Eating Disorders: खुद को बहुत पतला या फिट दिखाने की चाहत है एक मानसिक बीमारी, आपकी यह इच्छा बन सकती है 'इटिंग डिसॉर्डर्स' की वजह

इटिंग डिसॉर्डर कई प्रकार के (types of eating disorders) हो सकते हैं जिनमें, बिंज इटिंग (Binge eating), ओवरइटिंग, जल्दी-जल्दी खाने की आदत या बिल्कुल भूख ना लगने ( Anorexia) जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 3, 2022 12:29 AM IST

Eating disorder Causes And Effects On Health: पौष्टिक डाइट और अच्छी इटिंग हैबिट्स जहां स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं वहीं खाने-पीने से जुड़ी कई आदतें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती हैं। खाने-पीने से जुड़ा अजीब व्यवहार या आदतें इटिंग डिसॉर्डर का एक संकेत हो सकती हैं। इटिंग डिसॉर्डर कई प्रकार के (various kinds of eating disorders) हो सकता है जिसमें बिंज इटिंग (Binge eating), ओवरइटिंग, जल्दी-जल्दी खाने की आदत या बिल्कुल भूख ना लगने ( Anorexia) जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इटिंग डिसॉर्डर महिलाओं और बच्चों में अधिक देखा जाता है। खासकर बच्चों में टीनएज के बाद व्यापक स्तर पर हार्मोनल बदलाव (Hormonal changes) आते हैं और बच्चे इस दौर में अपने लुक्स और फिजिकल अपीयरेंस (physique) को लेकर अधिक फिक्रमंद हो जाते हैं ऐसे में वे खुद भी बहुत-सी चीजों का सेवन खुद ही बंद कर देते हैं या खानपान से जुड़ी अजीब आदतें अपना लेते हैं। वहीं, पुरुषों में भी इटिंग डिसॉर्डर की संभावना अधिक देखी जाती है हालांकि, उसका पता कम ही लग पाता है या वे उसकी तरफ ध्यान नहीं देना चाहते। (Eating disorder Causes And Effects On Health In Hindi)

इटिंग डिसॉर्डर के नुकसान क्या हैं?

विभिन्न सर्वे और स्टडीज के डेटा से यह बात सामने आयी है कि पुरुषों में शरीर की बनावट और लुक्स को लेकर होने वाली चिंता मसल्स डिस्मॉर्फिक  (Muscle Dysmorphia)  या बॉडी डिस्मॉर्फिक (Body Dysmorphia) की संभवना अधिक होती है। यह एक मानसिक स्थिति है जो व्यवहार और विचारों को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट के अनुसार मसल्स डिस्मॉर्फिक से पीड़ित पुरुष अपनी मर्दानगी को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं इसीलिए, वे खुद को अधिक मर्दाना दिखाने के लिए कई बार बहुत मुश्किल एक्सरसाइजेस और डाइट प्लान्स भी फॉलो करने लगते हैं। ऐसे लोग खुद दूसरों की तुलना में अधिक मज़बूत और फिट दिखाना चाहते हैं और आसानी से उन स्टेरॉइड्स, ड्रग्स और प्रोटीन सप्लीमेंट्स के सेवन के लिए खुद को तैयार कर लेते हैं जो उनका अनियंत्रित तरीके से सेवन भी कर लेते हैं। वहीं, कुछ लोग जीरो कार्बोहाइड्रेट्स या जीरो फैट के साथ हाई प्रोटीन डाइट लेते हैं जिससे उनकी सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है और वे बीमार पड़ने लगते हैं।

क्यों होती हैं महिलाएं साइज जीरो की तरफ आकर्षित

वहीं, दूसरी तरफ महिलाएं भी खुद को पतला दिखाने के लिए पूरी तरह से खाना-पीना बंद कर देती हैं, लिक्विड डाइट (Liquid Diet) का सेवन करती हैं या दिन में केवल एक बार भोजन करने या इंटरमिटेंट फास्टिंग(Intermittent Fasting) जैसे तरीके बिना सोचे-समझे या किसी एक्सपर्ट की सलाह लिए बिना इन तरीकों का पालन करने लगती हैं। गौरतलब है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और हर किसी के शरीर की बनावट भी अलग होती है। इसीलिए, बिना सही सलाह और एक्सपर्ट की देखरेख के बिना लोगों को किसी भी ऐसी डाइट, एक्सरसाइज या अन्य किसी भी तरीके पर अमल नहीं करना चाहिए जो अविश्वसनीय फिटनेस गोल्स अचीव करने के सपने दिखाते हों।

आमतौर पर लोग अपने फेवरेट सेलिब्रिटीज को देखकर उनकी तरह पतले या मस्क्यूलर दिखने के प्रयास करते हैं। लेकिन, लोगों को यह भी समझना चाहिए कि कुछ प्रकार के प्रोफेशन्स ऐसे हैं जहां लोगों को बहुत पतला या बहुत फिट दिखाना आवश्यक होता है। मॉडलिंग, अभिनय, स्पोर्ट्स और टीवी में काम करने वाले लोगों के लिए खुद को बहुत पतला और फिट बनाने का दबाव हमेशा बना रहता है। इसीलिए, वे परफेक्ट बॉडी टाइप पाने के लिए इस तरह के कार्य करते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के लिए इस तरह के फिटनेस मापदंड को अचीव करना बहुत महत्वपूर्ण या आवश्यक नहीं हैं तो आपको इस बहकावे में नहीं आना चाहिए कि साइज-ज़ीरो (size zero) या 6 ऐब्स पैक्स वाले व्यक्ति ही फिट माने जाएंगे। फिट बनने के साथ  जो तनाव लोग महसूस करते हैं वह उनकी इटिंग हैबिट्स (eating habits) को भी प्रभावित कर सकता है। इसीलिए, जब भी आप खुद को फिट बनाने के लिए कोई फैसला लेते हैं तो वह फैसला किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही आधारित होना चाहिए।

इन मानसिक कारणों से बढ़ सकते हैं इटिंग डिसॉर्डर्स  (Psychological factors)

यूं तो विभिन्न स्टडीज और रिसर्च  के बावजूद इटिंग डिसॉर्डर के सही कारणों (causes of eating disorders) का पता नहीं लगाया जा सका है। हालांकि एक्सपर्ट्स की राय है कि कुछ मानसिक समस्याएं (psychological problems) और स्थितियां लोगों की खाने-पीने की आदतों को प्रभावित करती हैं। कुछ ऐसे ही कारण हैं ये -

  1. ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) में लोगों का भूख पर नियंत्रण नहीं रहता और वे बहुत अधिक मात्रा में या बहुत कम मात्रा में खाना खाते हैं।
  2. तनाव (Stress) और डिप्रेशन (Depression) से पीड़ित लोगों की भूख पूरी तरह खत्म हो सकती हैं। वहीं, कुछ लोग असामान्य तरीके से या बहुत अधिक खाना खाने लगते हैं।
  3. एंग्जायटी ( Anxiety) में भी लोग असामान्य तरीके से भोजन करते हैं।
  4. आत्म-विश्वास की कमी (Low self esteem) से जूझ रहे लोगों में भी इटिंग डिसॉर्डर्स देखे जाते हैं।
  5. किसी प्रकार का डर ( Fears) भी खानपान की आदतों को प्रभावित कर सकता है।
  6. अनुवांशिक कारणों (genetics) से भी लोगों को इटिंग डिसॉर्डर हो सकता है।
  7. कई बार दोस्तों के दबाव या पीयर प्रेशर (peer pressure) में भी आकर लोग अनहेल्दी इटिंग हैबिट्स (unhealthy eating habits) या फैड डाइट (Fad Diet) अपना लेते हैं।

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