसे ही अध्ययनों में यह भी पता चला है कि स्तनपान से ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर और टाइप -2 डायबिटीज होने की संभावना कम होती है।''

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जैकॉबसन का कहना है कि ''यह शोध स्तनपान के लाभ और उससे कम होने वाले हृदय रोग के खतरे को ध्यान में रखकर की गई है । इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 80,191 प्रतिभागियों के डाटा को एनालाइज़ किया जिनको वर्ष 1993 से 1998 के दौरान रिक्रूट किया गया था।

विश्लेषण के दौरान पता चला है कि इन महिलाओं में से 51 प्रतिशत ने 1-6 महीने के बीच स्तनपान कराया, 22 प्रतिशत ने 7-12 महीने तक तथा 27 प्रतिशत नें 13 या इससे ज्यादा महीने तक स्तनपान कराया ।

जैकॉबसन का कहना है कि ब्रेस्ट फीडिंग उन तमाम प्रक्रियाओं में से एक है जिनकी वजह से हम स्ट्रोक से बचे रहते हैं। इसके अलावा पर्याप्त और उचित एक्सरसाइज, संतुलित आहार का सेवन, सिगरेट या मादक पदार्थों से परहेज और समय-समय पर जरूरी बॉडी चेकअप भी हमें ऐसे रोगों से दूर रखते हैं ।

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अनुवादक - Abhay Ojha

चित्र स्रोत- Shutterstock

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