pH Level: क्या होता है pH लेवल, जानें साबुन खरीदने से पहले पीएच लेवल जांचना क्यों है ज़रूरी

साबुन खरीदते समय अब लोग एक और बात का विशेष ध्यान रखते हैं जो है पीएच लेवल। साबुन का पीएच लेवल उसकी गुणवत्ता का एक पैमाना माने जाने लगा है। आइए जानते हैं क्या है पीएच लेवल। (pH Level of Soap)

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : January 27, 2021 3:28 PM IST

pH Level of Soap: साबुन से नहाने से शरीर पर जमा गंदगी, धूल और पसीना के साथ बैक्टेरिया भी खत्म हो जाते हैं। जिससे, शरीर निरोगी बनता है।  बाजार में अलग-अलग प्रकार के साबुन उपलब्ध हैं जो आपकी ज़रूरत के हिसाब से आपके काम आ सकते हैं। लोगों की स्किन टाइप, मौसम और स्किन प्रॉब्लम्स से राहत दिलाने वाले विशेष वेरायटी के साबुन बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। मेडिकेटेड, एंटी-सेप्टिक और विटामिन ई वाले साबुनों को सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है। वहीं, साबुन खरीदते समय अब लोग एक और बात का विशेष ध्यान रखते हैं जो है पीएच लेवल। साबुन का पीएच लेवल उसकी गुणवत्ता का एक पैमाना माने जाने लगा है। आइए जानते हैं क्या है पीएच लेवल। (pH Level of Soap)

क्या होता है पीएच लेवल?

pH लेवल का मतलब है पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन ( Potential of Hydrogen), यह एक मानक है जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि साबुन एसिडिक या ऐल्कलाइन है या नहीं।  जैसा कि हमारा शरीर  स्वस्थ रहने के लिए एसिड्स का संतुलन नैचुरली बनाता है। त्वचा के साथ-साथ शरीर का हर अंग पीएच लेवल से प्रभावित होता है और पीएच लेवल के आधार पर ही स्किन की हेल्थ अच्छी या कमज़ोर बनती है।

एक स्वस्थ निरोगी शरीर में पीएच लेवल 7.35 से 7.40 तक रहता है, जो कि बायोलॉजिकल प्रेशर के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन, जब यह स्तक 7.35 के नीचे चला जाता है तो शरीर एसिडिक बन जाता है। वहीं, 7.44 के ऊपर का स्तर बहुत ऐल्कलाइन माना जाता है।

साबुन का पीएच लेवल क्यों है ज़रूरी?

हमारी स्किन का नैचुरल पीएच लेवल 5.4 से 5.9 के बीच होता है। इससे, त्वचा पर मौजूद बैक्टेरिया और अन्य नैचुरल रसायनों का स्तर ठीक रहता है। साबुन चुनते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि साबुन का पीएच लेवल 5 से 7 के बीच हो। क्योंकि, इससे अधिक  पीएच लेवल स्किन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अधिक पीएच लेवल से त्वचा संबंधी ये समस्याएं हो सकती हैं।

  • स्किन ड्राई हो सकती है।
  • त्वचा की ऊपरी परत की रंगत बदल जाती है।
  •  त्वचा में मौजूद नैचुरल ऑयल कम होने लगते हैं जिससे, समय से पहले स्किन बूढ़ी दिखने लगती है।
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