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क्या सनस्क्रीन लोशन का कोई साइड-इफेक्ट हो सकता है?

सनस्क्रीन खरीदने से पहले इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें।

आप अपने चेहरे, हाथों और शरीर के अन्य खुले भागों पर ढेर सारी सनस्क्रीन लगाती हों। आप जानते हैं कि सूरज की हानिकारक किरणों से आपकी त्वचा की सुरक्षा के लिए बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाना ज़रूरी है। हालांकि, हम जानते हैं कि किसी भी चीज़ (सनस्क्रीन भी) का बहुत अधिक इस्तेमाल आपकी त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है।

हमने बात की जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर ऑफ डर्मटॉलजी, डॉ. आई. के. रामचंदानी से हैं। जानें उन्होंने क्या कहा, 'आमतौर पर, सनस्क्रीन का कोई साइड-इफेक्ट्स नहीं होता और इसका मुख्य कार्य धूप की यूवीए और यूवीबी किरणों के हानिकारक प्रभावों से आपकी त्वचा की रक्षा करना है। इसीलिए धूप में जाने से पहले सनस्क्रीन लगाएं। हालांकि, अगर आपको बार-बार पिम्पल होने की समस्या होती है तो सनस्क्रीन के लेबल पर ध्यान से पढ़ें कि उसके उत्पादन में किसी ऐसे तत्व का इस्तेमाल न किया गया हो जिससे आपको एलर्जी हो जाती है। ज़ाहिर ऐसे किसी विशेष उत्पाद के अधिक इस्तेमाल से पिम्पल होना शुरु हो जाएगा। अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो अपने लिए सनस्क्रीन लेने से पहले अपने डर्मटॉलजिस्ट से बात करें।'

आमतौर पर सनस्क्रीन के उत्पादन में टाइटेनियम डाइऑक्साइड (titanium dioxide-TiO2), काओलिन (kaolin), टैल्क, ज़िंक ऑक्साइड (zinc oxide-ZnO), कैल्शियम कार्बोनेट (calcium carbonate) और मैग्नीशियम ऑक्साइड (magnesium oxide) का इस्तेमाल होता है। इसी तरह नए रासायनिक यौगिक, जैसे- बीमोट्रियाजिनाल (bemotrizinol), एवोबेनज़ोन (avobenzone), बिसोक्टोजोल(bisoctizole), बेंजोफेनोन-3 (benzophenone-3 (BZ-3, oxybenzone), और ऑक्ट्रोक्रिलीन (octocrylene) और ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एजेंट का भी इसमें इस्तेमाल होता है। प्रयोगात्मक मॉडल और आउटडोर सेटिंग्स, दोनों स्तर पर यह धूप के खिलाफ काम करते हैं। कोई सनस्क्रीन कितनी अच्छी तरह काम करता है, यह उसमें इस्तेमाल होनेवाले घटकों की संरचना और ताकत पर निर्भर करता है।

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हालांकि, यदि आपको किसी कॉस्मेटिक कंपाउंड से एलर्जी नहीं हैं तो आप एसपीएफ़30 वाला कोई सनस्क्रीन लगा सकते हैं। 'स्टडीज़ से पता चला है कि भारतीय त्वचा के लिए एसपीएफ़30 का सनस्क्रीन एक उपयुक्त विकल्प है। डॉ. रामचंदानी कहते हैं कि, ‘अगर आप अधिक एसएसपी वाले सनस्क्रीन खरीदना चाहते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन इससे कोई फायदा तो होगा नहीं उल्टे आपके पैसे ज़रूर खर्च होते रहेंगे।

कुछ सनस्क्रीन आपके चेहरे और हाथों की त्वचा को शुष्क और बेजान बना सकते हैं। डॉ. रामचंदानी कहते हैं कि, 'ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनमें कुछ तत्व ऐसे भी होते हैं जो आपकी त्वचा की नमी चुरा लेते हैं। सनस्क्रीन लगाने से पहले अपनी त्वचा पर मॉइस्चराइज़र का एक कोट लगाएं। इससे आपकी त्वचा को मॉइस्चराइज़्ड रखने में मदद मिल सकती है।’

चूंकि सनस्क्रीन का काम आपकी त्वचा को अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाना है। कभी-कभी यह विटामिन डी के अवशोषण में भी रुकावट ला सकता है। डॉ. रामचंदानी के अनुसार,' वो लोग जिनके शरीर में विटामिन डी की कमी है, उनकी तकलीफ बढ़ने का एक कारण यह भी हो सकता है। लेकिन विटामिन डी से समृद्ध सूरज की किरणें इस कमी को पूरा करने में मदद नहीं करेंगे। 15 दिनों में एक बार विटामिन डी की गोलियां लेने से आपको काफी फायदा होगा।'

इन सबके अलावा, सनस्क्रीन लगाने के और कोई गंभीर प्रभाव नहीं होते।

संदर्भ:

[1] Latha, M. S., Martis, J., Shobha, V., Shinde, R. S., Bangera, S., Krishnankutty, B., … & Kumar, B. N. (2013). Sunscreening agents: a review. The Journal of clinical and aesthetic dermatology, 6(1), 16.

Image source: Shutterstock

Read this in English.

अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत-Getty Images

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