गर्मियों में स्किन पर दिखने वाले इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, बन सकती है गंभीर परेशानी
क्या गर्मियां आते ही आपकी स्किन भी बहुत ही ज्यादा खुदलीदार या डल हो जाती है? अगर हां तो आइए डॉक्टर से जानते हैं कि इसे कैसे ठीक किया जाए।
Summer Skin Care Tips: गर्मियां हमारी स्किन के लिए बहुत ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है। इस दौरान बढ़ता तापमान, पसीना, प्रदूषण और लंबे समय तक धूप में रहना अक्सर त्वचा संबंधी कई तरह की चिंताओं को ट्रिगर करता है। जबकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो गर्मियों में चकत्ते, खुजली या टैनिंग को अस्थायी मौसमी समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे में डर्मालाइफ के निदेशक और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव गर्ग मानते हैं कि कुछ लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वे इंटरन स्किन डैमेज या इंफेक्शन का संकेत दे सकते हैं।
वह बताते हैं कि गर्मियों से संबंधित सबसे आम चिंताओं में से एक है स्किन का बहुत ही ज्यादा ऑयली और पीसीनेदार होना। जब पसीना हमारी स्किन लेयर पर सीबम, गंदगी और बैक्टीरिया के साथ मिल जाता है, तो यह पोर्स को बंद कर सकता है और मुंहासे ब्रेकआउट, फॉलिकुलिटिस और बैक्टीरियल इंफेक्शन को ट्रिगर कर सकता है। आइए हम गर्मियों में होने वाली कई स्किन प्रोबल्म्स के बारे में जानते हैं।
गर्मी की वजह से स्किन पर क्या समस्याएं होती हैं?
डॉक्टर बताते हैं कि दर्दनाक पिंपल्स, मवाद से भरे धक्कों या चेहरे, पीठ या छाती पर लगातार रेडनेस को सामान्य गर्मी के स्किन रिएक्शन के रूप में देखे जा सकते हैं। अगर इन्हें ठीक किए बिना छोड़ दिया जाता है, तो ये सिचुएशन बहुत खराब हो सकती हैं और पिग्नेंटेशन या निशान पैदा कर सकती हैं।
स्किन समस्याएं कब बढ़ती हैं?
कभी-कभी खुजली, जलन या लाल चकत्ते ऐसे रह जाते हैं कि कोई ध्यान नहीं देता। गर्मी में नमी बढ़ जाए तो फंगस को फैलने का मौका मिल जाता है, खासकर जहां त्वचा सिकुड़ती है जैसे गर्दन, बगल, कमर या जांघों के बीच। डॉक्टर कहते हैं कि इन छिपे हुई जगहों पर इंफेक्शन आसानी से टिक जाता है और फिर ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है।
दवाखाने से मिलने वाली क्रीम या घर के तरीके बाहरी निशान तो ढक लेते हैं, पर अंदर से समस्या बढ़ सकती है और तेज हो जाती है। असली दिक्कत तब शुरू होती है जब इलाज गलत होता है। ऐसे में फंगस और गहरा हो जाता है, ठीक होने में दिक्कत होने लगती है।
धूप में रहना बन सकता है बड़ी मुसिबत
धूप में घंटों रहना गर्मियों में कई बार त्वचा के लिए मुसीबत बन जाता है। स्किन टोन का डार्क होना या टैन होना सिर्फ त्वचा का रंग बदलने तक ही सीमित नहीं है, यह UV किरणों के चलते होने वाला बड़ा नुकसान का संकेत भी हो सकता है। अगर बाहर जाते वक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं होता, तो त्वचा कमजोर पड़ने लगती है।
उदाहरण के तौर पर, झुर्रियां जल्दी आ सकती हैं, धब्बे फैल सकते हैं या सूरज से अचानक रिएक्शन आ सकता है। कभी-कभी त्वचा पर काले धब्बे दिखते हैं, छिलके उठते हैं, जलन होती है। एकदम अचानक से त्वचा संवेदनशील हो सकती है या दहन जैसा अहसास हो सकता है। ऐसे बदलावों को डर के बजाय डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाकर समझना जरूरी है।
गर्मियों में स्किन की कौन सी समस्याएं पैदा होती हैं?
डॉक्टर बताते हैं कि गर्मियों में एक्जिमा, रोसैसिया, सोरायसिस या सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस जैसी पुरानी त्वचा समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं। पसीने की मात्रा बढ़ जाती है, इसलिए झुलसाहट का एहसास होता है, फिर लक्षण बिगड़ने लगते हैं। इस झुलसाहट से सूजन उठ सकती है, शरीर भारीपन महसूस करने लगता है। घबराहट बढ़ने पर त्वचा पर पानी की कमी दिखाई देती है।
क्या कहते हैं स्किन एक्सपर्ट
डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार रोकथाम और शुरूआती देखभाल बहुत ही ज्यादा जरूरी है। एक माइल्ड क्लींजर का उपयोग करना, स्वच्छता बनाए रखना, हाइड्रेटेड रहना, सांस लेने वाले सूती कपड़े पहनना और एसपीएफ 30 या स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना स्किन प्रोटेक्शन में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: सबसे जरूरी बात यह है कि लगातार खुजली, चकत्ते, रंजकता या संक्रमण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर चिकित्सा ध्यान देने से त्वचा की मामूली चिंताओं को अधिक गंभीर त्वचा संबंधी स्थितियों में विकसित होने से रोका जा सकता है। अगर आपको ऐसे भी लक्षण दिखते हैं तो तुरंत स्किन एक्सपर्ट के पास जाएं।