... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Published : September 24, 2021 12:58 PM IST
गुस्से से जुड़े इन 4 मिथ पर भूलकर भी न करें विश्वास, भरोसा किया तो दोगुना हो जाएगा गुस्सा
फिल्म हो या असल जिंदगी गुस्सा हमेशा से हर व्यक्ति के लिए हानिकारक बताया गया है, जो हमारी सोचने और समझने की शक्ति क्षीण कर देता है। हमारे बड़े-बुजुर्ग लगातार कहते आए हैं कि हमें अपने गुस्से को काबू में रखना चाहिए लेकिन जो इसे महसूस करते हैं सिर्फ वो ही समझ सकते हैं कि गुस्से को काबू में रखना कितना मुश्किल है। गुस्से में कभी-कभार ऐसा भी होता है कि आप अपना सिर दीवार पर पीटने के लिए मजबूर हो जाते हैं या फिर रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ को तोड़कर आगे बढ़ना महसूस करते हैं। हालांकि निश्चित रूप से उस वक्त हमारे पास ऐसे विकल्प नहीं होते हैं, जिनका सहारा लेना चाहिए लेकिन कुछ मिथ अक्सर हमें परेशान करते हैं, जिनके बारे में हमें पता होना चाहिए। आइए जानते हैं गुस्से से जुड़े कुछ मिथ के बारे में, जिनकी सच्चाई आपको पता होनी चाहिए।
सत्य : गुस्सा एक आम भावना है, जिसे हर व्यक्ति कभी न कभी अपने जीवन में जरूर महसूस करता है और जो ये कहता है कि उसे गुस्सा नहीं आता तो वह निश्चित ही झूठा है। गुस्से को हर व्यक्ति अलग-अलग तरीकों से महसूस करता है। कुछ लोग इसे बाहर निकालने में सहज महसूस करते हैं तो कुछ लोग अपनी भावनाओं को अपने अंदर रखना ही पसंद करते हैं। इसलिए, जब तक आप किसी को नुकसान या चोट नहीं पहुंचा रहे हैं तब तक गुस्सा होना सामान्य है।
सत्य: कुछ लोगों के लिए भले ही सच हो लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो इस पर विश्वास नहीं करते। हालांकि यह हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। कुछ लोगों में गुस्से को दबाने की शक्ति होती है तो कुछ लोग अचानक ही गुस्से में आग बबूला हो जाते हैं। इसलिए, यह समझना बेहतर है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं।
सत्य: यह बहुत ही बड़ी गलती है। गुस्से में किसी से मिलने पर आपका गुस्सा और बढ़ सकता है इसलिए ऐसा करने से बचें। उदाहरण के तौर पर आप रोड रेज का मामला ले सकते हैं। अगर आप जानते हैं कि आपकी गलती है और आप तुरंत माफी मांग लेते हैं, तो चीजें ठीक हो जाएंगी। लेकिन अगर आप बहस करने का फैसला करते हैं, तो आप जानते हैं कि चीजें कहां तक जाएंगी। इसी तरह अगर आप जानते हैं कि दूसरे व्यक्ति की गलती है, और आप शांत रहने का फैसलाकरते हैं और उन्हें संकेत देते हैं कि वे गलत हैं तो वे इसे स्वीकार कर सकते हैं और मामले को सुलझा सकते हैं।
सत्य: यह हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरीके से काम करता है। हालांकि, चीखना, चिल्लाना और हिंसक व्यवहार से किसी को भी कोई मदद नहीं मिलती है। ये सभी आपकी भावनाओं को तेजी से बढ़ाने में मदद करता है और आपको शांत होने में अधिक समय लग सकता है। इसलिए, बैठ जाएं, आराम करें और सोचो कि आपको गुस्सा क्यों आ रहा है। आप गुस्सा होने के बजाए समाधान की तलाश करें और कभी भी हिंसक व्यवहार की ओर न मुड़ें।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.