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वर्तमान काल को सोशल मीडिया और स्मार्टफोन (Social Media Smartphone) का जमाना कहा जा सकता है. सुबह होने के बाद और सोने से पहले तक हर इंसान के हाथ में स्मार्टफोन रहता है. स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का असर इंसान के जीवन में कई तरह से पड़ता है. हाल ही में कनाडा मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार सोशल मिडिया और स्मार्टफोन किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर व्यापक असर डाल रहा है. Social media and smartphones are impacting the mental health of Teens.
सोशल मीडिया और स्मार्टफोन पर हुए इस शोध में पाया गया कि यह बच्चों में मानसिक संकट का काम कर रहा है. स्मार्टफोन और सोशल मीडिया बच्चों में मेंटल डिसार्डर, खुद को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार और आत्महत्या जैसे विचारों को बढ़ाने का काम कर रहा है.
इसके पूर्व में हुए एक शोध के अनुसार सोशल मीडिया और स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा असर किशोर लड़कियों में होता है. एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार किशोर लड़कियों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की वजह से आत्महत्या की संभावना ज्यादा प्रबल होती है.
इसी तरह जर्मनी में हुए एक शोध के अनुसार जो जबच्चे फेसबुक पर ज्यादा समय गुजारते हैं उनमें ईर्ष्या और असुक्षा की भावना बढ़ने लगती है. सोशल मीडिया पर हमेशा एक्टिव रहने वाले बच्चों में नकारात्मक भावनाएं भी बढ़ती हैं.
सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के उपयोग पर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि परिवार के सदस्यों को अपने बच्चों से इस बारे में बात करनी चाहिए. बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन पर विशेष नजर रखने की जरूरत है.
आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है. बच्चों को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग करने पर और अधिक प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी परिवार के लोगों को निभानी चाहिए.