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Written By: Anshumala | Published : September 9, 2019 7:10 PM IST
गार्डनिंग करने से सेहत पर होते हैं कई लाभ। © Shutterstock.
गार्डनिंग यानी बागवानी (Gardening benefits) का शौक कई लोगों को होता है। यह आपको नेचुरल तरीके से हेल्दी रखने में मदद करती है, क्योंकि आप इसके जरिए हरे-भरे पेड़-पौधों के बीच होते हैं, जिससे मन खुश होता है। जानें, गार्डनिंग (Gardening benefits) करने के सेहत पर क्या होते हैं फायदे...
विभिन्न शोधों में पाया गया है कि अपने बागवानी के शौक को समय देनेवाले लोग रिलैक्स्ड रहते हैं। चूंकि, आप रिलैक्स्ड रहते हैं, आपकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) में भी बढ़ोतरी होती है। साथ ही बागवानी के चलते आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। गार्डनिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनानेवाले लोगों में कॉर्टिसॉल, जिसे स्ट्रेस हॉर्मोन भी कहा जाता है, का स्तर कम होता है यानी हाथों को मिट्टी में गंदा करके आप अपना तनाव घटा सकते हैं।
गार्डनिंग करते समय शरीर का अच्छा व्यायाम हो जाता है। गार्डनिंग के दौरान आपको खुदाई, गुड़ाई, निराई, सिंचाई जैसी तमाम गतिविधियां करनी होती हैं। ये गतिविधियां कार्डियो एक्सरसाइज जितनी फायदेमंद होती हैं। शरीर में रक्त संचार को बढ़ाने का काम भी इन गतिविधियों से हो जाता है। यदि आपको जिम जाने में बोरियत महसूस होती हो तो फिट रहने का यह तरीका अपना सकते हैं।
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धूल-मिट्टी में प्राकृतिक ऐंटी-डिप्रेसेंट पाया जाता है, जिसे मायकोबैक्टेरियम वैके कहा जाता है। रिसर्च बताते हैं, ऐंटी-डिप्रेसेंट माइक्रोब साइटोकिन लेवल को बढ़ाने का काम करते हैं, जिससे सेरोटोनिन के प्रोडक्शन में वृद्धि होती है। सेरोटोनिन ख़ुशहाली को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा जब आप अपने हाथों से रोपे गए पौधों को बढ़ते, उनमें फूल या फल लगते देखते हैं तो आपको अंदर से प्रसन्नता होती है. एक संतुष्टिदायक एहसास होता है।
देखा गया है कि जो लोग होम गार्डनिंग करते हैं, वे ऐसा न करनेवालों की तुलना में सेहतमंद चीजें खाते हैं। उनके खाने में फल और सब्जियां अधिक होती हैं। घर पर उगाए गए फल और सब्जियों की बराबरी भला कौन कर सकता है।
3,000 वयस्कों पर लंबे समय तक चले एक शोध के बाद यह पाया गया कि गार्डनिंग करनेवाले लोगों में भूलने की बीमारी होने की संभावना गार्डनिंग से कोई सरोकार न रखने वालों की तुलना में 36% तक कम होती है. दरअस्ल गार्डनिंग की गतिविधियों में खुद को खपाकर हम अपने दिमाग को अधिक ऐक्टिव कर देते हैं, जिससे उसकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है।