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क्या है एवैस्कुलर नेर्कोसिस ? जानें, लक्षण, कारण और इलाज। © Shutterstock
हड्डियों के रोग से अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। आप घटुने, जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस आदि के बारे में जानते हैं क्या आपने एवैस्कुलर नेर्कोसिस (avascular-nercosis) के बारे में सुना है? यह भी हड्डियों में होने वाली ही एक समस्या है। इसमें बोन टिशू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। ऐसा तब होता है, जब इन ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है। इस बीमारी को ऑस्टियोनेक्रोसिस भी कहते हैं। एवैस्कुलर नेर्कोसिस (Avascular Nercosis) में हड्डियां घिसने लगती हैं। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन 30 से 60 वर्ष के बीच के आयु वर्ग के लोगों को यह अधिक होता है।
कुछ लोगों में शुरुआती दौर में इस बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है, तो वजन उठाने पर जोड़ों में दर्द होता है। कई बार लेटे रहने पर भी जोड़ों में दर्द होता है। डॉ. अग्रवाला का कहना है कि कूल्हे के एवैस्कुलर नेकरोसिस (Avascular Nercosis) होने पर पेड़ू, जांघ और नितंब में दर्द होता है। कूल्हे के अलावा इस बीमारी से कंधे, घुटने, हाथ और पैरों के भी प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। इनमें से किसी तरह के लक्षण दिखाई देने और जोड़ों में लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
1 जोड़ों या हड्डियों में चोट लगने से होती है यह समस्या।
2 रक्त नलिकाओं में वसा के जमाव से भी बढ़ जाती है एवैस्कुलर नेर्कोसिस होने की शिकायत।
3 कोई अन्य रोग जैसे सिकल सेल एनिमिया और गौचर्स डिजीज में भी हड्डियों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता। इनके अलावा कुछ ऐसे अनजाने कारण भी हैं, जिनके कारण लोग इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं।
जोड़ों में चोट लगना या उनका क्षतिग्रस्त हो जाना जैसे कूल्हों के जोड़ का अलग हो जाना या उनका टूट जाना। इस स्थिति में भी जोड़ों के नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और हड्डी तक रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है। स्टेरॉयड का इस्तेमाल, बहुत ज्यादा मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड जैसी दवाइयों का सेवन एवैस्कुलर नेर्कोसिस होने का सामान्य कारण है। लगातार कई वर्षों से एक दिन में कई बार शराब पीने से रक्त नलिका में वसा का जमाव हो जाता है और वे संकरी हो जाती हैं। हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने के लिए लंबे समय तक दवाइयों के सेवन से जबड़ों के नेकरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। पैंक्रिएटाइटिस, डायबिटीज, गौचर्स डिजीज, एचआईवी/एड्स, सिस्टेमेटिक लुपस एरीथेमाटोसस और सिकल सेल, एनिमिया जैसी बीमारियों के होने पर भी एवैस्कुलर नेकरोसिस होने की संभावना रहती है।
एवैस्कुलर नेर्कोसिस का उपचार नहीं कराने पर समय बीतने के साथ मरीज की स्थिति बदतर होती जाती है। एक समय ऐसा आता है, जब हड्डी कमजोर होकर घिसने लग जाती है। इतना ही नहीं, इस बीमारी के कारण हड्डियों का चिकनापन भी खत्म होने लगता है, जिससे भविष्य में मरीज गंभीर रूप से गठिया से पीड़ित हो सकता है। इस तरह की परेशानी होने पर रुमेटोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक सर्जन से दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने जाने से पहले, कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
मरीज के लिए कौन सा उपचार सही रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हड्डियों को कितना नुकसान पहुंचा है। इस बीमारी के इलाज के लिए पहले मेडिकेशन व थेरेपी का ही सहारा लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है। इस बीमारी के बहुत ज्यादा गंभीर हो जाने पर डॉक्टर जोड़ों की सर्जरी करते हैं। सर्जरी के तहत हड्डियों के क्षतिग्रस्त भाग को हटाकर उसकी जगह मरीज के शरीर के किसी दूसरे भाग हड्डी को लेकर क्षतिग्रस्त हड्डियों की जगह प्रत्यारोपित किया जाता है। हड्डियों के ज्यादा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का सहारा भी लिया जाता है।
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