
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : November 26, 2025 12:03 PM IST
Medically Verified By: Dr. Dimple Kothari
Pollution Se Scalp Ko Kaise Nuksan Ho Rha Hai: दिल्ली सहित देश के कई राज्यों व शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं रह गया है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण जैसे PM2.5, धुआं, औद्योगिक गैसें और रसायन, सिर की त्वचा (स्कैल्प) पर एक अदृश्य परत बनाकर पोर्स को बंद कर रहे हैं। जो हमें बालों के झड़ने, जिद्दी डैंड्रफ और स्कैल्प इंफ्लेमेशन के रूप में दिख रहा है। जब हमने पॉल्यूशन से स्कैल्प पर होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानने के लिए नारायणा हॉस्पिटल की डर्मेटोलॉजिस्ट और विजिटिंग कंसल्टेंट डॉक्टर डिंपल कोठारी से बात की तो उन्हें बहुत ही गहरी जानकारी शेयर की।
डॉक्टर ने बताया कि 'इस स्थिति को 'स्कैल्प स्ट्रेस' का नया दौर कहा जाता है, एक ऐसा प्रभाव जो धीरे-धीरे बालों को कमजोर कर रहा है और स्कैल्प को बीमार बना रहा है।' इस समस्या को बेहतर तरीके से समझने के लिए एक्सपर्ट ने 5 बड़े कारणों पर खास जोर दिया है। ये कारण कौन से हैं, आइए विस्तार सा जानते हैं।
डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण सिर की त्वचा के प्राकृतिक तेल (सीबम) के साथ मिलकर पोर्स में चिपक जाते हैं। जब पोर्स साफ नहीं होते, तो बालों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इससे हेयर रूट कमजोर होने लगते हैं और बाल गिरने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि यह उसी तरह है जैसे धूल से बंद एयर-फिल्टर अपनी क्षमता खो देता है।
प्रदूषण में मौजूद केमिकल फ्री-रेडिकल्स पैदा करते हैं, जो स्कैल्प की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बालों की ग्रोथ-साइकिल को बाधित करता है। परिणामस्वरूप बाल पतले होने लगते हैं और समय से पहले झड़ने लगते हैं। कई डॉक्टर इसे बालों की उम्र बढ़ने की प्रमुख वजह भी मानते हैं।
हेयर स्पेशलिस्ट बताते हैं कि प्रदूषण स्कैल्प की माइक्रोबायोम यानी कि सिर की त्वचा की प्राकृतिक बैक्टीरिया-बैलेंस प्रणाली को बिगाड़ देता है। जब माइक्रोबायोम असंतुलित हो जाते हैं, तो फंगस, खासतौर पर मालासेजिया- तेजी से बढ़ने लगती है। यही फंगस डैंड्रफ, खुजली और स्कैल्प फ्लेकिंग के प्रमुख कारणों में शामिल है।
लंबे समय तक शहर की हवा में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसें त्वचा की बाहरी परत को इरिटेटिंग बनाती हैं। इससे स्कैल्प पर माइक्रो-इंफ्लेमेशन होता है, जो एक धीमी सूजन है जो बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन बालों की गुणवत्ता को लगातार कमजोर करती है। यही माइक्रो-इंफ्लेमेशन आगे चलकर हेयर थिनिंग का कारणबन सकती है।
जिस तरह पॉल्यूशन इतना बढ़ गया है, ऐसा लग रहा है सारे बाल ही निकल जाएंगे। इसका कारण यह भी है कि प्रदूषण से भरे शहरों में पानी की गुणवत्ता भी बालों की समस्या को बढ़ाती है। हार्ड वॉटर और क्लोरीन मिलकर स्कैल्प को और सूखा या चिपचिपा बनाते हैं। पसीना और प्रदूषक कण आपस में मिलकर एक तरह की गाढ़ी परत बना देते हैं, जो बालों की जड़ों को लंबे समय तक सांस नहीं लेने देती।
फिलहाल पॉल्यूशन में बालों की सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए। डेली केयर शैम्पू, स्कैल्प टॉनिक, नियमित ऑयलिंग और घर लौटकर स्कैल्प की हल्की सफाईजैसी आदतें नुकसान को काफी हद तक रोक सकती हैं। अब जबकि शहरों का AQI कई बार खतरनाक स्तर को पार करता है, स्कैल्प हेल्थ को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी जितनी फेफड़ों की, क्योंकि प्रदूषण सिर की त्वचा तक भी अपनी चुपचाप घुसपैठ कर चुका है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।