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Written By: Anshumala | Updated : October 25, 2020 6:40 PM IST
टॉक्सिक पॉजिटिविटी क्या है? जानें इसके साइड एफेक्ट्स और दूर करने के उपाय।
Toxic Positivity in Hindi: अक्सर लोग कहते हैं कि हम सभी को सकारात्मक सोच (Positive thinking) अपनानी चाहिए, चाहे समय कैसा भी हो। जो लोग पॉजिटिव सोच अपने जीवन में रखते हैं, वे सफल होते हैं। लेकिन, कई बार हद से ज्यादा पॉजिटिव रहना भी नुकसानदायक होता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो कठिन से कठिन घड़ी में भी खुद को सकारात्मक रखने की कोशिश करते हैं। कोरोना काल में भी आपको ऐसे कुछ लोग मिल जाएंगे, जिनके चेहरे पर नकारात्मकता का भाव नजर नहीं आएगा। दरअसल, जो लोग हर समय पॉजिटिव नजर आते हैं, वे सच्चाई से भाग रहे होते हैं। हकीकत को मानने के लिए तैयार नहीं होते और अपनी एक अलग ही दुनिया में जीते हैं। बेशक ये बाहर से शांत और मजबूत नजर आएं, लेकिन अंदर से कमजोर और डरे होते हैं। ये बस पॉजिटिव होने का दिखावा करते हैं। ऐसे लोगों और इस तरह की सोच को 'टॉक्सिव पॉजिटिविटी' (Toxic Positivity in hindi) कहते हैं।
"विषाक्त सकारात्मकता' (toxic positivity) किसी व्यक्ति के खुद के द्वारा तय की गई धारणा या सोच है, जिसके अंतर्गत वह व्यक्ति हर खराब स्थितियों, भावनात्मक दर्द में भी पॉजिटिव रहने की कोशिश करता है। ऐसे लोग सिर्फ सकारात्मक मानसिकता वाले होते हैं, लेकिन इतना ज्यादा जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखने से आप भावहीन हो सकते हैं।
टॉक्सिक पॉजिटिविटी से घिरा व्यक्ति खुद को हर माहौल चाहे वह सुखद हो या दुखद, में खुश, शांत या फिर पॉजिटिव रखने की कोशिश करता है। ऐसी स्थिति में वह हकीकत को समझने या मानने के लिए तैयार नहीं होता। वास्तविकता को पीछे छोड़ देता है। किसी भी समस्या को आप तभी हल कर सकते हैं, जब आप उसका सामना करेंगे। सच्चाई से मुंह फेरने से चीजें बदल नहीं जाएंगी। भावनाओं को अंदर दबाने से आप अपनी मानसिक स्थिति, मनोस्थिति को नुकसान पहुंचाते हैं।
मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
डिप्रेशन, एंग्जायटी के शिकार हो सकते हैं।
सुसाइड करने का ख्याल मन में आ सकता है।
हकीकत की बजाय काल्पनिक दुनिया में जीते हैं।
1 अपनी भावनाओं को नजरअंदाज करने से बचें। आप जैसा भी महसूस करते हैं, उसे स्वीकार करना सीखें। अपनी सभी भावनाओं को चाहे वे अच्छी हों या बुरी, उन्हें महसूस करें। आप कैसा महसूस करते हैं, इसे अवॉएड करने से असुविधा को लंबे समय तक महसूस करेंगे।
2 वास्तविक बनें। झूठ और गलत में ना जिएं।
3 दुख की बजाय खुशियों का चुनाव करें।
4 सोशल मीडिया से सावधान रहना ठीक है। यहां ज्यादातर लोग अपने बारे में फिल्टर्ड की गई अच्छी बातें ही पोस्ट करते हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी गलतियों, अपने गलत निर्णयों के बारे में चर्चा करते हैं।