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World Suicide Prevention Day: सुसाइड करने से इस तरह अपनों को रोक सकते हैं आप

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस यानि वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन दिवस (World Suicide Prevention Day) के अवसर पर विश्व में बढ़ते सुसाइड के मामलों की ओर ध्यान देने की ज़रूरत की। इस दिन का मकसद यही है कि लोगों को आत्महत्या करने से रोकने और उन्हें खुद को नुकसान पहुंचाने के विचारों से बचने में मदद की जा सके। आइए समझते हैं कि आत्महत्या के विचारों से घिरे व्यक्ति की मदद कैसे की जा सकती है।

World Suicide Prevention Day: सुसाइड करने से इस तरह अपनों को रोक सकते हैं आप

Written by Sadhna Tiwari |Updated : September 11, 2020 12:26 AM IST

आत्महत्या दुनियाभर में होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ाने वाली एक बड़ी वजह है। हर साल दुनियाभर में 8 लाख से अधिक लोग आत्महत्या कर लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन  (World Health Organisation) के अनुसार, हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति सुसाइड करता है। लोगों का आत्महत्या के कारण मर जाना दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि इस तरह की मृत्यु को रोका जा सकता है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस यानि वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन दिवस (World Suicide Prevention Day) के अवसर पर विश्व में बढ़ते सुसाइड के मामलों की ओर ध्यान देने की ज़रूरत की। इस दिन का मकसद यही है कि लोगों को आत्महत्या करने से रोकने और उन्हें खुद को नुकसान पहुंचाने के विचारों से बचने में मदद की जा सके। आइए समझते हैं कि आत्महत्या के विचारों से घिरे व्यक्ति की मदद कैसे की जा सकती है।

क्या करें जब रह-रहकर आ रहे हों आत्महत्या के विचार (Tips for Suicide Prevention):

कई बार लोगों में हताशा और उदासी की भावनाएं इतनी प्रबल हो जाती हैं कि, लोग खुदकुशी करने का मन बनाने लगते हैं। डिप्रेशन, कोई गहरा सदमा या मानसिक परेशानियां हर किसी को प्रभावित करती हैं। जब ये परेशानियां बहुत अधिक बढ़ जाती हैं तो, आत्महत्या जैसे ख्याल आते हैं। लेकिन, अगर  लोगों को पता हो कि ऐसी भावनाओं को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं तो आपके लिए भी इस स्थिति से बचने में मदद होगी। इसीलिए, अगर आपके आसपास किसी व्यक्ति में सुसाइड करने के विचार आते दिखें तो उनकी मदद इस तरह करें।

बढ़ाएं मदद का हाथ

सबसे पहले अपने आसपास के लोगों को अपनी विचारों के बारे में बताएं। हमारे आसपास के कई लोग इस तरह की स्थितियों में हमारी मदद कर सकते हैं। उनसे चर्चा करें, आवश्यकता के अनुसार उन्हें सलाह दें। उन्हें अपनी दवाइयों के बारे में याद दिलाते रहें और  प्रोफेशनल हेल्प लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

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ट्रिगर्स को पहचानें

डिप्रेशन होने पर कई कारणों से  आत्महत्या के ख्याल बार-बार आ सकते हैं। अकेलापन, शराब पीने की लत, ड्रग्स की लत जैसी स्थितियां आत्महत्या के विचारों को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में इन ट्रिगर्स को पहचानें। डिप्रेशन महसूस होने पर पीड़ित व्यक्ति के आसपास रहें, उन्हें परिवार और दोस्तों के साथ फोन पर बात करने के लिए कहें और डिप्रेशन महसूस कर रहे व्यक्ति को भावनात्मक स्तर पर बेहतर महसूस कराने की कोशिश करें। इसी तरह ड्रग और शराब के सेवन से बचाएं।  उस व्यक्ति को प्रोत्साहित करें कि वह खुद के लिए समय निकाले और खुद का ध्यान रखे।

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सेहत का रखें ख्याल

शारीरिक और मानसिक हेल्थ आपके विचारों को भी स्वस्थ रखती है। अगर आपकी सेहत ठीक होगी तो धीरे-धीरे सुसाइड करने के ख्याल कम होने लगते हैं। इसीलिए, हेल्दी और बैलेंस्ड डायट लेने, एक्सरसाइज़ करने और तनाव से बचने में पीड़ित व्यक्ति की सहायता करें। अगर आप दोनों एक ही घर में रहते हैं तो मरीज़ के सोने-जागने का समय निश्चित करें और उन्हें अच्छी  नींद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। खुश और हेल्दी रहने के लिए उस व्यक्ति को अपनी हॉबिज़ के लिए वक़्त निकालने के लिए कहें और हो सके तो आप भी उनके साथ उन एक्टिविटीज़ में हिस्सा लें।