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Written By: Atul Modi | Published : December 29, 2023, 3:51 AM
'हमारा बच्चा तो मोबाइल छोड़ता ही नहीं है','हमारा बच्चा मोबाइल के बिना खाना नहीं खाता', 'हमारा बच्चा सारे दिन मोबाइल पर गेम खेलता है', ऐसी कई बातें आपने अपने आसपास सुनी होंगी या हो सकता है आप खुद भी ऐसी ही परेशानियों का सामना कर रहे हों। दरअसल, आज के समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल से आकर्षित रहते हैं। वहीं कुछ बच्चे तो इसके बिना खाना तक नहीं खाते। बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ना, उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में माता-पिता हर समय उन्हें मोबाइल छोड़ने और स्क्रीन टाइम कम करने के लिए टोकते हैं। लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों को मोबाइल से दूर करने का यह तरीका भी सही नहीं है और इसका विपरीत असर हो सकता है।
दरअसल, बच्चों को तकनीक से दूर रखना भी सही नहीं है। उन्हें नई जानकारी देने में, नई बातें सिखाने में और आजकल पढ़ाई करने में भी मोबाइल उनका साथी बन गया है। ऐसे में उन्हें मोबाइल से दूर करके आप उनकी नॉलेज दूर करने का कारण बन सकते हैं। इसलिए बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए बहुत ही समझदारी से कदम उठाएं। बच्चों में हेल्दी स्क्रीन हैबिट और डिजिटल सेफ्टी की नींव डालना बहुत ही जरूरी है। वहीं उनका स्क्रीन टाइम कम करने के लिए आप सकारात्मक कदम उठाएं।
यह बात सही है कि आज के समय में बच्चों को मोबाइल से दूर नहीं रख सकते, लेकिन उनकी स्क्रीन टाइम का एक शेड्यूल बनाकर आप इसे कंट्रोल कर सकते हैं। दिन में मोबाइल के लिए कुछ घंटे निश्चित करें। इसके तुरंत बाद आप बच्चे की पसंद की ही कोई एक्टिविटी प्लान करें। हो सके तो इसमें उसके आसपास के फ्रेंड्स को भी शामिल करें। बच्चे मोबाइल पर खेलने से ज्यादा पार्क में दोस्तों के साथ खेलना पसंद करते हैं। इस तरह से बच्चे को मोबाइल छोड़ने में कोई परेशानी नहीं होगी और वह एक्टिव भी बना रहेगा।
बच्चे को आराम से खाना खिलाने के लिए अक्सर पेरेंट्स उन्हें मोबाइल पकड़ा देते हैं, लेकिन कुछ देर की यह सुविधा आगे चलकर बच्चे की आदत बन जाती है। वे बिना मोबाइल के खाना ही नहीं खाते। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने घर का एक नियम बना लें कि खाने के समय कोई भी मोबाइल को हाथ नहीं लगाएगा। इसकी जगह आप बच्चों की पसंद का कोई कार्टून या फिर मूवी लगा सकते हैं। अगर बच्चा थोड़ा बड़ा है तो आप उससे दिनभर में की गई उसकी एक्टिविटी पूछें, उसके दोस्तों की बात करें, गेम्स के बारे में पूछें। ऐसे में बच्चों को मोबाइल की जरूरत ही महसूस नहीं होगी।
बच्चा मोबाइल देख रहा है तो आप इस बात पर ध्यान दें कि वह क्वालिटी स्क्रीन टाइम हो यानी बच्चा मोबाइल पर अच्छी चीजें ही देखे। जिससे वह कुछ सीख पाए, अपनी समस्याओं को हल कर पाए, रचनात्मक गतिविधियां सीख सके। यह पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों की रुचि ही इस प्रकार से विकसित करें।
बच्चे स्क्रीन से बहुत कुछ सीख सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वो स्क्रीन मोबाइल की ही हो। आप बच्चों को ज्ञानवर्धक टीवी शोज, प्रेरक फिल्में या कार्टून मूवी भी दिखा सकते हैं। इतना ही नहीं आप बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज भी ज्वॉइन करवा सकते हैं। इससे उनकी नॉलेज बढ़ेगी।
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