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तिल या सरसों का तेल, बालों के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है?

आप अपने बालों को हेल्दी बनाने के लिए कौन से तेल का इस्तेमाल करते हैं? तिल का तेल या फिर सरसों का तेल? आइए आज हम आपको इन दोनों को बालों पर लगाने के फायदों के बारे में बताते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : July 4, 2026 7:33 PM IST

बालों की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के तेलों का इस्तेमाल करते हैं। जिनमें तिल का तेल और सरसों का तेल मुख्य हैं। लेकिन आप इन तेलों के बारे में और क्या जानते हैं, बजाय इसके की इन्हें बालों पर लगाने से हेयर शाइनी हो जाते हैं! इसलिए आज हम आपको इन दोनों तेलों के कई फायदों के बारे में बताने वाले हैं। आइए पहले तिल के तेल के बारे में थोड़ा जानें। बता दें कि यह मूल रूप से भारत का है और गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जाता है। तिल का तेल इसके बीजों को दबाकर निकाला जाता है।

तिल के तेल में पामिटिक एसिड, ओलिक एसिड, लिनोलिक एसिड, लिनोलेनिक एसिड, गोंडोइक एसिड, बेहेनिक एसिड, स्टीयरिक एसिड और एराकिडिक एसिड होते हैं। इसमें सेसामोलिन, सेसामिनोल और सेसामिन की अच्छी-खासी मात्रा होती है। सेसामोल तेल को स्थिरता देता है। इसमें तिल के लिग्नन्स भी होते हैं। वहीं सरसों के तेल की बात करें तो यह ब्रैसिका नाइग्रा (Brassica nigra) पौधे के बीजों से मिलता है। इसकी खेती भारत, चीन, कनाडा और इंग्लैंड में की जाती है। इसमें एराकिडिक, बेहेनिक, लिनोलिक, लिनोलेनिक, ओलिक, पामिटिक, इरुसिक, लिग्नोसेरिक और मिरिस्टिक एसिड होते हैं।आइए, इन तेलों में पाए जाने वाले तत्वों और इनके फायदों के बारे में जानते हैं।

तिल का तेल बालों पर लगाने के फायदे

एंटी इंफ्लामेटरी गुण- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार तिल के तेल में मौजूद लिग्नन्स में एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जो स्कैल्प में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट असर- तिल के तेल में सेसामोलिनोल और सेसामिनोल जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।

UV-से होने वाला नुकसान- स्टडी से पता चला कि टोकोफेरोल + टोकोट्रिएनोल + सेसामिन एक्सट्रैक्ट ने यूवी (UV) किरणों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर दिया। यह बालों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे बालों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

एंटीबैक्टीरियल गुण- तिल के तेल में एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं जो स्कैल्प में फंगस और बैक्टीरिया के बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं।

मॉइस्चराइजिंग एजेंट- यह तेल बालों की जड़ों को नमी देता है और रूखेपन को रोकता है। यह स्कैल्प की गहराई तक पहुंचने में सक्षम माना जाता है।

बालों का बढ़ना- क्योंकि तिल का तेल डीपली नरिश करता है और बालों की जड़ों तक पहुंचता है, इसलिए यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे बालों की ग्रोथ बढ़ सकती है>

बालों पर सरसों का तेल लगाने के फायदे

एंटीऑक्सीडेंट गुण-नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार सरसों के तेल में सिस्टीन के साथ-साथ कई अमीनो एसिड होते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं। सिस्टीन शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाता है, जो DNA और सेल मेम्ब्रेन को नुकसान पहुंचाते हैं।

सनस्क्रीन का काम कर सकता है- गाढ़ा होने और विटामिन E की अधिक मात्रा के कारण, इसे ऊपर से लगाने पर यह तेज यूवी किरणों से बचा सकता है।

एंटीफंगल गुण- सरसों का तेल बालों में T. mentagrophytes फंगस को लगने से काफी हद तक रोकता है, लेकिन फंगस के खिलाफ यह नारियल और आंवला तेल की तुलना में कम असरदार है।

एंटीमाइक्रोबियल गुण- इसमें अधिक मात्रा में एंटीमाइक्रोबियल पाए जाते हैं। यह असर फिनोल, फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स, स्टेरोल्स और टेरपीन्स की मौजूदगी के कारण हो सकता है, जो इसके एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

डिस्क्लेमर: स्टडी में दोनों तेलों के फायदों को बखूबी बताया गया है। लेकिन आजकल केमिकल के बढ़ते इस्तेमाल के कारण नेचुरल चीजें भी हर किसी को सूट नहीं कर रही हैं। इसलिए बालों पर कोई भी तेल लगाना शुरू करने से पहले स्किन या हेयर केयर डॉक्टर से जरूर परामर्श लें।