... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : September 20, 2018 10:44 AM IST
बरसाेें पुरानी इस भारतीय औषधि के प्रभाव का नए शोध में हुआ खुलासा। © Shutterstock
चंदन का तेल बरसों से औषधि के रूप में प्रयुक्त होता रहा है। यह भारतीय निधि बरसों से अलग-अलग तरह से अपना कमाल दिखती रही है। अव चिकित्सा जगत में हो रहे शोध भी यह मान रहे हैं कि चंदन बहुत काम का है। इसके तेल की अगर छह दिन मालिश की जाए तो यह तुरंत असर दिखाने लगती है।
क्या कहता है शोध
शोधकर्ताओं के मुताबिक चंदन के तेल की खुशबू बालों की जड़ों में मौजूद ‘ओआर2एटी4’ नाम के ‘स्मेल रिसेप्टर’ को सक्रिय करती है। ये रिसेप्टर नए बाल उगाने में सक्षम ‘केराटिन’ प्रोटीन का उत्पादन बढ़ा देते हैं। इससे छह दिन के भीतर ही गंजे सिर पर नए बाल दिखने शुरू हो जाते हैं। नया अध्ययन गंजेपन के इलाज में ज्यादा असरदार दवाओं के निर्माण की उम्मीद जगाता है।
सुगंध करती है कमाल
मुख्य शोधकर्ता डेविड रीच ने कहा, इंसान और जानवर भले ही सिर्फ नाक से सूंघने की क्षमता रखते हैं, लेकिन उनके बालों की जड़ें, त्वचा, शुक्राणु और आंत भी चुनिंदा सुगंध में मौजूद रसायनों के संपर्क में आने पर सक्रिय हो जाती हैं। कुछ अध्ययनों में चंदन के तेल को त्वचा में मौजूद ‘केराटिन’ का उत्पादन बढ़ाने में कारगर करार दिया गया है, जिससे जख्म जल्दी भर पाते हैं।
ऐसे किया अध्ययन
रीच और उनके साथियों ने 38 से 69 साल के दर्जनों पुरुषों के सिर की त्वचा के ऊतक लिए। उन्हें छह दिन के लिए चंदन की खुशबू के संपर्क में रखा। इससे ऊतकों में ‘केराटिन’ प्रोटीन का स्तर बढ़ने लगा। साथ ही नए बाल के विकास में मददगार कई विटामिन और हार्मोन भी सक्रिय हो गए। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।
यह भी पढ़ेें - बेकार न समझिए, खूबसूरती के बहुत काम का है कद्दू
केराटिन को रखे सुरक्षित
अध्ययन में यह भी देखा गया कि चंदन का तेल ‘एपॉपटोसिस’ की क्रिया पर लगाम लगाता है। यह उन जीन की क्रिया को बाधित करता है, जो ‘केराटिन’ की कोशिकाओं को आत्महत्या करने के लिए उकसाते हैं।
यह भी पढ़ेें - इनमें से किसी एक चीज से करें दिन की शुरूआत, मूड रहेगा अच्छा
ये होता है फायदा
बालों की जड़ों में मौजूद ‘स्मेल रिसेप्टर’ हो जाते हैं सक्रिय।
‘केरेटिन’ प्रोटीन का उत्पादन बढ़ाकर नए बाल करते हैं पैदा।
6 दिन में दिखता है असर, गंजेपन के इलाज की उम्मीद जगी।