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Chehre Par Aging Sign Kaise Aate Hain: आज किसी बड़े शहर से गुजरते समय चारों ओर सिर्फ धूल भरा कोहरा दिखाई पड़ता है। शहरी स्मॉग (प्रदूषण) दरअसल कई रसायनों का एक जटिल मिश्रण होता है। यह मिश्रण लगातार हमारी त्वचा के संपर्क में आता है और प्रतिक्रिया करता है। इस प्रक्रिया में फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कण निकलते हैं। ये मुक्त कण बाहरी वातावरण से ही, त्वचा के भीतर उम्र बढ़ने, बुढ़ापे के लक्षणों की प्रक्रिया को सामान्य से कहीं ज्यादा तेज कर देते हैं। शहर की हवा में कई हानिकारक तत्व होते हैं। इनमें मुख्य रूप से बारीक कण पदार्थ, विशेष रूप से PM2.5 (जो 2.5 माइक्रोन से छोटे कण हैं) शामिल होते हैं। इनके साथ ही हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड और वाहनों के यातायात से जुड़े रसायन, जैसे पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन भी मौजूद होते हैं।
ये कण और गैसें या तो स्वयं रिएक्टिव ऑक्सीजन प्रजातियां या 'प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन प्रजातियां लेकर आते हैं या फिर उन्हें पैदा करते हैं। इन सभी को आमतौर पर फ्री रेडिकल्स यानी मुक्त कण कहा जाता है। ये बहुत अनस्टेबल अणु होते हैं। वे स्थिर होने के लिए दूसरे अणुओं से इलेक्ट्रॉन छीनने की कोशिश करते हैं। इंदौर के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर शीना कपूर का कहना है कि 'वे हमारी त्वचा की कोशिकाओं के अंदर मौजूद वसा (lipids), प्रोटीन और डीएनए से इलेक्ट्रॉन खींच लेते हैं। इलेक्ट्रॉन छीनने की यह प्रक्रिया त्वचा कोशिकाओं के अंदर 'ऑक्सीडेटिव क्षति' (oxidative damage) की एक पूरी श्रृंखला शुरू कर देती है, जिससे त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचता है।' आइए जानते हैं ये पूरी प्रक्रिया क्या है।
त्वचा की बाहरी परत एक मजबूत बैरियर की तरह काम करती है, लेकिन PM2.5 बहुत ही छोटे होते हैं। ये कण छिद्रों, हेयर फॉलिकल्स और पसीने की नलिकाओं (स्वेट डक्ट्स) में बस सकते हैं और एपिडर्मिस की ऊपरी परतों में प्रवेश कर सकते हैं, खासकर अगर त्वचा की कठोर सफाई, अत्यधिक एक्सफोलिएशन या यूवी (UV) किरणों के संपर्क में आने से त्वचा का बैरियर पहले से ही कमजोर हो गया हो।
एक बार जब ये कण त्वचा में जम जाते हैं, तो वे सूजन पैदा करते हैं और त्वचा की प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट प्रणाली, जिसमें विटामिन सी, विटामिन ई, ग्लूटाथियोन और सुरक्षात्मक एंजाइम शामिल हैं, पर दबाव डालते हैं। जैसे-जैसे ये त्वचा की सुरक्षा करने वाले तत्व कम होते जाते हैं, मुक्त कण जमा होने लगते हैं और त्वचा को होने वाला नुकसान बढ़ जाता है।
इस क्षति का एक सबसे बड़ा लक्ष्य कोलेजन होता है। कोलेजन वह प्रोटीन जो त्वचा को दृढ़ और चिकना बनाए रखता है। मुक्त कण ऐसे मार्गों को सक्रिय करते हैं जो मैट्रिक्स मेटालोप्रोटीनेसेस (matrix metalloproteinases) नाम के एंजाइमों को बढ़ाते हैं। ये एंजाइम त्वचा की गहरी परतों में कोलेजन और इलास्टिन (elastin) को तोड़ देते हैं।
इसके साथ ही, ऑक्सीडेटिव तनाव फाइब्रोब्लास्ट्स (fibroblasts) नामक कोशिकाओं की गति धीमी कर देता है। ये कोशिकाएं ताजा कोलेजन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे एक दोहरा प्रभाव पैदा होता है, कोलेजन तेज़ी से टूटता है, जबकि नया कोलेजन बनने की गति धीमी हो जाती है। समय के साथ, यह असंतुलन त्वचा की दृढ़ता (कसाव) में कमी, समय से पहले फाइन साइंस और आखिर में गहरे झुर्रियों का कारण बनता है।
स्मॉग यानी कि धुंध व कोहरे से उत्पन्न फ्री रेडिकल्स कोशिका मेंब्रेन और माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे त्वचा कोशिका की ऊर्जा पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है। यह अधिक कोशिकाओं को सेनेसेंस की स्थिति में धकेल देता है, यह एक ऐसी स्थिति है जहां कोशिकाएं विभाजित होना बंद कर देती हैं और कम कुशलता से काम करती हैं। सेनेसेंट त्वचा कोशिकाएं अधिक सूजन पैदा करने वाले अणु और अधिक कोलेजन को तोड़ने वाले एंजाइम छोड़ती हैं, जिससे आस-पास के ऊतकों को भी नुकसान पहुंचता है। यह लो-ग्रेड सूजन समय से पहले बुढ़ापे के प्रमुख कारणोंमें से एक बन जाती है।
प्रदूषण से होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस त्वचा के रंग को भी प्रभावित करता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से काले धब्बे, पैची पिगमेंटेशन होता है और त्वचा कुल मिलाकर बेजान दिखने लगती है। मुक्त कण मेलानोसाइट्स रंग बनाने वाली कोशिकाओं को अतिरिक्त मेलेनिन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। इसी समय, सूजन पिगमेंट के त्वचा भर में वितरित होने की प्रक्रिया को बाधित करती है। इसका परिणाम यह होता है कि त्वचा का रंग असमान हो जाता है और उम्र के धब्बे अधिक दिखाई देने लगते हैं, खासकर चेहरे के उन हिस्सों पर जो सीधे तौर पर ट्रैफिक प्रदूषण के संपर्क में आते हैं।
जबकि आनुवंशिकी और धूप के संपर्क में आना त्वचा की उम्र बढ़ने के प्रमुख कारण बने हुए हैं, आधुनिक शोध से पता चलता है कि शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों में प्रदूषण अब स्पष्ट रूप से उम्र बढ़ने में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है। वही ऑक्सीडेटिव तनाव (oxidative stress) जो फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचाता है, वह चेहरे को भी चुपचाप प्रभावित करता है, जिससे त्वचा की लोच (elasticity) कम हो जाती है और उम्र से संबंधित परिवर्तनों की उपस्थिति तेज हो जाती है।
प्रदूषित शहरों में त्वचा की सुरक्षा के लिए सिर्फ सनस्क्रीन काफी नहीं है। कणों को हटाने के लिए नियमित रूप से चेहरा साफ करना, मॉइस्चराइजर से त्वचा के बैरियर को फिर से पैदा करना और टॉपिकल (त्वचा पर लगाने वाले) या आहार से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट का उपयोग करने से त्वचा को अपना बचाव करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये उपाय प्रदूषित हवा के निरंतर दबाव का पूरी तरह से मुकाबला नहीं कर सकते हैं। लंबे समय में, चिकनी, स्वस्थ त्वचा बनाए रखने के लिए स्वच्छ शहर, बेहतर उत्सर्जन नियंत्रण (emission control) और वायु-गुणवत्ता के उच्च मानक उतने ही महत्वपूर्ण होंगे जितने कि समग्र स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
नारियल तेल और शहद का मिश्रण, एलोवेरा जेल, और केले का पेस्ट आदि ये सभी चेहरे से झुर्रियां दूर करने में फायदेमंद हैं।
एजिंग के लक्षणों को कम करने के लिए, स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद, और सनस्क्रीन का उपयोग करना महत्वपूर्ण है
40 की उम्र में एंटी-एजिंग, कोलेजन बूस्ट या प्लैटिनम फेशियल सबसे बेहतर होते हैं।
इसके लिए आपको प्रोटीन, विटामिन ए, बी, ई और सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।