
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 9, 2024 5:11 PM IST
Cracked Heels Home Remedies:गर्मियों का मौसम आने के साथ ही स्किन पर इसका असर दिखायी देता है। चेहरे, गर्दन और हाथों की स्किन पर गर्मियों की धूप अधिक पड़ती है क्योंकि, शरीर के ये हिस्से धूप के सम्पर्क में अधिक आते हैं। स्किन ड्राई, रफ और डार्क होने के अलावा गर्मियों में पुरानी स्किन प्रॉब्लम्स (skin problems in summers) बढ़ जाने का भी रिस्क बढ़ जाता है। इसीलिए, लोगों को अपनी स्किन का खास ख्याल भी रखना पड़ता है। लेकिन, गर्मियों में पैरों की स्किन भी प्रभावित होती है। इससे पैरों की स्किन सख्त होने लगती है और एड़ियों की स्किन फटने (Fati adiyan) जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। अगर गर्मियों में आपकी एड़ियां भी फटने लगती हैं तो आप ये घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं। (Home remedied to treat cracked heels in hindi)
गर्मियों में एड़ियों की स्किन सख्त हो जाती है और स्किन फटने लगती है। इससे एड़ियों में दर्द भी हो सकता है। इस तकलीफ से आराम पाने के लिए आप शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। थोड़े-से दूध में शहद(Honey with milk) मिक्स करें और फटी एड़ियों पर अप्लाई करें। शहद में एंटीबैक्टेरियल तत्व होते हैं जो इंफेक्शन का रिस्क (risk of infection) कम करते हैं। दूध स्किन की डीप क्लिंजिंग करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है।
रात में सोने से पहले अपने पैरों में शहद और दूध का मिश्रण लगाएं। अगले दिन सवेरे पैरों को पानी से साफ करें।
एड़ियों की रफ स्किन को सॉफ्ट बनाने और फटी एड़ियों के इलाज के लिए आप देसी घी से एड़ियों की मालिश कर सकते हैं। घी एक नेचुरल मॉइस्चराइजर है जो स्किन को पोषण देता है और उसे सॉफ्ट बनाता है। पैरों को सॉफ्ट और हेल्दी बनाने के लिए घी से फुट मसाज (Ghee foot massage) भी किया जाता है।
सोने से पहले पैरों को साबुन और गुनगुने पानी से साफ करें। फिर तौलिए से पोंछकर पैरों को सूखने दें। अब थोड़ा-सा देसी घी गर्म करें और इससे एड़ियों की मालिश करें। रात भर के लिए इसे पैरों पर लगा रहने दें।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।