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Written By: Anshumala | Published : December 21, 2019 3:54 PM IST
रीढ़ की हड्डियों में हुई समस्या का बेहतरीन इलाज ''बलून काइफोप्लास्टी", जानें क्या है यह तकनीक। © Shutterstock.
मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया (minimally invasive procedure) कमजोर हड्डियों, अचानक फ्रैक्चर या हड्डी की समस्याओं वाले मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। हालिया प्रगति में बलून काइफोप्लास्टी (Ballon cifoplastica) शामिल है, जो रीढ़ की समस्याओं का इलाज (Treatment of spinal problems) करने में कारगर साबित हुई है।
खराब बोन मिनरल डेन्सिटी (बीएमडी) हड्डियों के विकार का एक प्रमुख कारण है, जो ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) नाम की समस्या के कारण हड्डियों के टिशू को कमजोर कर देता है। इस स्थिति में रीढ़ (Treatment of spinal problems), कूल्हे और कलाइयों में फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, लगभग 200 मिलियन भारतीयों की हड्डियों में कमजोरी के कारण उनमें ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम (Risk of osteoporosis) की संभावनाएं बढ़ गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, कूल्हों के फ्रैक्चर के कारण हर साल प्रति 4 में से एक मरीज की मृत्यु हो जाती है।
नई दिल्ली (साकेत) स्थित मैक्स हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के हेड व निदेशक बिपिन वालिया ने बताया, “बलून काइफोप्लास्टी को पूरी सुरक्षा के साथ पूरा किया जाता है, जो मरीज को असहनीय दर्द से राहत देने में मदद करती है और अंगों के मूवमेंट में भी लचीलापन लाती है। इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 90% मरीजों को 24 घंटों के अंतराल में दर्द से राहत मिल गई। इस प्रक्रिया में, एक छोटे गुब्बारे को उपकरण की मदद से वर्टिब्रा में ले जाया जाता है। इसमें लगाए गए चीरे की लंबाई 1 सेंटिमीटर होती है। इस गुब्बारे को बहुत ही ध्यान से फुलाया जाता है, जिससे वर्टिब्रा की पोजीशन सही हो जाए। जब वर्टिब्रा सही पोजीशन ले लेता है, तो गुब्बारे को आराम से पिचकाकर बाहर निकाल दिया जाता है।”
अध्ययन के अनुसार, जिन मरीजों ने इस प्रक्रिया के जरिए इलाज करवाया, उनका जीवन बेहतर हो गया और उनके शरीर में एक लचीलापन भी देखने को मिला। यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जो फ्रैक्चर को ठीक करके, दर्द से राहत देती है और हड्डी के आकार को भी सही करती है।
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डॉ. बिपिन ने बताया कि बलून काइफोप्लास्टी को लोकल या जेनरल एनेस्थीसिया दोनों की मदद से किया जा सकता है। सर्जन मरीज की हालत देखकर उचित विकल्प का चुनाव करता है। इस प्रक्रिया में लगभग 1 घंटा लगता है और यदि एक साथ कई फ्रैक्चरों पर काम करना है, तो एक रात का समय लग सकता है। यह भी साबित हो चुका है कि अन्य सर्जिकल प्रक्रियाओं की तुलना में बलून काइफोप्लास्टी में कम जटिलताएं होती हैं।
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