Holi Colour: स्किन और बालों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाते हैं होली के रंग, इन टिप्स से करें अपनी केयर
होली में इस्तेमाल किये जाने वाले रंगों में मौजूद रसायन त्वचा में जलन, चकत्ते, एक्जीमा, रूखापन, खुजली, त्वचा के रंग का बदलना, लाल दाने, फुन्सी निकल आना आदि समस्याओं को जन्म दे सकता है।
कुछ खास गहरे रंग जैसे नीला और हरा रंग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है।
Written by Rashmi Upadhyay|Updated : March 24, 2021 1:01 PM IST
होली रंगों का त्योहार है ऐसे में बिना रंग खेले रहें तो होली एकदम अधूरी सी लगती है। अकसर बच्चे, किशोर और युवा जोश में आकर बाजार में उपलब्ध तरह-तरह के कृत्रिम रंग खरीद लाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन कृत्रिम रंगों और गुलाल में केमिकल, मीका, सीसा के छोटे-छोटे चमकीले कण मौजूद होते हैं जो त्वचा के साथ-साथ शरीर के कई अंगों के लिए नुकसानदायक होती है। इतना ही नहीं होली चूँकि हम घर के बाहर खेलते हैं ऐसे में धूप में रहने से भी त्वचा पर हानिकारक प्रभाव होता है। त्वचा के साथ-साथ बाल भी रूखे और बेजान हो जाते हैं।
रंगों से होने वाले नुकसान
रंग खेलते समय कई महत्वपूर्ण बातों पर लोगों का ध्यान नहीं जाता, जिससे त्वचा की गंभीर समस्याएँ शुरू हो जाती हैं। आपकी थोड़ी सी असावधानी आपकी त्वचा, आँखों, बालों और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती हैं। कई रंग ऐसे भी होते हैं, जिनका असर कई दिनों तक कम नहीं होता है और ये एलर्जी पैदा करते हैं। इसलिए होली या तो सूखे रंगों से खेलें या खुद से ही प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल करके इको फ्रेंडली रंग तैयार करें। इससे स्वास्थ्य को कोई नुकसान भी नहीं होगा और होली भी सुरक्षित होगी। रंगों के अधिक प्रयोग से त्वचा रूखी हो जाती है और इन्हीं कारणों से बुहत से रासायन त्वचा की अंदरूनी सतह को नुकसान पहुंंचाते हैं। होली में इस्तेमाल किये जाने वाले रंगों में मौजूद रसायन त्वचा में जलन, चकत्ते, एक्जीमा, रूखापन, खुजली, त्वचा के रंग का बदलना, लाल दाने, फुन्सी निकल आना आदि समस्याओं को जन्म दे सकता है। कई बार त्वचा पर घाव हो जाते हैं और जख्म बढ़कर त्वचा संक्रमण का रूप भी ले सकता है।
कुछ वर्ष पहले होली के लिए प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग होता था, जिससे त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता था। आज बाजार में उपलब्ध रंगों में भारी मिलावट होती है ऐसे में इनका कम से कम प्रयोग करें। हो सके तो खुद ही प्राकृतिक रंग बनाएँ। रंग खरीदने से पहले यह देख लें कि रंग दानेदार व खुरदुरा होने के बजाय पाउडरनुमा हो।
होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल या फिर कोई लोशन ज़रूर लगा लें ताकि किसी प्रकार की एलर्जी न हो।
होली खेलने के तुरंत बाद ही साबुन से चेहरा साफ नहीं करें क्योंकि साबुन क्षारीय (alkaline) होता है जो त्वचा को और रूखा बनाता है। इसके बजाय रंग छुड़ाने के लिए क्लिंजिंग क्रीम, लोशन का प्रयोग बेहतर होगा। रंग छुड़ाने के बाद कैलेमाइन लोशन लगाना चाहिए ताकि त्वचा पर एलर्जी का असर न हो।
यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है तो रंग छुड़ाने के लिए त्वचा को रगड़ें नहीं बल्कि हल्के हाथों से रंग छुड़ाएँ। अधिक रगड़ने से त्वचा पर चिपके हानिकारक कण त्वचा को छिल या काट सकते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है।
होली खेलने से पहले अपने चेहरे, हाथों और शरीर के खुले भागों पर मॉश्चराइजर, सनस्क्रीन लोशन या फिर सरसों का तेल लगाएँ। ये आपको होली के रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों के साथ-साथ धूप के नुकसान से भी बचाएगा।
रंगों के अत्यधिक प्रभाव से बाल रूखे और बेजान तो होते ही हैं सिर की त्वचा पर भी छोटे-छोटे कण चिपक जाते हैं जिससे दाने होने की गुंजाइश बढ़ जाती है। ऐसे में पहले ढेर सारे पानी से बालों को धोएँ और फिर किसी हर्बल शैंपू से बाल साफ करें।
होली के रंग में आपकी सेहत खराब न हो इसके लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें। इससे आपकी त्वचा धूप और कृत्रिम रंग दोनों से बच जाएगी।
यदि सुरक्षित और स्वस्थ होली खेलना चाहते हैं तो सूखे और हल्के रंगों का इस्तेमाल करें। इसके लिए गुलाल बढ़िया विकल्प है।
होठ मुलायम होते हैं लेकिन होली के कृत्रिम रंगों से होठ फट सकते हैं। ऐसे में आपको होंठो पर वैसलीन लगाते रहना चाहिए।
यदि होली खेलने के दौरान रंग आँखों में चला जाता है तो तुरंत ही पानी से आँखों को धोएँ। यदि फिर भी जलन होती है तो डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें। आई ड्रॉप का इस्तेमाल उचित होगा।
हर्बल रंग ही खरीदें क्योंकि ये सेहतमंद होते हैं। अपने दोस्तों को भी इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे हर्बल रंग ही खरीदें। नॉन टॉक्सिक रंग भी बेहतर होता है। यदि जलन हो रही है तो तुरंत ही उस हिस्से को पानी से धोएँ और उस पर क्रीम या कैलामाइन लोशन लगाएँ। चाहें तो ऐलोवेरा जेल भी लगा सकते हैं।
तिल का तेल भी रंग छुड़ाने के लिए बेहतर होता है। इसे त्वचा पर लगा कर मालिश करें, यह रंग के हानिकारक कणों से होने वाले नुकसान से बचा कर त्वचा को सुरक्षा प्रदान करता है।
त्वचा यदि बहुत ज्यादा रूखी हो गई है और जलन भी हो रही है तो होली के दूसरे दिन शहद, चुटकीभर हल्दी और दही मिला कर चेहरे, गर्दन और हाथों पर लगाएँ। शहद त्वचा को मुलायम बनाता है तो दही में सामान्य एसिड-एल्कलाइन संतुलन को बनाए रखने की क्षमता होती है।
बच्चों को गहरे रंगों से दूर रखें क्योंकि उनकी त्वचा संवेदनशील होती है। इससे एलर्जी, दाने, फुन्सी, घाव होने की संभावना बढ़ सकती है।
होली में रंग खेलने में क्या सावधानियां रखें
अच्छी गुणवत्ता वाले रंगों का प्रयोग करें।
परमानेंट रंगों से दूर रहें क्योंकि इनमें डाई होती है।
पानी में घुलनशील रंगों का प्रयोग करें।
गोल्डन, हरा, सिल्वर रंगों का बहुत ज्यादा प्रयोग न करें।
अधिकतर सूखे रंगों में सिलिका के तत्व होते हैं जो त्वचा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
कौन-कौन से रंग खतरनाक होते हैं
होली में कई रंगों का इस्तेमाल होता है जो सेहत के लिए खतरनाक होता है। कुछ खास गहरे रंग जैसे नीला और हरा रंग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। एक शोध के मुताबिक, गहरे रंगों खासकर नीले और हरे रंगों से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। ऐसे में हल्का गुलाबी, पीला रंग इस्तेमाल करना ठीक होता है। दरअसल, इन गहरे रंगों का संबंध ऑक्युलर टॉक्सिसिटी से है जो कि आँखों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इससे आँखों में जलन, खुजली, पानी निकलना और एलर्जी होती है। इन कृत्रिम रंगों में काँच के टुकड़े, सीसा, एसिड होने से त्वचा संबंधित एलर्जी या अन्य समस्याएँ शुरू हो जाती है। इतना ही नहीं इन गहरे रंगो के अधिक प्रयोग से साँस संबंधी समस्याएं भी होती हैं।
दरअसल, रंगों के निर्माण में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, माइका जैसे हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है उन्हें मुहासे, एलर्जी, एक्जिमा की समस्या हो सकती है। जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनके लिए भी ये रंग खतरनाक हैं। इसलिए रासायनिक रंगों के बजाय विशेषज्ञ प्राकृतिक रंगों या हर्बल रंगों के इस्तेमाल पर अधिक दबाव डालते हैं।
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