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Written By: Anshumala | Updated : January 12, 2020 5:20 PM IST
Women who breastfeed for longer periods of time are less likely to suffer from hypertension. © Shutterstock.
अपने बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली सभी मांओं को हमेशा (Breastfeeding tips) एक ही चिंता सताती रहती है कि वे अपने डायट में क्या शामिल करें (Diet for Breastfeeding mom) ताकि उनके शिशु के लिए भी फायदेमंद हो। उनके बच्चे को कुछ भी शारीरिक समस्या ना हो। आप जो भी खाती-पीती हैं, उसमें मौजूद सभी पौष्टिक तत्व शिशु को दूध के जरिए प्राप्त होते हैं।
ऐसे में जन्म से लेकर छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराना (what to eat during breastfeeding) उसके संपूर्ण स्वास्थ, शारीरिक व मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसे में आप शुरू के कुछ महीनें मसालेदार व तैलीय भोजन से परहेज कर बैलेंस डायट ही लें। कुछ खास चीजों को खाने से (Diet During Breastfeeding) बचना चाहिए। कई बार कुछ चीजों से बच्चे को एलर्जी भी हो जाती है। भोजन करने के बाद इस बात पर भी गौर करें कि किस चीज से बच्चे को परेशानी, एलर्जी, दस्त, उल्टी हो रही है।
· स्तनपान (ब्रेस्टफीड) करा रही हैं तो लहसुन, लाल मिर्च, काली मिर्च, दालचीनी, खीरा के सेवन से बचें। इससे बच्चे को गैस व आंतों में दर्द की शिकायत हो सकती है।
· विशिष्ट सुगंध वाले भोजन या लहसुन ब्रेस्ट मिल्क के स्वाद को बदलता है। यदि आपका बच्चा दूध पीने में आनाकानी करे तो स्ट्रॉग फ्लेवर्ड युक्त भोजन करने से परहेज करें।
· यदि आप मांसाहारी हैं और मीट खाने का मन है तो उसमें से वसा युक्त भाग को निकाल दें।
· अनानास और विटामिन सी युक्त फल जैसे संतरा, टमाटर, अंगूर व नींबू के सेवन से यदि शिशु को नैपी रैशेज हो तो उसे न ही खाएं। हालांकि, सभी शिशु में यह समस्या नहीं देखी जाती।
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· स्तनपान कराते समय (Diet During Breastfeeding) अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने की बजाय एक दिन में एक या दो कप ही कॉफी लें। यहां तक की सोडा, चाय व ओवर-द-काउंटर मेडिसिन में भी कैफीन होती है इसलिए उतना ही लें जितनी की आवश्यकता है।
· यदि आप अल्कोहल लेती हैं तो बेहतर होगा कि अपनी इस आदत को कुछ दिनों के लिए भूल जाएं, क्योंकि अल्कोहल मिल्क प्रोडक्शन में कमी लाता है।
· धूम्रपान से ब्रेस्ट मिल्क में निकोटिन की मात्रा भी जाती है और एक दिन में 20 से अधिक बार सिग्रेट पीना दूध निर्माण में कमी लाता है। इसके सेवन से शिशु में उल्टी, दस्त, ह्रदय गति का तेज होना, बेचैनी, नींद में कमी, आंतों व श्वास नली में संक्रमण की शिकायत उत्पन्न हो सकती है।
· फाइबर युक्त सब्जियों का सेवन लाभदायक है पर प्याज, लहसुन, ब्रोकोली, फूलगोभी, पत्तागोभी, ककड़ी व खीरा से गैस बनता है, इनसे परहेज करें। कई बच्चों को पेट दर्द की शिकायत भी हो जाती है।
· अधिक तैलीय व मसालेदार भोजन खाने से किसी बच्चे को पेट दर्द की समस्या देखी जाती है तो किसी को कुछ नहीं होता। यदि ऐसा होता है तो खाने में कम तेल-मसाले का प्रयोग करें।
· किसी-किसी शिशु को अंडा से एलर्जी होती है इसलिए यदि वह दूध पीने के बाद उल्टी करता है तो ध्यान दें।
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· रेडी-टू-ईट फूड में प्रेजर्वेटिव होते हैं। पोटैटो चिप्स, चाइनीज फूड, जंक फूड से भी परहेज करें क्योंकि इनमें कैलोरी के अलावा कोई भी पौष्टिक तत्व नहीं होता।
· अधिक मात्रा वाले प्रॉसेस्ड फूड को अपने डायट से धीरे-धीरे निकालें खासकर केक, कुकीज या अन्य बेक्ड सामग्री। चाहें तो मल्टीविटामिन और अधिक मात्रा वाले फाइबर युक्त अनाज, मीट, फल और सब्जियां शामिल करें ताकि आपके साथ आपके बच्चे का भी स्वास्थ अच्छा रहे।
· दिनभर में खूब पानी पीएं इससे दूध का निर्माण सही ढंग से होता है।