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Written By: Anshumala | Updated : January 11, 2020 6:01 PM IST
Joint Replacement : घुटनों और कूल्हों की समस्याओं को दूर करेगी यह नई तकनीक। © Shutterstock.
मेडिकल चिकित्सा विज्ञान में प्रतिदिन आ रही आधुनिकता और खोजों से इलाज के नए-नए विकल्प खुल रहे हैं। इसी प्रकार की एक नई तकनीक है ''3 डी एवं कंप्यूटर नैविगेटेड जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक'', जो घुटनों और कूल्हों की समस्याओं (Knee problem) को दूर करने का एक बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। सर्वोदय हॉस्पिटल (फरीदाबाद) के सेंटर फॉर जॉइंट रिप्लसेमेंट (Joint replacement) के डायरेक्टर डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी का कहना है कि कुल्हों और घुटनों की समस्याओं के लिए इलाज के विकल्पों में प्रगति के साथ ''मिनिमली इनवेसिव सर्जरी'' मरीजों के लिए एक वरदान साबित हुई है, क्योंकि इसमें मरीज की रिकवरी भी जल्दी होती है और अपनी स्वाभाविक दिनचर्या को बिना दर्द के अपना पाने के कारण उनका जीवन भी बेहतर हो जाता है।
3 डी एवं कंप्यूटर नैविगेटेड तकनीक (3 D & Computer navigated joint replacement techniques) से बाइलेटरल हिप रिप्लेसमेंट और टोटल नी रिप्लेसमेंट जोड़ों की समस्याओं से ग्रस्त रोगियों के लिए सबसे अच्छे विकल्प के तौर पर देखे जाते हैं।
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डॉ. भट्टाचार्जी ने बताया, "आज के दौर में दुनिया में जोड़ प्रत्यारोपण (Joint replacement) के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे आधुनिक तकनीक 3 डी एवं कंप्यूटर नैविगेटेड जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक है, जिसकी मदद से किसी के भी जोड़ को 100 % सटीकता से बदला जा सकता है। प्रत्यारोपित जोड़ की कार्यशैली अवधि उसके सही प्रकार और सही दिशा में प्रत्यारोपित किए जाने से निर्धारित होती है। हमारी सबसे पहली कोशिश होती है कि जोड़ों के मरीजों के इलाज के लिए ऑपरेशन न करना पड़े, इसलिए पहले उन्हें न्यूनतम दवाइयों, फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज से ठीक करने की कोशिश की जाती है। लेकिन जिन मरीजों की हालत गंभीर होती है या जिन पर दवाइयों का कोई असर नहीं होता है, उनके इलाज के लिए मिनिमली इनवेसिन जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के साथ हिप रिप्लेसमेंट (Hip replacement) और टोटल नी रिप्लेसमेंट (Total knee replacement) सबसे लाभकारी विकल्प होता है।”
सर्वोदय हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया, "इतने सालों में, ऐसे कई मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है, जहां जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ने मरीजों को एक नया जीवन दिया। आज के समय में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से मरीजों का इलाज करना बेहद सुरक्षित हो गया है, जिसमें उन्हें न्यूनतम दर्द, कम फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है और अस्पताल से जल्द ही डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है।"