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Written By: akhilesh dwivedi | Published : October 12, 2018 12:52 AM IST
प्रेगनेंसी में ब्रेस्टकैंसर। © Shutterstock
प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट कैंसर होने वाली माँ के लिए बहुत ही दुखद अनुभव होता है। ब्रेस्ट कैंसर इस समय होने वाली आम समस्या बन गयी है जो करीब 3000 में से एक गर्भवती महिला को होती है। साथ ही गर्भावस्था में इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि माँ बनने वाली स्त्री के स्तनों में कई तरह के बदलाव आते हैं। यही कारण है कि ज़्यादातर स्तन कैंसर का पता एडवांस स्टेज में लगता है।
आज कल डॉक्टर्स प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट की जाँच करवाने पर ज़ोर देते हैं जिसे वे नॉर्मल चेकअप का हिस्सा मानते हैं। हालांकि आज के इस आधुनिक दौर में मेडिसिन और टेक्नोलॉजी ने इतनी तरक्की कर ली है कि कैंसर का इलाज संभव है लेकिन प्रेगनेंसी में इसका होना खतरे को बढ़ा देता है। साथ ही माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखना डॉक्टर्स के लिए किसी चैलेंज से कम नहीं होता है।
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क्या कैंसर का असर होने वाले शिशु पर पड़ता है? जब कैंसर का खुलासा हो जाता है तो सभी के दिमाग में बच्चे की सुरक्षा सबसे पहले आती है। लेकिन हम आपको यह बता दें कि इसका बच्चे पर तुरंत कोई असर नहीं होता। यदि कैंसर के सेल्स प्लेसेंटा के ज़रिये पास होते हैं तो शिशु के विकसित होते हुए इम्यून सिस्टम द्वारा ये क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। हालांकि बहुत ही कम मामलों में ऐसा हुआ है कि माँ से बच्चे में कैंसर के सेल्स चले गए हों लेकिन कई तरह के अध्ययन इस बात को नहीं मानते। वहीं दूसरी ओर माँ द्वारा उपचार का तरीका बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन बच्चे पर बुरा असर डालती है इसलिए डॉक्टर्स उपचार को डिलीवरी तक रोक देते हैं।
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क्या प्रेगनेंसी में कीमोथेरेपी सुरक्षित है? कुछ कीमोथेरेपी की दवाइयां प्रेगनेंसी में सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि कीमोथेरेपी से प्रेगनेंसी के पहले तीमाही में बचना चाहिए क्योंकि इससे होने वाले शिशु के विकास पर प्रभाव पड़ता है साथ ही गर्भपात का भी खतरा बढ़ जाता है। कीमोथेरेपी प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे तिमाही में एकदम सुरक्षित माना जाता है। इसमें केवल बच्चे के वज़न और समय से पहले जन्म का खतरा होता है। किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए डिलीवरी से तीन या चार हफ्ते पहले डॉक्टर्स कीमोथेरपी सेशन को रोक देते हैं।
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क्या आप स्तनपान करा सकती हैं? इस स्थिति में ब्रेस्ट फीडिंग थोड़ा मुश्किल होता है, यदि कैंसर को खत्म करने के लिए सर्जरी की ज़रुरत पड़ती है जिसमें कीमोथेरेपी और रेडियोथेरपी न हो। ऐसे में आप अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का असर आपके स्तनों के दूध पर भी पड़ता है जो बच्चे के लिए हानिकारक होता है। अगर सही तरीके से ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराया जाए तो इसका बुरा असर आपके शरीर और होने वाले शिशु पर नहीं पड़ता। ऐसे कई मामले हैं जिनमें ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर महिलाओं ने बच्चों को बिल्कुल सुरक्षित तरीके से जन्म दिया है। ऐसे में परिवार का सहयोग और अच्छे डॉक्टर्स से इलाज सब कुछ आसान बना देता है।