तनाव और डर की वजह से बच्चों का नहीं है पढ़ाई में फोकस तो उन्हें मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए अपनाएं ये तरीके

स्कूली बच्चों या स्टुडेंट्स के मन में दूसरों से पीछे रह जाने का डर, एकाग्रता और फोकस की कमी के साथ-साथ पढ़ाई में मन न लगने जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं।

WrittenBy

Written By: Sadhna Tiwari | Published : June 15, 2022 4:49 PM IST

मेंटली हेल्दी रहने की अहमियत पिछले कुछ वर्षों में सभी को समझ आयी है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान बड़ों से लेकर बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। विशेषकर बच्चों ने लॉकडाउन, ऑनलाइन स्टडीज और आइसोलेशन के बीच मानसिक स्तर पर बहुत अधिक दबाव महसूस किया। वहीं, अब जब स्थितियां बेहतर हो रही हैं और बच्चों की स्कूल में वापसी हुई है तब भी बच्चे मानसिक स्तर पर बहुत अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं। स्कूली बच्चों या स्टुडेंट्स के मन में दूसरों से पीछे रह जाने का डर, एकाग्रता और फोकस की कमी के साथ-साथ पढ़ाई में मन न लगने जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं। वहीं, कुछ बच्चों के लिए अपनी क्लास में एडजस्ट कर पाने में भी दिक्कतें आती हैं। ऐसे में बच्चों में तनाव और डर बढ़ता जाता है।  इन सभी स्थितियों के बीच बच्चों को मेंटली स्ट्रॉन्ग और हेल्दी बनाने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में पढ़ें यहां।

बच्चों में तनाव कम करने के उपाय

नींद पूरी करें

दिनभर की थकान और तनाव को कम करने के लिए हर रात पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए। लेकिन, अक्सर देखा जाता है कि बच्चे रात में बहुत देर तक जागते हैं, मोबाइल फोन या टीवी देखते हैं और देर से सोते हैं। नतीजतम, अगले दिन सुबह उन्हें जब जल्दी उठना पड़ता है तो सिर भारी-सा लगता है। इसी तरह सिर दर्द, सुस्ती और बेचैनी महसूस होती है। शरीर को पूरा आराम दिलाने के लिए हर दिन कम से कम 7-8 घंटें की नींद लेनी चाहिए। इससे अलगे दिन वे फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस कर सकेंगे और फोकस भी बढ़ेगा।

पढ़ाई के बीच लें ब्रेक

बच्चे सुबह या शाम को पढ़ाई करते समय लगातार कई घंटों तक बैठे रहते हैं। इससे उन्हें सुस्ती महसूस होती है या नींद आने लगती है। ऐसे में बच्चों के लिए पढ़ाई कर पाना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को छोटी-मोटी चीजें याद रखने में भी दिक्कत होती है। इसीलिए, पढ़ाई के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर पर ब्रेक लेना चाहिए। 30-40 मिनट पढ़ाई करने के बाद 5-10 मिनट ब्रेक लें और उसके बाद दोबारा पढ़ने बैठें। इससे, पढ़ाई का डर या चैप्टर समझ ना आने की चिंता कम होगी और स्टुडेंट बेहतर महसूस करेंगे।

भूखे ना रहें

अक्सर देखा जाता है कि बच्चे कॉलेज या स्कूल पहुंचने के चक्कर में जल्दी-जल्दी नाश्ता करते हैं या कई बार वो कुछ भी नहीं खाते। इससे बच्चों को पोषण नहीं मिल पाता और वे पूरा दिन परेशान रहते हैं। दिमागी मेहनत करने और फिजिकली फिट रहने के लिए बच्चों को पोषक तत्वों से भरपूर और हेल्दी डाइट की जरूरत पड़ती है। इसीलिए, बच्चों को नाश्ता खिलाए बगैर घर से बाहर ना जानें दें। पेट भरा होने से बच्चों को चिड़चिड़ापन कम महसूस होता है और एनर्जेटिक भी रहते हैं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source