ऑफिस में ये 5 तरह की दिक्कतें बना रही आपको तनाव का शिकार! एक्सपर्ट से जानें कैसे रखें मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल

आज के युवाओं में तनाव और अवसाद के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं और कहीं न कहीं इसका श्रेय उनके काम को ही दिया जा सकता है, जिसका बुरा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : January 19, 2023 11:52 AM IST

आपने अंग्रेजी की कहावत तो सुनी ही होगी 'All work and no play makes Jack a dull boy' यह कहावत हमें रोज़मर्रा में उन कामों के बीच तालमेल बनाने का सुझाव देती है कि हम क्या करना चाहते हैं और क्या करना हमारे लिए ज़रूरी है। हालांकि आज के युवाओं के लिए यह तालमेल बनाना आसान नहीं है। उनके पास मनोरंजन या रिलेक्स करने के लिए समय नहीं होता, उनका ज़्यादातर समय अपने काम में बीतता है, इसके बाद बचे हुए समय में वे किसी तरह ज़रूरी कामों को पूरा कर पाते हैं जैसे सोना, आराम करना, डॉक्टर के अपॉइन्टमेन्ट या परिवार के ज़रूरी काम। समय पर काम पूरा करने के तनाव के चलते अक्सर उन्हें अपने मनोरंजन के साथ समझौता करना पड़ता है।

तनाव और अवसाद

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलटी हॉस्पिटल में क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट डॉ. दीनिका आनंद का कहना है कि आज के युवाओं में तनाव और अवसाद के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं और कहीं न कहीं इसका श्रेय उनके काम को ही दिया जा सकता है, जिसका बुरा असर उनके मानसिक स्वास्थ्यपर पड़ रहा है। यह सच है कि हर काम में कुछ न कुछ तनाव होता ही है, लेकिन आज की तस्वीर इससे बहुत अलग है।

ऑफिस में तनाव की वजह

1-कार्यस्थल पर वेतन

2- भूमिका

3- मेंटरशिप

4- कंपनी की संस्कृति

5- व्यक्तिगत रिश्ते आदि बहुत से ऐसे पहलु होते हैं, जो पेशेवर स्तर पर तनाव का कारण बन सकते हैं। वहीं समाज की बात करें तो युवाओं पर कुछ इस तरह का दबाव बना रहता है, जहां वे इस बात को स्वीकार कर लेते हैं कि अपने लिए समय नहीं निकाल पाना कोई खास बात नहीं है।

कोविड के बाद बदले हालात

इसी तरह आज के दौर में कंपनियों की बात करें तो सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इस बात की कोई परिभाषा नहीं कि दिन का काम कहां और कब खत्म होगा। काम के घण्टों की कोई सीमा नहीं है, बहुत से मामलों में रात के 2 बजे मीटिंग्स, कॉल्स चल रहे होते हैं, जैसे दिन के 2 बजे की बात हो। कोविड-19 महामारी के बाद घर से काम का चलन बढ़ने के कारण तो स्थिति और भी बदतर हो गई है।

ऑफिस में अन्य दिक्कत

कार्यस्थल पर युवाओं को एक और चुनौती का सामना करना पड़ता है- अक्सर उन्हें अपने काम के लिए ज़रूरी कौशल सीखने के लिए कोई सहयोग या मेंटरशिप नहीं मिलता। इसके अलावा हमारी आज की शिक्षा प्रणाली युवाओं को कौशल या पेशेवर प्रशिक्षण प्रदान नहीं करती, जिसके चलते युवाओं में तनाव की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। कामकाजी पेशेवरों की क्षमता को अक्सर ‘पर्याप्त नहीं’ के नज़रिए से देखा जाता है, यह एक अलग समस्या है।

कैसे दुरुस्त करें मानसिक स्वास्थ्य

अगर एक दिन के लिए आप काम न करना चाहें और अपनी मरज़ी से दिन बिताना चाहें, तो वह संभव नहीं है। ये सभी पहलु आज के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ज़रूरत से ज़्यादा काम और तनाव को देखते हुए हमें अपने कार्यस्थलों और कार्यालयों को अपने कर्मचारियों के लिए अनुकूल बनाना होगा, ताकि हमारी युवा पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

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