... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Published : June 8, 2022 6:14 PM IST
सिरदर्द और उल्टियां जैसी 7 परेशानियां बताती हैं सिर के इस हिस्से में बन रहा है ट्यूमर! जानें प्रकार
मानव शरीर के लिए दिमाग का सही ढंग से काम करना सबसे जरूरी माना जाता है. अगर दिमाग पर जरा भी गलत असर हो तो सब कुछ खराब होने का खतरा रहता है. ऐसे में ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारियों को बेहद गंभीरता से लेने की सलाह दी जाती है। ब्रेन ट्यूमर, दिमाग की असामान्य कोशिकाओं का एक संग्रह होता है और ये बीमारी होने पर कई तरह की समस्याएं होने लगती है। अलग-अलग उम्र के हिसाब से ब्रेन ट्यूमर के केस सामने आते हैं। कई केस में ये ट्यूमर कैंसर का रूप ले लेता है और घातक साबित होता है और कई बार ये नॉन-कैंसरस भी होता है यानी इसका असर उतना खतरनाक नहीं होता है। ये दोनों ही तरह के ट्यूमर जब बढ़ते हैं तो सिर बहुत ज्यादा भारी हो जाता है, इससे ब्रेन डैमेज हो जाता है जिससे जान का खतरा भी पैदा हो जाता है।
डॉक्टर्स का कहना है कि ब्रेन ट्यूमरका समय पर ऑपरेशन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है, इससे न सिर्फ ट्यूमर से बचा जा सकता है बल्कि और दूसरी जानलेवा बीमारियों से भी शरीर की रक्षा की जा सकती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज या उनके परिजन ऑपरेशन से घबराकर दूसरे तरीके अपनाते हैं, जो परेशानी बढ़ा देते हैं।
ग्लोबोकैन रिपोर्ट 2020 (Globocan 2020 report) में बताया गया है कि भारत में हर साल 31,000 हजार से ज्यादा ब्रेन ट्यूमर के केस दर्ज किए गए। इनमें से 28,000 लोग इस बीमारी से संघर्ष करते हुए मौत के मुंह में चले गए।
सिरदर्द रहना ब्रेन ट्यमूर का शुरुआती लक्षण माना जाता है. वैसे ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि इसका साइज क्या है और ये दिमाग के किस हिस्से में है। कुछ केस में ट्यूमर सीधे दिमाग के टिशूज पर असर करता है तो किसी को दिमाग के आसपास इससे दिक्कत महसूस होती है. ब्रेन ट्यमूर के मुख्य लक्षण ये माने जाते हैं:
-सिरदर्द (सुबह के वक्त बहुत ज्यादा)
-उल्टियां आना
-आंखों के सामने धुंधलापन या एक चीज दो दिखाई देना
-दिमाग का सही ढंग से काम न करना
-दौरे पड़ना
-चेहरे के किसी हिस्से पर कमजोरी महसूस होना
-शारीरिक गतिविधियों में परेशानी
ब्रेन ट्यूमर को दो हिस्सों में बांटा गया है, प्राइमरी और सेकंडरी। जब ट्यूमर दिमाग के अंदर ही पनपता है तो ये प्राइमरी ब्रेन ट्यमूर कहलाता है। आमतौर पर ये ट्यूमर हल्का हो सकता है। सेकंडरी ट्यमूर वो कहलाता है जब कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों से फैलते-फैलते दिमाग तक पहुंच जाता है. यानी फेफड़ों या ब्रेस्ट से निकलकर कैंसर कोशिकाएं ब्रेन तक पहुंच जाती हैं।
प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर हल्का या कैंसरस यानी कैंसर युक्त भी हो सकता है। युवाओं की बात करें तो उनमें गिलोमास (gliomas) किस्म का ब्रेन ट्यूमर सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसके अलावा दिमाग और रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों से पैदा होने वाला ट्यमूर भी युवाओं में काफी पाया जाता है, इसे मेनिंगोमास (meningiomas) कहते हैं। ये ट्यूमर ब्रेन सेल्स यानी मस्तिष्क कोशिकाओं से पैदा हो सकता है, नर्व सेल्स से हो सकता है, पिट्यइटरि यानी दिमाग के सबसे निचले हिस्से पर स्थित ग्रंथि से हो सकता है. दिमाग को जो झिल्लियां घेरे रहती हैं, वहां से भी ये ट्यूमर फल-फूल सकता है।