सोमवार को ऑफिस में फ्रेश और लाइट फील करने के लिए ऐसा रखें आपका माइंडसेट
अगर हम रविवार को ही तनाव से डरने के बजाय अपना माइंडसेट थोड़ा बदल लें और संडे की रात का रूटीन व्यवस्थित कर लें, तो सोमवार का दिन एक बोझ या मजबूरी लगने के बजाय बेहद फ्रेश, लाइट और एक नई शुरुआत जैसा बन सकता है।
रविवार की शाम ढलते ही और रात के करीब आते ही, कई लोगों के दिल की धड़कनें अचानक बढ़ने लगती हैं। वीकेंड का वो सुकून मानो पल भर में गायब हो जाता है और दिमाग में एक अजीब सी बेचैनी शुरू हो जाती है- 'कल फिर सुबह अलार्म बजने के साथ वही भागदौड़ शुरू होगी, इनबॉक्स में ईमेल्स का ढेर लगा होगा, मीटिंग्स में नए टारगेट्स थमा दिए जाएंगे और पुरानी डेडलाइंस का हिसाब मांगा जाएगा!' इस मानसिक तनाव और घबराहट की स्थिति को कॉर्पोरेट की भाषा में मंडे ब्लूज कहा जाता है। वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए वीकेंड की आज़ादी और मस्ती के बाद अचानक सोमवार के कड़े रूटीन, घर और दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारियों में खुद को ढालना वाकई मानसिक और शारीरिक रूप से काफी स्ट्रेसफुल हो जाता है। लेकिन, अगर हम रविवार को ही इस तनाव से डरने के बजाय अपना माइंडसेट थोड़ा बदल लें और संडे की रात का रूटीन व्यवस्थित कर लें, तो सोमवार का दिन एक बोझ या मजबूरी लगने के बजाय बेहद फ्रेश, लाइट और एक नई शुरुआत जैसा बन सकता है।
बेस्ट और लाइट मंडे के लिए क्या करें?
सोमवार के तनाव की सबसे बड़ी वजह होती है सुबह की हड़बड़ी। बच्चों का स्कूल, घर के काम और खुद का ऑफिस, सब कुछ एक साथ मैनेज करना भारी पड़ जाता है। सारी चीजें आराम से हों, इसके लिए आपको निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए:
माइंडसेट शिफ्ट
संडे को पूरी तरह नो-वर्क डे बनाने के बजाय, रात को सिर्फ 15 मिनट अगले दिन की प्लानिंग को दें। सोमवार को पहने जाने वाले कपड़े, ऑफिस का बैग और लंच की तैयारी संडे रात को ही पूरी कर लें। जब सुबह उठकर आपको सब कुछ व्यवस्थित मिलेगा, तो आधा तनाव अपने आप खत्म हो जाएगा।
सोमवार को नई शुरुआत मानें
हम अक्सर सोमवार को एक पाबंदी या मजबूरी की तरह देखते हैं। यह सोच ही हमारे दिमाग को थका देती है। इसलिए सोमवार को हफ्ते का अंत नहीं, बल्कि एक नया कैनवास मानें। सोचें कि यह हफ्ता आपको अपने गोल्स को हासिल करने, कुछ नया सीखने या अपने काम में बेहतर करने का एक और मौका दे रहा है। अपने काम को सिर्फ जरूरत या ड्यूटी नहीं, बल्कि अपनी ग्रोथ का जरिया समझें।
'टू-डू लिस्ट' को रियलिस्टिक रखें
अक्सर लोग सोमवार आते ही पूरे हफ्ते का काम एक ही दिन में निपटाने की कोशिश करने लगते हैं। इनबॉक्स में पड़े ढेरों ईमेल्स देखकर पैनिक हो जाते हैं। मंडे को आपको ऑफिस आते ही सारे काम पर एक साथ नहीं टूटना है। काम शुरू करने से पहले केवल 3 सबसे जरूरी काम चुनें। बाकी कामों को बाद के लिए शेड्यूल करें। जब आप काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लेते हैं, तो दिमाग हल्का महसूस करता है।
सुबह का पहला घंटा खुद को दें
अगर आप सोमवार की सुबह उठते ही सबसे पहले फोन पर ऑफिस के मेल्स या कलीग्स के मैसेजेस चेक करते हैं, तो आप दिन की शुरुआत ही स्ट्रेस के साथ कर रहे हैं। आपको सुबह उठने के बाद कम से कम पहला एक घंटा ऑफिस की दुनिया से दूर रहकर खुद को समय देना है। इस समय में हल्की स्ट्रेचिंग करें, चाय या कॉफी का कप शांति से पिएं या अपने परिवार के साथ कुछ खुशनुमा पल बिताएं। यह छोटी सी आदत आपके मूड को बूस्ट कर देगी।
ऑफिस में 'माइक्रो-ब्रेक्स' लें
लगातार 4-5 घंटे स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने से मानसिक थकान दोगुनी हो जाती है। हर एक-डेढ़ घंटे में अपनी सीट से उठें, थोड़ा पानी पिएं या गहरी सांसें लें। अपने कलीग्स के साथ काम से हटकर 2 मिनट कोई हल्की-फुल्की बात करें। यह 'माइक्रो-ब्रेक्स' आपके दिमाग को रीबूट करते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। अगर आपको कोई खास लक्षण महसूस हो तो परेशान न हो, समय पर डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं।