
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 8, 2022 2:31 PM IST
Effects of mobile radiation on Skin: मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी या ‘ब्लू लाइट’ हमारी आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसी तरह विभिन्न रिसर्च और स्टडीज में यह भी पाया गया है कि यह नीली रोशनी हमारी स्किन को भी नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन, अधिकांश लोगों को इस बात को गम्भीरता से नहीं लेते और कुछ लोगों को ब्लू लाइट रेडिएशन के गम्भीर परिणामों के बारे में जानकारी नहीं है। यहां इस लेख में पढ़ें कि ब्लू रेडिएशन को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक लोगों को चेतावनी क्यों देते हैं और क्या हैं रेडिएशन से आंखों और त्वचा को होने वाले नुकसान? (Effects of mobile radiation on Skin In Hindi )
सभी प्रकार के मोबाइल फोन्स, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में सिग्नल टॉवर के साथ संपर्क बनाने के लिए एंटेना लगा हुआ होता है। इन एंटेना से विकिरण या रेडिएशन उत्सर्जित होता है, जो इनके इस्तेमाल के समय त्वचा के सम्पर्क में आकर उसे नुकसान पहुंचाते हैं। फोन से निकलने वाली इन रोशनी की किरणों का रंग नीला या ब्लू होता है। ब्लू लाइट रेडिएशन (Blue Light Radiation) से त्वचा को किस तरह नुकसान पहुंच सकता है इसी के बारे में कुछ जानकारियां दी तात्सा-स्किनकेयर मेड सिंपल की सह-संस्थापक नम्रता बजाज, जिन्होंने बताया कि ब्लू लाइट रेडिएशन से स्किन को किस तरह से नुकसान हो सकते हैं और स्किन को ब्लू लाइट रेडिएशन के डैमेज से सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है।
नम्रता बजाज के अनुसार, ब्लू लाइट रेडिएशन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होता है। इसीलिए, कम्प्यूटर या मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय हमारी त्वचा इस रेडिएशन के सीधे सम्पर्क में आ सकती है। रोशनी की किरणें में प्रवेश कर खुजली की समस्या बढ़ा सकती हैं। इससे स्किन बहुत अधिक ड्राईहो सकती है और स्किन की रंगत भी बदल सकती है। ब्लू रेडिएशन के कारण स्किन का रंग काला या लाल होने लगता है और स्किन टोन गम्भीर स्तर पर खराब हो सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों उपकरणों या सूरज से निकलने वाले विकिरण से स्किन पर टैनिंग बेड बन जाते हैं। यूवी किरणों के अधिक संपर्क में आने से स्किन टिश्यूज की आंतरिक परत को नुकसान पहुंचता है, जिससे, समय से पहले स्किन बूढ़ी दिखायी दे सकती है और स्किन पर एजिंग साइंस जैसे-झुर्रियां, डार्क स्पॉट्स और फाइन लाइंस दिखायी देने लगती हैं।
जब हमारी त्वचा हमारे आस-पास के वातावरण को नापसंद करती है, तो यह अलग-अलग तरीकों से उसी को दिखाती है। ब्रेकआउट पर्यावरण के कारण देखी जाने वाली आम समस्याओं में से एक है।
रेडिएशन और नीली रोशनी के कारण होने वाली त्वचा की सभी तरह की क्षति को त्वचा रंजकता कहा जाता है, जो त्वचा की सबसे अधिक परेशान करने वाली स्थिति होती है। त्वचा की रंजकता एक ऐसी स्थिति है, जहां त्वचा पर चारों ओर काले धब्बे बन जाते हैं।
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, त्वचा की संवेदनशीलता भी बढ़ती है। यह हमारी त्वचा को स्थायी तौर पर नुकसान पहुंचाती है। त्वचा कभी लाल हो जाती है या पूरी शुष्क। त्वचा जितनी संवेदनशील होती है, हवा के हानिकारक कणों से लड़ने की संभावना उतनी ही कम होती है।
(आईएएनएस)