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बच्चा नहीं होने से बिगड़ा मानसिक स्वास्थ्य? इन 6 टिप्स से खुद को बनाएं स्ट्रॉन्ग और देखें कमाल

Tips for strong Mental health in hindi : तनाव उत्पन्न होने का कारण केवल बांझपन ही नहीं होता, बल्कि कुछ महिलाओं को इसके इलाज के लिए दी जाने वाली हार्मोन की दवाईयों का भी उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

बच्चा नहीं होने से बिगड़ा मानसिक स्वास्थ्य? इन 6 टिप्स से खुद को बनाएं स्ट्रॉन्ग और देखें कमाल
बच्चा नहीं होने से बिगड़ा मानसिक स्वास्थ्य? इन 6 टिप्स से खुद को बनाएं स्ट्रॉन्ग और देखें कमाल

Written by Jitendra Gupta |Updated : October 10, 2022 7:31 AM IST

Tips for strong Mental health in hindi : संतानप्राप्ति महिलाओं और पुरुषों के वैवाहिक जीवन में होने वाले सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है। संतान न होने का तनाव भावनात्मक और मानसिक क्षति पहुंचाता है। बांझपन की समस्या लाखों दंपत्तियों को होती है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है। अध्ययनों के अनुसार, निःसंतान दंपत्तियों को काफी ज्यादा चिंता व मानसिक परेशानी होती है। बिरला फर्टिलिटी एवं आईवीएफ कंसल्टेंट डॉ. प्राची बेनारा का कहना है कि प्रजनन का इलाज विफल हो जाता है, तब दंपत्ती दुख व नुकसान के गहरे भावनात्मक उतार-चढ़ाव का शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा, प्रजनन के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाईयों से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। तनाव उत्पन्न होने का कारण केवल बांझपन ही नहीं होता, बल्कि कुछ महिलाओं को इसके इलाज के लिए दी जाने वाली हार्मोन की दवाईयों का भी उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इनके साईड इफेक्ट्स के कारण नींद आने में परेशानी, यौनइच्छा में कमी, शरीर में तेज गर्मी की लहर दौड़ना, अवसाद, या चिंता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

तनाव और प्रजनन क्षमता में संबंध

आज के दंपत्तियों में तनाव बांझपन का मुख्य कारण है। तनाव में होने पर शरीर में कुछ हार्मोन निकलते हैं, जिससे शरीर की प्रजनन करने की प्राकृतिक क्षमता कम हो जाती है, क्योंकि ये हार्मोन ऑव्युलेशन, फर्टिलाईज़ेशन और इंप्लांटेशन को प्रभावित करते हैं। यदि व्यक्ति के काम की दिनचर्या या जीवनशैली के कारण उसे देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना पड़ता है, तो निरंतर नींद की कमी का शरीर पर बुरा असर पड़ता है, जिससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। तनाव में होने पर लोग सेहतमंद तरीके से कम खाते हैं। लगातार तनाव बना रहने से वजन बढ़ सकता है, और मोटापा होने पर प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। जिस प्रकार जंक फूड ज्यादा खाने और ओवरवेट होने से प्रजनन की समस्याएं हो सकती हैं, उसी प्रकार बहुत कम वजन होना, या पर्याप्त खाना न खाना भी प्रजनन क्षमता के लिए अच्छा नहीं।

प्रजनन के दौरान मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के तरीके

खुद की देखभाल का अभ्यास करें

जितना ख्याल आप अपने परिवार व दोस्तों का रखते हैं, उससे कम से कम आधा ख्याल अपना भी रखें। पर्याप्त नींद लें, व्यायाम करें, अकेले समय बिताएं, और अन्य लोगों के साथ समय बिताएं, ताकि आपको महसूस हो कि आपका भी ख्याल रखा जा रहा है। अपना खुद का सबसे अच्छा दोस्त होने का अभ्यास करें।

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खुद से बात करें

खुद से उत्साहवर्धक बात किया करें, क्योंकि हम खुद से जो शब्द बोलते हैं, उनमें बहुत ताकत होती है। यदि अन्य लोग आपको याद दिलाते हैं कि परिवार बनाने का कोई तरीका सदैव मौजूद होता है, तो इसका आम तौर से बहुत कम या कोई असर नहीं होता। लेकिन यदि आप खुद से कहेंगे कि हमेशा कोई न कोई रास्ता मौजूद होता है, तो उससे आप उत्साह से भर जाएंगे।

अन्य लोगों से बात करें

परिवार, दोस्तों या कार्यस्थल पर प्रजनन क्षमता के बारे में बात करने की अनिच्छा होने के अनेक कारण होते हैं। हो सकता है कि आप चिकित्सा संबंधी मामलों को गोपनीय रखना चाहते हों, ताकि कोई भी आपको बिना मांगे सलाह न दे; हो सकता है कि आप हर किसी की प्रजनन की कहानी सुनना न चाहते हों, या हो सकता है कि आप प्रजनन की समस्या को एक कलंक मानते हों। हो सकता है कि आप अपनी नौकरी को बचाए या अपने डेटिंग के विकल्पों को खुला रखना चाहते हों। लेकिन इसका परिणाम यह होता है कि जब आपको किसी की सहानुभूति और सहयोग की जरूरत होती है, तब आप अलग-थलग पड़ जाते हैं। भावनाओं पर काबू पाना तब आसान हो जाता है, जब उनको जोर से सुनाया जाए, न कि तब, जब वो आपके दिमाग में घूमती रहें।

अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें

प्रजनन के उपचार बहुत तनावपूर्ण और समय की मांग करने वाले होते हैं, इसलिए बांझपन के कारण आपको महसूस हो रही चिंता से काम आपका ध्यान प्रभावशाली तरीके से भटका सकता है। प्रोजेक्ट्स में व्यस्त व सक्रिय बने रहने से आपका मन दूसरी ओर चला जाता है, और आपमें उपलब्धि की भावना आती है, तथा आपका आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है।

कॉग्निटिव रिस्ट्रक्चरिंग करें

कॉग्निशन का मतलब विचार है; रिस्ट्रक्चरिंग का मतलब नए दृष्टिकोण बनाना है। ये दोनों शब्द मिलकर प्रदर्शित करते हैं कि हम नई तरह से सोच सकते हैं और जिसके परिणामस्वरूप हमारा व्यवहार और भावनाएं नए हो जाएंगे। उदाहरण के लिए जब हम निराशा के विचारों के बारे में सोचेंगे, तो हम न केवल खुद को, बल्कि अपने आसपास हर किसी को यह विश्वास दिला रहे होंगे कि आशा की कोई उम्मीद नहीं है, और हमारी जड़ता हमारी इस बात को सही साबित कर देगी। विचारों की इसी प्रक्रिया के कारण मरीज प्रजनन क्षमता का इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं। दूसरी तरफ, यदि हम आशावादी बने रहते हैं, तो हम व्यवस्थित तरीके से समस्याओं का सामना करते हैं, जिससे हमें ऐसे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जो हमारे आशावादी विचारों - सकारात्मक स्वांतःसुखाय भविष्यवाणियों को साबित करें।

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रिलैक्सेशन तकनीकों का पालन करें

योगा, ध्यान, संगीत सुनने की गतिविधियां आपके मन को सुकून देती हैं। मरीज के मन का शांत रहना बहुत जरूरी होता है। उसके प्रजनन के स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य, दोनों को परामर्श एवं कोविड-19 से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सुरक्षा विधियों का पालन करते हुए आराम दिया जाना चाहिए। इसलिए दंपत्तियों को संतानप्राप्ति कर परिवार बनाने की इच्छा पूरी करने में मदद करने के अलावा प्रजनन का इलाज करने वालों को इन लोगों के मानसिक तनाव को कम करने का भी प्रयास करना चाहिए।

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