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''ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ'' पर जानें ब्रेस्ट कैंसर फैक्ट्स, लक्षण, सेल्फ-एग्जामिनेशन के तरीके

अक्टूबर महीने को ''ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ'' (Breast Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद है महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक करना, इसके लक्षणों और उपचारों को उजागर करके स्तन कैंसर के प्रति लोगों के मन में व्याप्त गलत धारणाओं को दूर करना।

''ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ'' पर जानें ब्रेस्ट कैंसर फैक्ट्स, लक्षण, सेल्फ-एग्जामिनेशन के तरीके
ब्रेस्ट कैंसर से बचना है, तो खुद से घर पर करें ब्रेस्ट की जांच। © Shutterstock.

Written by Anshumala |Updated : September 30, 2019 2:12 PM IST

1 से 31 अक्टूबर यानी पूरे अक्टूबर महीने को ''ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ'' (Breast Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद होता है महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक करना। वर्ष 2006 से ही अक्टूबर महीने को ''ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ'' (October is Breast Cancer Awareness Month) घोषित किया गया है। ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ का उद्देश्य है लोगों के बीच स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाना, लक्षणों और उपचारों को उजागर करके स्तन कैंसर के प्रति लोगों के मन में व्याप्त गलत धारणाओं को दूर करना।

भारत में ही प्रत्येक वर्ष ब्रेस्ट कैंसर से लाखों महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। विश्वभर में महिलाओं में होने वाला कॉमन कैंसर है ब्रेस्ट कैंसर। ऐसे में महिलाओं को खुद अपनी सेहत के प्रति जागरूक होना होगा और ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के उपलक्ष में जो भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, उसमें आपको भाग लेना होगा। ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों (Breast Cancer symptoms) को शुरुआत में पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो काफी हद तक इससे बचा जा सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित फैक्ट्स

महिलाओं में सबसे ज्यादा होता है ब्रेस्ट कैंसर।

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स्मोकिंग, एल्कोहल का सेवन और मोटापा ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाने के लिए अधिक जिम्मेदार होते हैं।

स्तन कैंसर पुरुषों को भी हो सकता है।

इस कैंसर से महिलाओं की फर्टिलिटी क्षमता प्रभावित नहीं होती है। हालांकि, कुछ प्रकार के मेडिकेशन जैसे कीमोथेरेपी एग क्वालिटी को प्रभावित करती है और कई बार मेनोपॉज भी हो सकता है।

स्तन कैंसर एक नॉन-कम्युनिकेबल यानी फैलने वाली बीमारी नहीं है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचना चाहती हैं, तो करें ये 3 काम

ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए स्वयं करें जांच

1 आप खुद से भी अपने ब्रेस्ट की जांच (Breast self-examination) करके यह जान सकती हैं कि आपके ब्रेस्ट में कोई गांठ तो नहीं। पीरियड्स होने के 5-7 दिन बाद जरूर अपने स्तनों की जांच करें। वैसे पीरियड्स के शुरू होने से पहले, पीरियड्स के दौरान और बाद में भी कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान भी ब्रेस्ट में आपको असामान्य सा महसूस हो सकता है, लेकिन घबराने की बात नहीं है। जरूरी नहीं कि स्तन में कोई भी गांठ (Lump) ब्रेस्ट कैंसर ही हो।

2 ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए नियमित रूप से अपने स्तनों की जांच खुद करें या फिर डॉक्टर से एक साल में जरूर मिलें।

3 ब्रेस्ट में दर्द, सूजन, कोई गांठ, टाइटनेस, आर्मपिट में दर्द, निप्पल से तरल पदार्थ का निकलना, स्तनों के आकार में बदलाव दिखे, तो अलर्ट हो जाएं। डॉक्टर से जरूर मिलें।

4 पीरियड्स के खत्म होने के 6-7 दिन बाद ब्रेस्ट की जांच अपने हाथों से अच्छी तरह से करें। स्पेशलिस्ट से ब्रेस्ट परीक्षण के बारे में जानकारी लें।

5 30 वर्ष के बाद पत्येक साल डॉक्टर से स्तनों की जांच करवाएं ताकि ब्रेस्ट कैंसर होने या ना होने के बारे में समय रहते ही पता चल सके। 40 की उम्र हो गई है, तो मैमोग्राम भी अवश्य कराएं।

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महिलाओं में लगातार बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, बचने के लिए स्वयं करें अपनी जांच

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