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Social Anxiety Overcoming tips: कुछ लोग फिजिकली हेल्दी होते हैं, उनकी पर्सनालिटी भी दमदार होती है लेकिन इन लोगों को अन्य लोगों के बीच रहना पसंद नहीं होता। ये लोग अन्य लोगों के बीच अपन कॉन्फिडेंस खो देते हैं और घबरा जाते हैं। ऐसे में उनकी एंग्जायटी कभी-कभी ऐसी बढ़ जाती है कि वे सोशल इवेंट्स, मीटिंग्स और पार्टियों से दूर रहते हैं। यह एक मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या है जिसे सोशल एंग्जायटी (Social Anxiety) कहा जाता है।
आमतौर पर भीड़-भाड़ से बचने वाले लोगों को शर्मीला या शाई कहा जाता है। लेकिन, सोशल एंग्जायटी वाले लोग घर के बाहर जाकर छोटे-मोटे काम करने से बचते हैं। ऐसे लोग दुकान पर जाकर खरीददारी करने और लोगों के साथ फिल्म देखने जाने जैसे काम भी नहीं करते। आइए जानें क्या हैं सोशल एंग्जायटी के कारण और कैसे इस आदत को मैनेज कर सकते हैं।
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (Social Anxiety) केवल एक आदत नहीं बल्कि, एक मेडीकल कंडीशन भी है। इसमें लोगों को हमेशा डर लगता है कि अन्य लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। इसी डर की वजह से वे अन्य लोगों से दूर-दूर रहते हैं। सोशल एंग्जायटी के कुछ बड़े कारण ये हैं-
मन से डर को दूर करने के लिए कॉग्नीटिव-बिहेवरियल थेरेपी की मदद ली जा सकती है। सीबीटी थेरेपी में लोगों के मन से नेगेटिव विचारों और मन में घर कर चुकी बातों को दूर करने की कोशिश की जाती है। इससे बेचैनी, डर और घबराहट कम होती है।
प्राणायाम, डीप-ब्रीदिंग, ध्यान और प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन जैसी कुछ थेरेपीज और एक्सरसाइजेस की मदद ली जा सकती है। इससे एंग्जायटी के लक्षणोंसे आराम मिलता है।
जिन लोगों को सोशल एंग्जायटी होती है उन्हें दोस्तों, परिवार के सदस्यों और जान-पहचान के लोगों के बीच रहना चाहिए। अपनों से मिला सपोर्ट और उनके साथ बिताया वक्त मन डर को दूर करता है।
बैलेंस्ड डाइट लें। रोजाना एक्सरसाइज करें और फिजिकली एक्टिव रहें। चाय-कॉफी और अल्कोहल का सेवनबंद कर देँ।
खुद को नेगेटिव विचारों से दूर रखें। अपने मन को डाइवर्ट करें और अपनी हॉबीज की तरफ ध्यान दें।
इन सबके साथ अपने डॉक्टर से मिलें और डॉक्टरी मदद लें। इससे आप अपने लिए थेरेपीज, एक्सरसाइजेस और अन्य दवाओं का चयन भी सही तरीके से कर पाएंगे।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।