जब हमारे मानसिक स्वास्थ्य की बात आते हैं तो मेडिटेशन करने की सलाह दी जाती है। तमाम वैज्ञानिक और आध्यात्मिक गुरु भी यह मानते हैं कि मेडिटेशन आपके मस्तिष्क को शांत रखने में काफी मददगार है। यह स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी भावनात्मक समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। विभिन्न अध्ययनों के माध्यम से शोधकर्ताओं ने भी पाया है कि ध्यान तनाव को कम करने याददाश्त को बढ़ाने समेत हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
हालांकि मेडिटेशन से जुड़ी एक बात और है, जिसे हम नहीं जानते हैं; पिछले कुछ अध्ययनों में मेडिटेशन के कुछ नकारात्मक प्रभावों को भी सूचीबद्ध किया गया है। इसमें कहा गया है कि मेडिटेशन का हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए दो हजार सत्रह के एक अध्ययन में पाया गया है कि ध्यान के कुछ दुष्प्रभाव लोगों पर हो सकते हैं, हालांकि इस बात को पूरी तरह से साबित करने के लिए अभी और अधिक शोध करने की आवश्यकता है। मगर फिलहाल के इन निष्कर्षों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।
शोध में ध्यान के कुछ दुष्प्रभाव बताए गए हैं जिनका आप अनुभव कर सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:
आप चिंता या एंजायटी है और ज्यादा ग्रसित हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह दावा किया है कि मेडिटेशन से लोगों में एंजायटी अटैक आ सकता है क्योंकि मेडिटेशन सभी प्रकार की भावनाओं और यादों को वापस लाता है जिसमें आपके जीवन से जुड़े कुछ दर्दनाक हादसे भी हो सकते हैं जिनके याद आने से आप दोबारा चिंता से ग्रसित हो सकते हैं।
आप दुनिया से खुद को अलग-थलग महसूस कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जहां ध्यान का आपके मन और मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं यह नकारात्मक भावनाओं को भी प्रेरित कर सकता है। यह कभी-कभी आपको दुनिया से अलग-थलग महसूस करा सकता है, यानी लोगों से जुड़ने की भावनाओं को कम कर सकता है।
आप में मोटिवेशन की कमी आ सकती है। यह दावा किया गया है कि मेडिटेशन से मोटिवेशन में कमी आ सकती है, क्योंकि मेडिटेशन एक व्यक्ति को वैराग्य का जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है जिसके चलते व्यक्ति में अपने कामों, व्यक्तिगत जीवन और अपने सगे संबंधियों के प्रति अरुचि पैदा हो सकती है।
द अमेरिकन साइकोसोमेटिक सोसायटी द्वारा प्रकाशित इस अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग बहुत अधिक ध्यान करते हैं उसमें नींद ना आने की समस्या हो सकती है विशेषज्ञों के मुताबिक मेडिटेशन व्यक्ति में सतर्कता और फोकस बढ़ा सकता है जिसके चरम से व्यक्ति में नींद 9 की समस्या देखी जा सकती है।
कुल मिलाकर अगर आप मेडिटेशन या ध्यान करना चाहते हैं तो इसे एक निश्चित समय तक ही करें ज्यादा देर तक ध्यान ना करें। आप किसी एक्सपर्ट की भी मदद ले सकते हैं।
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