
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : June 22, 2022 6:15 PM IST
छोटे बच्चों को सही व्यवहार, बोलने-सीखने और संस्कारों से जुड़ी बारीकियां सिखाने की जिम्मेदारी उनके परिवार और माता-पिता की होती है और वर्तमान में जहां लोग नौकरी और काम के लिए एक शहर-से दूसरे शहर या दूसरे देशों में जा कर बस रहे हैं ऐसे में यह जिम्मेदारी केवल माता-पिता तक ही सीमित रह गयी है। वहीं, मां-बाप अपनी नौकरी और अन्य जिम्मेदारियों के बीच बच्चों के लिए बहुत अधिक समय नहीं निकाल पाते जिससे बच्चे अक्सर अकेलापन और सपोर्ट की कमी महसूस करते हैं और उनकी मेंटल हेल्थ भी इससे प्रभावित होती है। खासकर ऐसे बच्चे जिनके साथ घर में कोई और बच्चा ना हो या काफी छोटे हैं और जो स्कूल या ट्यूशन नहीं जाते उनके लिए स्थिति काफी संवेदनशील बन सकती है। ऐसे में बच्चों की मदद कैसे की जा सकती है और उन्हें मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं उसी से जुड़ा है यह लेख। यहां पढ़ें कुछ ऐसी टिप्स जो बच्चों को मानसिक स्तर पर अधिक मजबूत और बेहतर बनाने का काम कर सकती हैं।
बच्चे कि माहौल में रहते है यह बात उनकी मेंटल और कई बार फिजिकल हेल्थ को भी प्रभावित करती है। जब बच्चों के आसपास का माहौल नेगेटिव होगा तो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ेगा। इसीलिए, जब बच्चे आसपास हों तो उनके सामने घर का माहौल शांत रखें, उनके सामने बहस और झगड़े जैसी स्थितियों से बचें और जितना हो सके बच्चे को खुश रहने में मदद करें।
हो सकता है कि आपके बच्चे अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त न कर पा रहे हों ऐसे में अपने बच्चे को सिखाएं कि वे किस तरह अपनी बात दूसरों के सामने रख सकते हैं। जैसे, बच्चे जब गुस्से में हों तो अपनी बात कहने की बजाय हाथ-पैर पटकने और चीजें यहां-वहां फेंकने जैसे काम करते हैं। उन्हें तोड़-फोड़ करने से रोकने के प्रयास करें और उन्हें थोड़ी देर अकेला छोड़ दें। जब बच्चे शांत हो जाएं तब उनसे बात करें। बच्चों को शांत कराने के लिए प्राणायाम, टेबल टेनिस खेलने या स्वीमिंग करने जैसी एक्टिविटीज की मदद ली जा सकती है।
बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना सिखाएं, उन्हें अपनी पेंसिल्स, बुक्स और खिलौने अरेंज करना सिखाएं। इसके अलावा बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस अकेले अटेंड करना सिखाया जा सकता है, घर के छोटे-मोटे बिल और खर्चों की लिस्ट को पढ़ना और पैसे गिनने जैसे काम भी सिखाए जा सकते हैं। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे इसकी मदद से अपने मन का डर भी कम कर पाएंगे।