
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 12, 2022 11:18 AM IST
Men’s Health Week 2022:मेंटल हेल्थ इश्यूज़ अब हर एज ग्रुप के लोगों को महसूस हो रहे हैं और लोग इस बारे में खुलकर बातें करने लगे हैं। हालांकि, भारतीय समाज की बात करें तो यहां महिलाओं में डिप्रेशन, बुजुर्गों में एल्जाइमर्स, अकेलापन, उदासी और बच्चों में विभिन्न प्रकार के सिंड्रोम के बारे में तो चर्चा की जाती है लेकिन वहीं, कम उम्र के पुरुषों में होने वाली मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के बारे में अधिक चर्चा नहीं होती। हैरान करने वाली बात यह है कि 20-50 आयु वर्ग के पुरुषों पर मानसिक दबाव सबसे अधिक होता है लेकिन वे अपनी मानसिक परेशानियों के बारे में किसी और से बात नहीं करना चाहते। इसके कई कारण हो सकते हैं और एक बड़ा कारण यह भी है कि हमारे देश में पुरुषों को हमेशा स्ट्रॉन्ग बने रहने की सलाह दी जाती है। नतीजतन लोग अपनी प्रॉब्लम्स के बारे में बात नहीं करते और लगातार तनाव, एंग्जायटी, असुरक्षा जैसी भावनाएं महसूस करने के बाद भी खुद ठीक होने का दिखावा करते रहते हैं। (Tips for better mental health of men in Hindi. )

आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में हर वर्ष बहुत से पुरुष आत्महत्या कर लेते हैं। यहां प्रतिदिन 5-8 पुरुष सुसाइड करते हैं और इसके पीछे एक बड़ी वजह उस मेंटल स्ट्रेस को माना जाता है जो पुरुष दैनिक स्तर पर महसूस करते हैं। इसके अलावा यह भी देखा गया है कि पुरुष खुद की मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने के लिए भी समय नहीं निकाल पाते या इस तरफ ध्यान नहीं देते। लेकिन, ऐसे पुरुष अपनी डेली लाइफ में कुछ सिम्पल सी बातों का ध्यान रखकर खुद को मेंटली स्ट्रॉन्ग बना सकते हैं। ऐसी ही कुछ टिप्स के बारे में आप पढ़ सकते हैं यहां-
एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक्टिव रहने वाले लोगों की तुलना में कसरत ना करने वाले या सुस्त रहने वाले लोगों में डिप्रेशन जैसी मानसिक परेशानियों की संभावना 60% तक अधिक होती है। ऐसे लोग जो डेस्क जॉब करते हैं या दिन में कई-कई घंटे तक अपनी कुर्सी ने नहीं उठ पाते उनमें इस तरह की समस्याओं के बढ़ने का रिस्क भी बहुत अधिक बताया जाता है। लेकिन, ऐसे लोग अगर दिन में 10-15 मिनट का भी समय निकालकर कुछ हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें तो भी उनकी इमोशनल हेल्थमें काफी इजाफा हो सकता है। ऑफिस और घर में लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़ें, बच्चों के साथ भागे-दौड़ें या अपने पालतू जानवरों को वॉक पर ले जाएं। सुबह जल्दी उठकर 10-20 मिनट की वॉक करने से भी लोगों को काफी अधिक फायदा मिल सकता है।

मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को छुपाने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि लोगों के मन में डर है कि मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या के बारे में जानकर लोग उन्हें कहीं मानसिक रोगी ना समझ लें। लेकिन, आपका यह डर आपकी समस्या को और भी गम्भीर बना सकता है। इसीलिए, जब भी आप स्ट्रेस, एंग्जायटी या उदासी आदि महसूस करें तो अपने परिवार और दोस्तों से इस बारे में बात करें। किसी साइकोलॉजिस्ट या अन्य एक्सपर्ट से सलाह-मशविरा करें और जरूरत के अनुसार थेरेपी या अन्य उपायों की भी मदद लें।
दुनियाभर के अधिकांश हिस्सों में परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने कि जिम्मेदारी पुरुषों को सौंप दी जाती है। इस वजह से पुरुषों पर पैसे कमाने, प्रॉपर्टी खरीदने और परिवार का भविष्य सुरक्षित बनाने का दबाव लगातार बना रहता है। पुरुष परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मेहनत तो करते ही हैं लेकिन जब वे अपने फाइनेंशियल गोल्स को पूरा नहीं पाते तो उन्हें तनाव महसूस होने लगता है। ऐसे में लोग कई बार उधार भी ले लेते हैं जो उनकी मानसिक परेशानियों को बढ़ा देता है। पैसों की वजह से होने वाले तनाव को कंट्रोल करने के लिए मनी मैनेजमेंट सीखें। इसके लिए किसी काउंसलर की भी मदद ली जा सकती है। समझदारी से पैसे खर्च करने और सेविंग्स बढ़ाने जैसी आदतों से आपके लिए खुद को मेंटली हेल्दीऔर टेंशन-फ्री रखना आसान हो सकेगा।

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