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Written By: Atul Modi | Updated : December 28, 2023 9:01 AM IST
खुशी यानी प्रसन्नता इंसान में पाई जाने वाली सभी भावनाओं में से सबसे ज्यादा सकारात्मक भावना होती है। आप अगर दिल से खुश हैं तो मानों आपने दुनिया जीत ली। अगर आप दुखी हैं तो दुनिया की कोई भी चीज आपको अच्छी नहीं लगेगी। इसलिए ये वे भावना है, जिसपर आपके जीवन की दशा और दिशा दोनों ही निर्भर करती है। अब सवाल ये है कि क्या हम अपने शरीर के हैप्पीनेस हार्मोन्स बढ़ाकर खुश हो सकते हैं। और जवाब है 'हां'। अगर आप अपने हैप्पीनेस हार्मोन्स पर काम करें तो आपमें सकारात्मकता आ सकती है। आखिर खुशी और हार्मोन्स के बीच क्या रिश्ता है और क्यों उन्हें सुधारना जरूरी है, ये राज आज जान लेते हैं।
दरअसल, हमारे शरीर में पाया जाने वाला कोर्टिसोल नामक हार्मोन तनाव का मुख्य कारण माना जाता है। ये डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को रिलीज नहीं होने देता। न्यूरोट्रांसमीटर शरीर के रासायनिक संदेशवाहक के रूप में काम करते हैं। ये एक तंत्रिका कोशिका से संदेश को दूसरी तंत्रिका, ग्रंथि या मांसपेशी तक ले जाते हैं। जब आपके हैप्पीनेस हार्मोन्स का प्रवाह रुक जाता है तो इसका सीधा असर आपकी मनोदशा पर पड़ता है। आप चिंता में रहने लगते हैं, उदासी महसूस होती है, मूड स्विंग होते हैं। ऐसे में अगर आप सच में खुश रहना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आप हैप्पीनेस हार्मोन पर ध्यान दें। कुछ गतिविधियों को अपनाकर आप कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं।
अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो अपने शौक पर ध्यान दें। ऐसी गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, जिससे आपको संतुष्टि मिलती हो और उपलब्धि की भावना महसूस होती हो। ऐसा करने से आपके शरीर में डोपामाइन हार्मोन बढ़ेगा।
माइंड को शांत और टेंशन फ्री रखने के लिए आप माइंडफुलनेस का अभ्यास करें। सूरज की रोशनी, हरे भरे पेड़, बहती नदियां, समुद्र के किनारे, आसमान छूते पहाड़, लहलहाते खेत, कॉलोनी का पार्क, आपके घर में लगे पौधे आदि आपको अंदर से खुशी का अनुभव करवाते हैं। आप अपनी परिस्थितियों के अनुसार प्रकृति के पास रहें, इससे आपके शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है। यह खुशी के लिए जरूरी हार्मोन है।
समाज और खुशियां आपस में जुड़ी हैं। जो लोग ज्यादा सामाजिक होते हैं वे ज्यादा खुश और संतुष्ट रहते हैं। ऐसे में अपनी सामाजिक गतिविधियां बढ़ाएं। लोगों से मिलें, उनकी मदद करें, दोस्तों के साथ समय बिताएं। ऐसा करने से आपको आत्मसंतुष्टि महसूस होगी। साथ ही ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर बढ़ने में भी मदद मिलेगी।
एक ही जगह पर बैठ कर अपने साथ हुई गलत बातों को सोचना, आपको बेहद परेशान करेगा। लेकिन आप सब कुछ भुलाकर अपने लिए जीना शुरू कर देंगे तो आपके कई दुख अपने आप कम हो जाएंगे। इसलिए अपने डेली रूटीन में कोई न कोई एक्टिविटी आप जरूर जोड़ों। वॉक पर जाएं, एक्सरसाइज करें, योग और मेडिटेशन करें। ऐसा करने से एंडोर्फिन नामक हैप्पी हार्मोन बढ़ता है, जिससे आप खुश महसूस करेंगे।
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