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Written By: Anshumala | Updated : July 1, 2020 10:35 AM IST
नेशनल डॉक्टर्स डे 2020 : कोविड-19 रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स की राह में आने वाली चुनौतियां। ©Shutterstock
National Doctor’s Day 2020: आज कोविड-19 महामारी का कहर पूरी दुनिया में लगातार बढ़ता जा रहा है। आम जनता खुद को कोरोना से बचाए रखने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रही है। अधिकतर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। लेकिन, सिर्फ हेल्थ केयर वर्कर्स ही हैं, जिन्हें कोरोना के मरीजों के बीच रहकर रात-दिन उनकी देखभाल, उनका इलाज करना पड़ रहा है। एक डॉक्टर की ड्यूटी ऐसी नहीं होती, जिसे घर से की जा सके। हेल्थ केयर वर्कर्स को तो घर से बाहर निकलकर हॉस्पिटल जाना ही है। बिना अपनी जान की परवाह किए कोरोना संक्रमितों की जान बचाने की हर संभव प्रयास करनी ही है। ऐसे में पिछले 6 महीने से तमाम डॉक्टर्स एक योद्धा के रूप में उभर कर सामने आए हैं।
जब से कोरोना का आतंक शुरू हुआ है, दुनिया भर के डॉक्टर निस्वार्थ भाव से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। इस दौरान कई डॉक्टर्स और हेल्थ केयर वर्कर्स ने अपनी जान भी गंवाई है। ऐसे में 'नेशनल डॉक्टर्स डे 2020' (National Doctor’s Day 2020) के उपलक्ष में हम सभी का कर्तव्य बनता है कि हम उन हेल्थ हीरोज को सलाम करें, उन्हें याद करें, जिन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए अपनी जान की भी परवाह नहीं की। अपने घर-परिवार से दूर रहकर रात-दिन अपनी ड्यूटी निभाई।
हम और आप घर बैठकर इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि डॉक्टर्स जब अपनी ड्यूटी पर होते हैं, तो किस शारीरिक और मानसिक स्थितियों से गुजरते हैं। किन समस्याओं, चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ता है। यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर, स्ट्रैटजी एंड कोविड-19 मैनेजमेंट डॉ. आर के मनी आज हमारे साथ फेसबुक पर लाइव जुड़ रहे हैं। इस लाइव सेशन के दौरान डॉ. मनी कोविड-19 मरीजों के इलाज के दौरान डॉक्टर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर बात करेंगे। आप भी उनके विचारों, उनके सामने आने वाली चुनौतियों को जानने-समझने के लिए हमारे साथ जुड़िए हमारे फेसबुक लाइव सेशन में...
भारत में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' (National Doctor's Day 2020) सेलिब्रेट किया जाता है। भारत के प्रसिद्ध एवं महान चिकित्सक और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. बिधान चंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) को सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए उनके जन्म के उपलक्ष्य (1 जुलाई 1882) और पुण्यतिथि (1 जुलाई 1962) पर मनाया जाता है। चिकित्सा जगत में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। भारत में ‘नेशनल डॉक्टर्स डे’ (National Doctor’s Day 2020) की शुरुआत वर्ष 1991 में की गई थी। आज, 'नेशनल डॉक्टर्स डे' पर आइए जानते हैं कि कोविड-19 मरीजों का इलाज करते समय डॉक्टर्स किन-किन चुनौतियों का सामना करते हैं और मरीजों के परिवार से वो किस तरह का सहयोग चाहते हैं...
कोरोना महामारी के दौरान आज दुनिया भर के हॉस्पिटल्स में जिस तरह से डॉक्टर्स कोविड पेशेंट्स का रात-दिन इलाज कर रहे हैं, वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, इससे उनके अंदर भी तनाव, चिंता और भय की स्थिति बनी रहती है। हेल्थ केयर वर्कर्स या डॉक्टर्स के मन में लगातार कोरोनावायरस से संक्रमित होने का डर मन में बैठा रहता है। उन्हें अपने परिवार की चिंता रहती है कि उनके घर जाने से कहीं वो भी संक्रमित ना हो जाएं। ये सभी बातें उनके दिमाग में रात-दिन घूमती हैं, उसके बाद भी वो पूरी शिद्दत से मरीजों की जान बचाने में लगे रहते हैं।
आज कई डॉक्टर्स ने अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए खुद को उनसे आइसोलेट कर लिया है। यह डॉक्टर्स द्वारा किए गए उन कई त्याग और बलिदानों में से एक है, जो वे अपनी स्वेच्छा से कोविड-19 रोगियों की देखभाल करने के लिए करते हैं। आज भी कई हॉस्पिटल ऐसे हैं, जहां उपचार के दौरान संक्रमण से बचने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पीपीई की कमी है। ये सब जानते हुए भी आज डॉक्टर अपनी ड्यूटी निभा रहा है।
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कई बार डॉक्टर्स को लगातार बिना ब्रेक लिए एक दिन में 18 से 20 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में बेहतर क्वालिटी वाले पीपीई की कमी, हॉस्पिटल में बेहतर सुविधा की कमी, संक्रमण से हेल्थ केयर वर्कर्स को बचाने के लिए बेहतर व्यवस्था की कमी, घर-परिवार से दूर रहकर काम करना, मकान मालिकों द्वारा किराए पर रहने वाले डॉक्टर्स को घर में प्रवेश करने से रोकना जैसी ये तमाम बातें, उनके अंदर मेंटल ट्रॉमा को जन्म देता है।
इससे उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई डॉक्टर ये स्वीकार करते हैं कि वर्तमान परिदृश्य के तहत मनोवैज्ञानिक आघात (psychological trauma) मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर्स को इन तमाम नकारात्मक चीजों से खुद को बचाए रखने की बहुत जरूरत है।