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Medically Verified By: Dr. Karuna Malhotra
Kya Bimari Se Baal Jhadna Normal Hai: कुछ बालों का झड़ना आम बात हो सकती है, लेकिन अधिक बालों का झड़ना ध्यान देने योग्य होता है। कई महिलाएं इसे 'होता है' कहकर टाल देती हैं। कभी कभी हेयर फॉल के पीछे कुछ बीमारियां भी होती है। हमारे कहना का तात्पर्य यह है कि 2019 के बाद पोस्ट कोविड और अन्य वायरल फीवर जैसी गंभीर बीमारियां हमारे बालों के झड़ने का कारण बन रही हैं।
लेकिन क्या किसी बीमारी से हेयर फॉल होना सामान्य है? यह सवाल उन महिलाओं और पुरुषों के मन में अधिक आता है तो किसी बीमार से पीड़ित हुए हों या फिर ऊभरे हों। आप तक सही और सटीक जानकारी पहुंचे, ताकि आप मिथकों के चक्कर में पड़कर कोई गलती न करें। इसलिए हमने नई दिल्ली स्थित कॉस्मेटिक स्किन एंड होमो क्लिनिक की फाउंडर, कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर करुणा मल्होत्रा से बातचीत की।
उन्होंने इस विषय पर आधारित जानकारी साझा की जैसे ‘क्या पोस्ट-कोविड और वायरल फीवर जैसी बीमारी के बाद बाल झड़ना नॉर्मल है?’,‘बीमारियां बालों को कैसे प्रभावित करती हैं?’ और ‘बाल झड़ना कब शुरू होता है और कब तक चलता है?’ आदि-आदि। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि डॉक्टर मल्होत्रा ने क्या जानकारी दी।
डॉक्टर ने पूछे गए इस सवाल का जवाब हां में देते हुए बताया कि 'हां, पोस्ट-कोविड या किसी भी गंभीर वायरल फीवर के बाद बालों का झड़ना काफी हद तक नॉर्मल माना जाता है।' किसी शारीरिक या भावनात्मक तनाव, बीमारी, सर्जरी, हार्मोनल बदलाव या पोषण की कमी के कारण बालों के झड़ने को टेलोजेन एफ्लुवियम कहा जाता है।
लेकिन यह समस्या कुछ समय बाद ठीक हो जाती है। डॉक्टर करुणा मल्होत्रा के अनुसार 'तेज बुखार, शरीर में सूजन, दवाइयां और मानसिक तनाव बालों के ग्रोथ साइकिल को अस्थायी रूप से प्रभावित करते हैं। इसमें बाल जड़ से कमजोर होकर झड़ते हैं, लेकिन यह स्थायी समस्या नहीं होती।'
आपने मन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिल बीमारियां हमारे बालों को कैसे प्रभावित करती हैं, कि एक्सेसिव हेयर फॉल शुरु हो जाता है! इस सवाल को लेकर डॉक्टर बताती हैं कि 'बीमारी के दौरान शरीर की प्राथमिकता जीवन-रक्षक अंगों पर चली जाती है।' वह आगे बताती हैं कि 'ऐसे समय में बालों को मिलने वाले पोषक तत्व कम हो जाते हैं। तेज बुखार, इंफ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और पोषण की कमी के कारण बाल एनाजेन फेज से निकलकर टेलोजेन फेज में चले जाते हैं, जिससे कुछ महीनों बाद अचानक हेयर फॉल बढ़ जाता है।

आमतौर पर बीमारी ठीक होने के 2–3 महीने बाद बाल झड़ना शुरू होता है। डॉक्टर मल्होत्रा के अनुसार यह झड़ना 3 से 6 महीने तक चल सकता है। कई लोगों को लगता है कि बीमारी अभी-अभी हुई है, फिर भी बाल क्यों झड़ रहे हैं। इसका कारण यही देरी वाला हेयर साइकिल बदलाव है। सही देखभाल से हेयर फॉल की प्रक्रिया अपने आप रुक जाती है।
नहीं, टेलोजेन एफ्लुवियम से स्थायी गंजापन नहीं होता। डॉक्टर करुणा स्पष्ट करते हुए कहती हैं कि इसमें बालों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं। बाल झड़ते जरूर हैं, लेकिन नई ग्रोथ भी साथ-साथ शुरू हो जाती है। हालांकि, अगर पहले से जेनेटिक हेयर लॉस, थायराइड या आयरन की कमी हो, तो बाल पतले दिख सकते हैं। इसलिए कारण जानना जरूरी है।
रिकवरी के लिए संतुलित डाइट, प्रोटीन, आयरन, जिंक, बायोटिन, अच्छी नींद और तनाव कम करना जरूरी है। डॉक्टर कहती हैं कि अगर बालों का झड़ना 6 महीने से ज्यादा चले, स्कैल्प में दर्द हो, या पैच में बाल गिरें, तो डॉक्टर से जरूर मिलें। सही जांच और समय पर इलाज से बालों की ग्रोथ फिर सामान्य हो सकती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।