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स्किन टोनर से जुड़े इन 5 मिथ पर कभी न करें विश्वास, फायदे की जगह होगा स्किन को नुकसान

टोनर में अल्कोहल नहीं होता है और ये चेहरे को गोरा बनाने के साथ-साथ सुखदायक इंग्रीडियंट्स से भरे होते हैं, जो आपकी त्वचा में संतुलन, हाइड्रेशन और आपकी स्किन को शांत करने का काम करते हैं। हालांकि टोनर से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आपको छुटकारा पाने की आवश्यकता है!

मौजूदा वक्त में टोनर चेहरे पर लालपन और ड्राईनेस पैदा करने वाले चीजों में से एक नहीं है। दरअसल टोनर में अल्कोहल नहीं होता है और ये चेहरे को गोरा बनाने के साथ-साथ सुखदायक इंग्रीडियंट्स से भरे होते हैं, जो आपकी त्वचा में संतुलन, हाइड्रेशन और आपकी स्किन को शांत करने का काम करते हैं। हालांकि लोगों के बीच में टोनर को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं, जिनकी सच्चाई जानना आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। इस लेख में हम आपको टोनर से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आपको छुटकारा पाने की आवश्यकता है! तो आइए जानते हैं टोनर से जुड़ी कुछ सच्चाईयां।

मिथः टोनर स्किन को बहुत रूखा बना देते हैं

अगर आप बिना ड्राई एल्कोहल वाला टोनर चुनते हैं, तो यह आपकी स्किन के लिए काफी संतुलन वाला और मॉइस्चराइजिंग टोनर हो सकता है। कई प्रकार के अच्छे टोनर हैं, जो इन दिनों बाजार में उपलब्ध हैं। अगर आपको टोनर के इस्तेमाल के बाद तंग, असहजता महसूस हो रही है तो ये टोनर में मौजूद एल्कोहल के कारण होता है। दरअसल ये त्वचा की नमी को दूर कर देता है, जिसके कारण त्वचा का पीएच स्तर खराब हो जाता है। इन सब चीजों के कारण आपके चेहरे पर लंबे वक्त तक ऑयलीनेस रहती है और नमी की कमी हो जाती है ।

मिथः अगर आप क्लीन्जर का उपयोग करते हैं, तभी करें स्किन टोनर का प्रयोग

टोनर स्किन को साफ करने के बाद एक बीच का स्टेप होता है ताकि आप अपनी स्किन को सीरम और मॉइस्चराइजर जैसे अन्य उत्पादों के लिए तैयार कर सकें। एक टोनर वह काम कर सकता है जो एक क्लींजर पूरी तरह से नहीं कर सकता है। यह आपके चेहरे पर बचे तेल, किसी भी प्रकार की गंदगी, प्रदूषण या बैक्टीरिया को हटा सकता है। हालांकि टोनर का उपयोग क्लीन्जर के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें इमल्सीफाइंग गुण नहीं होते हैं जो क्लीन्जर में नहीं होते हैं।

टोनर में कठोर गुण होते हैं

टोनर वास्तव में चेहरे पर सूजन लाने वाले कारणों को हटाने का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका हो सकता है। इसलिए आपको अपनी स्किन पर स्क्रब का उपयोग करने के बजाय एक जेंटल रासायनिक एक्सफोलिएटर के रूप में टोनर का उपयोग करना चाहिए। अगर आपकी त्वचा पर अत्यधिक तेल को नियंत्रित करने की आवश्यकता हो तो सैलिसिलिक एसिड या एक ग्लाइकोलिक एसिड टोनर अद्भुत काम करता है। ढीली होती त्वचा के लिए, पॉलीहाइड्रोक्सी एसिड टोनर का उपयोग करें। शुष्क त्वचा के लिए, लैक्टिक एसिड-आधारित टोनर का उपयोग करें, जो त्वचा को शांत करने में मदद करेगा और स्किन को हाइड्रेट भी करेगा।

टोनर छिद्रों को सिकोड़ता हैं

छिद्र खुले और बंद होने वाले दरवाजों की तरह बिल्कुल नहीं होते हैं, इसलिए आप व्यावहारिक रूप से उन्हें छोटा नहीं कर सकते हैं या फिर इनका आकार नहीं बदल सकते हैं। हालांकि, आपके रोम छिद्र बंद होने की संभावना है। इसलिए साफ छिद्र छोटे हैं। यह वह जगह है जहां टोनर की भूमिका सबसे ज्यादा अहम होती है। एसिड-आधारित टोनर सेल टर्नओवर में सुधार करने और गंदगी, मेकअप और तेल अवशेषों को साफ करने के लिए उन्हें अवशोषित करने में सक्षम होते हैं।

सेंसेटिव स्किन वालों को नहीं उपयोग करने चाहिए टोनर

टोनर काफी हल्के होते हैं और इसलिए वे आपकी त्वचा में बहुत अच्छी तरह से अंदर तक चले जाते हैं। अगर आपकी स्किन सेंसेटिव है, तो ऐसे टोनर का विकल्प चुनें जिसमें त्वचा को शांत करने वाले तत्व हों। अपने टोनर में कैमोमाइल और पंथेनॉल जैसी सामग्री को चुनें। इस प्रकार के टोनर पीएच स्तर को संतुलित करेंगे और आपकी त्वचा को हाइड्रेट करेंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दिन में दो बार किया जा सकता है। एक टोनर में अन्य सामग्री ग्लिसरीन, एलोवेरा और गुलाब जल शामिल हो सकता है।

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